वेब सीरीज- नाइन टू फाइव

वेब सीरीज- नाइन टू फाइव
कलाकार- प्रीत कमानी, राजेश कुमार, भाग्यश्री लिमये, अजितेश गुप्ता, तान्या शर्मा
निर्देशक- व्योम छराया
रेटिंग- 3 स्टार्स
Nine To Five Review: जिंदगी में कुछ लोग ऐसे होते हैं, जो हर बार मंजिल के बेहद करीब होते हुए भी पीछे रह जाते हैं। कभी पढ़ाई में दूसरा स्थान, कभी प्यार में अधूरी कामयाबी और कभी करियर में अपनी पहचान बनाने की जद्दोजहद। ‘नाइन टू फाइव’ का अनुज भी ऐसा ही एक युवा है, जिसकी जिंदगी में ‘ऑलमोस्ट’ शब्द ने जैसे स्थायी जगह बना ली है। एक स्टार्टअप में नौकरी मिलने के बाद उसे लगता है कि शायद अब उसकी जिंदगी बदलने वाली है, लेकिन आगे बढ़ने की चाह में उसे ऐसे फैसलों और परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है, जिनका असर उसके रिश्तों पर भी पड़ता है। रस्क मीडिया के निर्माण और व्योम छराया के निर्देशन में बनी यह वेब सीरीज 16 अक्टूबर 2026 से यूट्यूब पर उपलब्ध है। आइए जानते हैं कैसी है ‘नाइन टू फाइव’।
वेब सीरीज की कहानी
कहानी की शुरुआत अनुज (प्रीत कमानी) के नौकरी के इंटरव्यू से होती है। किवी एप नाम के स्टार्टअप में इंटरव्यू देने पहुंचा अनुज घबराया हुआ है। वह बार-बार अपनी टाई ठीक करता है, माथे का पसीना पोंछता है और अपनी बारी आने का इंतजार करता है। कंपनी के मार्केटिंग और स्ट्रैटेजी हेड दीपक (राजेश कुमार) अपने दिलचस्प अंदाज में उसका इंटरव्यू लेते हैं और अनुज को नौकरी मिल जाती है।
इंटरव्यू के दौरान अनुज अपनी जिंदगी के एक दिलचस्प पहलू का जिक्र करता है। उसका दोस्त सूजल उसे ‘ऑलमोस्ट कुमार’ कहकर बुलाता है, क्योंकि वह बचपन से लेकर अब तक लगभग हर काम में सफलता के करीब पहुंचकर भी थोड़ा पीछे रह जाता है। यही बात इस सीरीज की कहानी को एक अलग पहचान देती है। अनुज की जिंदगी में बार-बार दोहराया जाने वाला यह अनुभव कहानी का मुख्य आधार बनता है।
नई नौकरी मिलने पर अनुज को लगता है कि आखिरकार उसकी किस्मत बदल रही है। वह इस खुशी को मनाने के लिए बीयर लेकर अपने किराये के फ्लैट पर पहुंचता है, लेकिन वहां उसका फ्लैटमेट सूजल उसे बताता है कि मकान मालिक ने घर खाली करने के लिए कह दिया है। खुशियों के बीच अचानक आई यह परेशानी अनुज के लिए एक और झटका बन जाती है।
इसी दौरान अनुज की दोस्ती पड़ोस में रहने वाली एक खूबसूरत लड़की (तान्या शर्मा) से होती है। उसकी जिंदगी धीरे-धीरे आगे बढ़ती दिखाई देती है, लेकिन तीसरे एपिसोड में कहानी एक अप्रत्याशित मोड़ लेती है। अनुज को अपनी गर्लफ्रेंड के पास कुछ ऐसे डिजाइन और कागजात दिखाई देते हैं, जिन्हें देखकर वह चौंक जाता है। आखिर इन कागजात का राज क्या है और इसका अनुज की जिंदगी से क्या संबंध है? यह जानने के लिए सीरीज के सभी एपिसोड देखने होंगे।
कलाकारों का काम
प्रीत कमानी सीरीज के केंद्र में हैं और अनुज के किरदार को सहजता से निभाते हैं। वह एक ऐसे युवक की मानसिक उलझन, असुरक्षा और महत्वाकांक्षा को सामने लाते हैं, जो लगातार खुद को साबित करने की कोशिश कर रहा है। उनके अभिनय में एक आम युवा की बेचैनी और आगे बढ़ने की जिद दिखाई देती है। यही वजह है कि अनुज का किरदार दर्शकों से जुड़ने में सफल रहता है।
भाग्यश्री लिमये यश के किरदार में प्रभावशाली हैं। वह स्क्रीन पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराती हैं और यश को एक मजबूत व्यक्तित्व देती हैं। उनका अभिनय कहानी के ऑफिस वाले हिस्सों को भी प्रभावी बनाता है। राजेश कुमार दीपक के रूप में अपनी छाप छोड़ते हैं। उनका सहज अंदाज और डायलॉग डिलविरी किरदार को विश्वसनीय बनाती है। तान्या शर्मा अनुज की गर्लफ्रेंड की भूमिका में सहज दिखाई देती हैं।
कहानी और निर्देशन
सिद्धार्थ तिवारी और व्योम छराया की लेखनी का सबसे दिलचस्प पहलू ‘ऑलमोस्ट कुमार’ की अवधारणा है। यह विचार अपने आप में मजेदार है, लेकिन इसके जरिए जिंदगी में बार-बार अधूरी रह जाने वाली उम्मीदों और कामयाबी के करीब पहुंचकर भी पीछे छूट जाने की भावना को प्रभावी ढंग से दिखाया जा सकता है।
सीरीज में ऑफिस की चुनौतियों के साथ कॉमेडी, रोमांस और इमोशनल सीन भी शामिल हैं। इससे कहानी का दायरा बढ़ता है और अनुज का स्ट्रगल केवल नौकरी तक सीमित नहीं रहता। उसके अनुभव यह भी दिखाते हैं कि कामयाबी पाने की कोशिश में इंसान किस तरह अपनी निजी जिंदगी और रिश्तों को प्रभावित कर सकता है।
निर्देशक व्योम छराया ने कहानी के मूल विचार को सरल और एंटरटेनिंग अंदाज में पेश किया है। सीरीज की सबसे बड़ी अटीवमेंट यह है कि इसका मुख्य किरदार किसी टिपिकल हीरो की तरह नहीं, बल्कि एक आम इंसान की तरह सामने आता है। उसकी परेशानियां, उम्मीदें और निराशाएं दर्शकों को अपनी जिंदगी के अनुभवों की याद दिला सकती हैं।
क्यों देखना चाहिए
‘नाइन टू फाइव’ एक ऐसे युवा की कहानी है, जो हर बार सफलता के करीब पहुंचकर भी खुद को अधूरा महसूस करता है। इसकी सहज कहानी, प्रीत कमानी का स्वाभाविक अभिनय, भाग्यश्री लिमये की प्रभावशाली मौजूदगी और राजेश कुमार के दमदार संवाद इसे देखने लायक बनाते हैं। व्योम छराया का निर्देशन कहानी के विचार को सरलता से दर्शकों तक पहुंचाता है।
सीरीज का मैसेज भी इसकी कहानी की तरह सीधा है-कामयाबी का मतलब हमेशा पहला स्थान हासिल करना नहीं होता। कई बार मंजिल के करीब पहुंचना भी इस बात का संकेत है कि आप सही दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। जरूरी है कि इंसान अपनी गलतियों से सीखे, खुद पर भरोसा बनाए रखे और कोशिश करना न छोड़े।
हालांकि कहानी यंग जनरेशन और उसके करियर से जुड़े स्ट्रगल पर केंद्रित है, लेकिन आगे बढ़ने की चाह, असफलता का डर और रिश्तों को संभालने की चुनौती किसी एक उम्र तक सीमित नहीं हैं। यही वजह है कि ‘नाइन टू फाइव’ का विषय व्यापक दर्शक वर्ग से जुड़ सकता है। रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़ी कहानी और सकारात्मक सोच वाला मनोरंजन पसंद करने वालों के लिए यह वेब सीरीज एक अच्छा विकल्प है।
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