बॉलीवुड के मशहूर कॉमेडियन राजपाल यादव की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। दिल्ली हाईकोर्ट ने चेक बाउंस मामले में उन्हें 4 फरवरी 2026 शाम 4 बजे तक संबंधित जेल अधीक्षक के समक्ष सरेंडर करने का आदेश दिया है। जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा ने राजपाल के व्यवहार को निंदनीय बताते हुए कहा कि बार-बार कोर्ट के भरोसे को तोड़ना गंभीर अपराध है।
यह मामला 2010 का है जब राजपाल ने अपनी फिल्म 'अता-पता लापता' के लिए मुरली प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से 5 करोड़ रुपये का लोन लिया था। एग्रीमेंट के तहत 8 करोड़ रुपये लौटाने थे, लेकिन चेक बाउंस हो गए। नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट्स एक्ट की धारा 138 के तहत निचली अदालत ने राजपाल और उनकी पत्नी को 6-6 महीने की साधारण कैद की सजा सुनाई। जून 2024 में सजा निलंबित की गई थी ताकि मध्यस्थता हो सके। राजपाल ने 2.5 करोड़ रुपये (40 लाख + 2.10 करोड़ किश्तों में) चुकाने का वादा किया, लेकिन कोई भुगतान नहीं हुआ है।
कोर्ट ने टिप्पणी की कि ड्राफ्ट में टाइपिंग एरर का बहाना कमजोर है, क्योंकि गलती पता होने पर भी न रकम जमा की न स्पष्टीकरण दिया। जनवरी 2026 में आखिरी मौका मिला, फिर भी पालन न होने पर अब रियायत बंद है। हालांकि, वकील के अनुरोध पर मुंबई के प्रोफेशनल कमिटमेंट्स को देखते हुए अंतिम समय दिया गया। पहले जमा राशि शिकायतकर्ता कंपनी को रिलीज करने का आदेश भी हुआ। अगली सुनवाई 5 फरवरी को होगी, जहां जेल रिकॉर्ड मांगा जाएगा।
यह विवाद पुराना है। 2018 में राजपाल को इसी केस में 6 महीने जेल और 1.60 करोड़ जुर्माना हुआ था, लेकिन जमानत मिली। बाद में मेलबर्न, दुबई यात्राओं के लिए शर्तों पर इजाजत मिली। राजपाल की फिल्मी दुनिया में मजबूत पकड़ है, लेकिन आर्थिक विवादों ने इमेज को नुकसान पहुंचाया। फैंस कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहे हैं।
राजपाल यादव हिंदी सिनेमा के सबसे लोकप्रिय कॉमेडियन और कैरेक्टर आर्टिस्ट्स में गिने जाते हैं। उन्होंने चुपके चुपके, भूल भुलैया, चोटे मियां बड़े मियां जैसी कई फिल्मों में अपनी अदाकारी से दर्शकों को खूब हंसाया है। उनकी कॉमिक टाइमिंग और मासूमियत भरी एक्टिंग ने उन्हें दर्शकों के दिलों में खास जगह दिलाई है। लेकिन कानूनी विवादों ने उनकी छवि को कई बार प्रभावित किया है।
राजपाल यादव जैसे कलाकार, जिन्होंने अपनी मेहनत और प्रतिभा से बॉलीवुड में पहचान बनाई, अब कानूनी मुश्किलों में फंसे हुए हैं। यह खबर उनके फैंस के लिए निराशाजनक है। लोग सोशल मीडिया पर उनके समर्थन में भी लिख रहे हैं कि उन्हें अपनी गलतियों से सीखकर आगे बढ़ना चाहिए। वहीं, कुछ लोग मानते हैं कि कानून सबके लिए बराबर है और ऐसे मामलों में सख्ती जरूरी है।