बॉलीवुड की तहलका मचाने वाली फिल्म 'धुरंधर' का जादू अभी सिनेमाघरों में बरकरार है, लेकिन पाइरेसी का काला साया पड़ चुका है। रणवीर सिंह और अक्षय खन्ना अभिनीत इस एक्शन थ्रिलर की प्रिंटेड कॉपी पाकिस्तान के अंडरग्राउंड बाजारों में महज 16 रुपये में बिकने लगी है। सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों ने फिल्ममेकर्स और फैंस को सदमे में डाल दिया। यह फिल्म, जो 5 दिसंबर 2025 को रिलीज हुई थी, ने पहले ही दिन 27 करोड़ का कलेक्शन कर रणवीर का रिकॉर्ड तोड़ दिया।
हाल ही में न्यूजीलैंड के यूट्यूबर कार्ल रॉक ने एक वीडियो साझा किया, जिसमें उन्होंने पाकिस्तान के कराची स्थित रेनबो सेंटर में ‘धुरंधर’ की पायरेटेड कॉपी बिकते हुए दिखाया। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि फिल्म की डीवीडी और प्रिंटेड कॉपी खुलेआम दुकानों पर रखी गई हैं और लोग उन्हें खरीद रहे हैं। एक तरफ सिनेमाघरों में दर्शक रणवीर के धमाकेदार स्टंट्स के लिए तालियां बजा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कराची के गलियारों में सस्ते प्रिंट बिक रहे। यह कॉपी साफ-सुथरी लग रही पेज दर पेज डायलॉग्स, एक्शन सीन्स और क्लाइमेक्स तक सब कुछ है। एक पाकिस्तानी वेंडर ने दावा किया कि यह 'लीक हुई स्क्रिप्ट' है, जो भारत से तस्करी कर लाई गई। फिल्म का प्लॉट एक दशक लंबे गुप्त ऑपरेशन पर आधारित, जहां रणवीर एक अंडरकवर एजेंट बनकर पाकिस्तान के अपराधी साम्राज्य में घुसते हैं अब गलत हाथों में है। निर्देशक आदित्य धर की मेहनत पर पानी फिर गया। अक्षय खन्ना का विलेन रोल और संजय दत्त, आर. माधवन जैसे सितारों का साथ इसे ब्लॉकबस्टर बनाता है।
फिल्म इंडस्ट्री में भूचाल आ गया। जियो स्टूडियोज और B62 स्टूडियोज ने सख्त चेतावनी जारी की, लेकिन पाइरेसी गैंग्स रुके नहीं। सोशल मीडिया पर #DhurandharPiracy ट्रेंड कर रहा, जहां फैंस गुस्से में हैं। एक दर्शक ने लिखा, "16 रुपये में बिकेगी 200 करोड़ की फिल्म? शर्मनाक!" भारत सरकार की साइबर सेल ने पाकिस्तान से कनेक्शन जांचने का ऐलान किया। यह पहला मामला नहीं 'धुरंधर 2' की घोषणा के बाद से ही सिक्योरिटी टाइट हुई थी, जो 19 मार्च 2026 को रिलीज होगी।
पाकिस्तान में फिल्म पर बैन के बावजूद लोग इसे देखने के लिए उत्साहित हैं। नेटफ्लिक्स पर रिलीज होने के बाद फिल्म को वहां के दर्शकों ने खूब पसंद किया। अब पायरेटेड कॉपी के जरिए यह फिल्म और भी बड़े पैमाने पर देखी जा रही है। पायरेसी भारतीय फिल्म उद्योग के लिए हमेशा से एक बड़ी चुनौती रही है। करोड़ों रुपये के बजट से बनी फिल्मों को जब इस तरह सस्ते दामों पर बेचा जाता है, तो न केवल निर्माताओं को नुकसान होता है बल्कि कलाकारों और तकनीकी टीम की मेहनत भी प्रभावित होती है।