हिंदी सिनेमा में दो दशकों से ज्यादा का सफर तय कर चुके अभिनेता सौरभ शुक्ला ने सफलता की परिभाषा को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। हाल ही में एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने साफ किया कि उनके लिए सफलता का मतलब महंगी गाड़ियां या पीआर (PR) कंपनियों का शोर नहीं, बल्कि उनके काम की गुणवत्ता है। 63 वर्षीय अभिनेता का मानना है कि आज के दौर में कलाकारों के प्रदर्शन से ज्यादा उनके रहन-सहन और 'इमेज बिल्डिंग' पर जोर दिया जा रहा है, जो कि चिंताजनक है।
