Rose Day Special: एक दौर था जब हिंदी सिनेमा में मधुबाला और दिलीप कुमार की मोहब्बत के चर्चे बिखरे रहते थे। कहा जाता है कि मधुबाला, दिलीप कुमार की सबसे बड़ी फैन भी थी। काम करते -करते धीरे-धीरे वे उन्हें कब पागलों की तरह चाहने लगीं पता ही न चला। एक-दूसरे के प्रति खिंचाव देखते ही देखते प्यार तब्दील हो गया। दिलचस्प बात यह है कि इस मोहब्बत की शुरुआत गुलाब के फूल से हुई थी। दिलीप साहब ने मधुबाला का भेजा गुलाब कबूल किया।
मधुबाला ने जैसे ही दिलीप कुमार को सामने से देखा तो वे पहली बार में ही दिल हार बैठी थी। दिलीप भी शादीशुदा नहीं थे। मगर उन्हें यह अहसास नहीं था कि मधुबाला उनसे बेइंतहा प्यार करने लगी हैं। एक दिन उनके पास एक खत और पैकेट पहुंचा। दिलीप ने पैकेट खोला तो उसमें लेटर निकला। उसमें लिखा था, 'आपको एक गुलाब का फूल भेज रही हूं। लेटर में लिखा था कि प्यार कबूल हो तो गुलाब अपने पास रखिए वरना वापस भेज दीजिए'।
बस यहीं से शुरू हुई दोनों की आइकॉनिक लव स्टोरी। दिलीप कुमार ने वह फूल अपने पास सहेजकर रख लिया। इस तरह दोनों के दिल मिल गए। प्यार की बातें चारों तरफ फैलने लगीं। वहीं दोनों एक दूसरे के प्यार में बुरी तरह से गिरफ्तार हो गए।
हालांकि, मोहब्बत का यह सफल आगे परेशानी भरा निकला। मधुबाला और दिलीप कुमार ने 1951 में रिलीज हुई फिल्म 'तराना' में पहली बार साथ काम किया था। यहीं दोनों मिले थे। लेकिन करीब नौ साल चले इस सफर का अंत बहुत ही बुरा था। मानो किसी की नजर लग गई हो। दिलीप कुमार और मधुबाला हमेशा के लिए अलग हो गए।
कहा जाता है कि दिलीप कुमार और मधुबाल को अलग करने में सबसे बड़ा रोल एक्ट्रेस के पिता का रहा है। वह दिलीप कुमार और मधुबाला के रिश्ते से बेहद नाखुश थे। उन्हें दोनों को अलग करने में एड़ी चोटी का जोर लगा दिया था और सफल भी रहे थे। एक वक्त तो ऐसा आया था कि मधुबाला और दिलीप कुमार की अनबन कोर्ट तक जा पहुंची थी। वहीं मुगल ए आजम के सेट पर दिलीप कुमार ने गुस्से में मधुबाला को तमाचा तक जड़ दिया। एक्ट्रेस बेसुध होकर सेट पर गिर पड़ी थी।