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Shahid Kapoor: 'देवा' और 'ओ रोमियो' के फ्लॉप होने के बाद शाहिद कपूर के कॉन्फिडेंस में आई कमी! अकेले नहीं सुनते कोई भी स्क्रिप्ट

Shahid Kapoor: शाहिद कपूर की हालिया फ़िल्में, 'देवा' और 'ओ रोमियो' बॉक्स ऑफ़िस पर अच्छा परफॉमेंस नहीं दे पाईं। इसके बाद से एक्टर ने स्क्रिप्ट को परखने का अपना तरीका बदल लिया है। अब शाहिद अपने आने वाले प्रोजेक्ट को लेकर और ज्यादा सतर्कता बरतते हैं।

Moneycontrol Hindi Newsअपडेटेड Jun 12, 2026 पर 10:06 AM
Shahid Kapoor: 'देवा' और 'ओ रोमियो' के फ्लॉप होने के बाद शाहिद कपूर के कॉन्फिडेंस में आई कमी! अकेले नहीं सुनते कोई भी स्क्रिप्ट
शाहिद अब 'कॉकटेल 2' की रिलीज़ का इंतज़ार कर रहे हैं। होमी अदजानिया के निर्देशन और तरुण जैन व लव रंजन की लिखी इस फ़िल्म में शाहिद, कृति सेनन और रश्मिका मंदाना मुख्य भूमिकाओं में हैं।

Shahid Kapoor: बॉलीवुड एक्टर शाहिद कपूर की पिछली दो फ़िल्में, 'देवा' और 'ओ रोमियो', काफ़ी चर्चा में रहने के बावजूद बॉक्स ऑफ़िस पर कोई खास कमाल नहीं दिखा पाईं। अब एक्टर अपनी आने वाली फ़िल्म 'कॉकटेल 2' के प्रमोशन में बिज़ी हैं। 'द हॉलीवुड रिपोर्टर इंडिया' को दिए एक हालिया इंटरव्यू में शाहिद ने बताया कि पिछली दो फ़िल्मों के निराशाजनक प्रदर्शन की वजह से उन्होंने स्क्रिप्ट को परखने का अपना तरीका बदल लिया है। उन्होंने बताया कि अब वह अकेले स्क्रिप्ट नहीं सुनते, बल्कि इस प्रोसेस के दौरान अपनी टीम को भी साथ रखना पसंद करते हैं।

अपनी हालिया फ़िल्मों की नाकामी पर बात करते हुए शाहिद ने माना कि ऐसी असफलताएं कई तरह की चीजें सोचने पर मजबूर कर देती हैं। उन्होंने कहा, "जब आप इतने लंबे समय तक काम करते हैं, तो आपको उम्मीद होती है कि चीज़ें सही होंगी। लेकिन असल में ऐसा नहीं होता। आपने कितने साल भी काम किया है, इससे कोई फ़र्क नहीं पड़ता।

एक्टर ने कहा कि फ़िल्में बहुत अनिश्चित होती हैं। एक एक्टर के तौर पर, फ़िल्म कैसा करेगी, इस पर आपका कोई कंट्रोल नहीं होता। एक एक्टर के तौर पर आप जो करते हैं, उस पर भी आपका पूरा कंट्रोल नहीं होता, थोड़ा-बहुत ही होता है। डायरेक्टर ही तय करता है कि फ़्रेम कैसा होगा और उसे भी उससे खुश होना चाहिए।"

उन्होंने 'देवा' और 'ओ रोमियो' की नाकामी के बाद किए गए एक बड़े बदलाव के बारे में भी बात की। शाहिद ने कहा, "एक बात जो मैंने अब अपनी टीम से कहनी शुरू की है, वह यह है कि शायद मुझे अपनी स्क्रिप्ट खुद तय नहीं करनी चाहिए। हो सकता है कि मुझे पता हो कि कैमरे के सामने क्या करना है, लेकिन शायद मुझे यह न पता हो कि कौन सी फ़िल्में चुननी हैं, या हो सकता है कि मेरा फ़ैसला सिर्फ़ कलात्मक सोच पर आधारित हो, जो शायद लोगों को पसंद न आए।

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