Get App

आखिरी बारिश में इतना क्यों टर्र-टर्र करते हैं मेंढक? 1 KM दूर तक सुनाई देती है आवाज! जानें वजह

बारिश के मौसम में मेंढक ज्यादा एक्टिव हो जाते हैं। वहीं रात में उनकी टर्राने की आवाज दूर तक सुनाई देती है। बारिश का मौसम मेंढकों के लिए प्रजनन (रिप्रोडक्शन) का सही समय होता है। इसलिए वे साथी को अट्रैक्ट करने और अपनी मौजूदगी बताने के लिए ज्यादा आवाज करते हैं

Edited By: Ankita Pandeyअपडेटेड Aug 18, 2026 पर 9:41 PM
आखिरी बारिश में इतना क्यों टर्र-टर्र करते हैं मेंढक? 1 KM दूर तक सुनाई देती है आवाज! जानें वजह
मेंढकों की आवाज का इस्तेमाल सिर्फ प्रजनन (रिप्रोडक्शन) या आपसी मुकाबले के लिए नहीं होता (Photo: Canva)

बारिश शुरू होते ही रात के समय मेंढकों की 'टर्र-टर्र' टर्राने की आवाजें ज्यादा सुनाई देने लगती हैं। बारिश के मौसम में उनकी आवाज इतनी तेज होती है कि ऐसा लगता है की वो हमारे आस-पास ही है। लेकिन ऐसा नहीं होता है बल्कि ये आवाज काफी दूर से आती है। बारिश का मौसम मेंढकों के लिए प्रजनन (रिप्रोडक्शन) का सही समय होता है। इसलिए वे साथी को अट्रैक्ट करने और अपनी मौजूदगी बताने के लिए ज्यादा आवाज करते हैं। इसी आवाज से मादा को सही साथी चुनने में मदद मिलती है। इसलिए बारिश के दिनों में तालाबों, गड्ढों और पानी जमा होने वाली जगहों के आसपास मेंढकों की टर्राने की आवाज ज्यादा सुनाई देती है। जानें इसके बारे में

मध्य प्रदेश के सागर के जूलॉजी विभाग के एक्सपर्ट डॉ. मनीष जैन के अनुसार, बारिश के मौसम में पानी जमा होने से मेंढकों की गतिविधियां बढ़ जाती हैं। तालाब और आसपास के इलाकों में पानी मिलने से उन्हें खाने, घूमने और प्रजनन (रिप्रोडक्शन) के लिए बेहतर माहौल मिलता है। इसी वजह से मॉनसून के दौरान मेंढक ज्यादा एक्टिव होकर बार-बार टर्राते हैं।

बारिश के मौसम में होते हैं ज्यादा एक्टिव

मेंढकों की आवाज का इस्तेमाल सिर्फ प्रजनन (रिप्रोडक्शन) या आपसी मुकाबले के लिए नहीं होता। एक्सपर्ट के अनुसार, कुछ आवाजें आसपास मौजूद दूसरे मेंढकों को खतरे की जानकारी देने के लिए भी होती हैं। ऐसे संकेत मिलने पर दूसरे मेंढक सतर्क हो जाते हैं और खतरा महसूस होने पर तुरंत प्रतिक्रिया दे सकते हैं। बारिश के दिनों में मेंढकों की आवाज सामान्य दिनों के मुकाबले ज्यादा तेज और साफ सुनाई देती है। मानसून में मेंढक पानी के आसपास अधिक एक्टिव रहते हैं। गीले वातावरण में उनकी आवाज दूर तक पहुंचती है, इसलिए कई बार ऐसा लगता है कि मेंढक पास ही टर्रा रहे हैं, जबकि वे काफी दूरी पर हो सकते हैं।

सब समाचार

+ और भी पढ़ें