RBI Repo Rate Hike October 2026: भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति (MPC) 7 अक्टूबर को अपनी समीक्षा बैठक के नतीजों का ऐलान करने वाली है। अर्थशास्त्रियों और वित्तीय संस्थानों का मानना है कि इस बैठक में केंद्रीय बैंक रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट्स (bps) की बढ़ोतरी कर सकता है। इतना ही नहीं, विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले महीनों में ब्याज दरों में और भी इजाफा देखने को मिल सकता है। RBI के इस कदम का सीधा असर आम कर्जदारों और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) निवेशकों पर पड़ेगा।
यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के मुताबिक, वित्त वर्ष 2027 के दौरान रेपो रेट बढ़कर 5.75% से 6% के स्तर तक पहुंच सकता है। वहीं, जापानी ब्रोकरेज फर्म नोमुरा का अनुमान है कि अक्टूबर और दिसंबर में 25-25 बेसिस पॉइंट्स की दो बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे टर्मिनल रेट 5.75% हो जाएगा।
मनीकंट्रोल के 19 अर्थशास्त्रियों, ट्रेजरी प्रमुखों और फिक्स्ड-इनकम विशेषज्ञों के बीच कराए गए एक पोल में भी ज्यादातर एक्सपर्ट्स ने माना कि MPC रेपो रेट को 25 bps बढ़ाकर 5.5% कर सकती है। अगर ऐसा होता है, तो यह फरवरी 2023 के बाद रेपो रेट में पहला इजाफा होगा। केवल 4 विशेषज्ञों का मानना है कि दरें यथावत यानी बिना किसी बदलाव के जारी रहेंगी।
होम लोन EMI पर पड़ेगा सीधा असर
रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट्स की बढ़ोतरी से उन कर्जदारों की ब्याज दरें तुरंत बढ़ जाएंगी, जिनके होम लोन एक्सटर्नल बेंचमार्क (जैसे- EBLR या रेपो रेट) से जुड़े हुए हैं।
बैंकबाजार के सीईओ आदिल शेट्टी के अनुसार, 'अगर किसी ग्राहक ने 25 साल की अवधि के लिए 7.5% की ब्याज दर पर 50 लाख रुपये का होम लोन लिया है, तो वर्तमान में उसकी EMI लगभग ₹36,950 प्रति माह बैठती है। 25 bps की बढ़ोतरी के बाद यह EMI लगभग ₹817 प्रति माह बढ़ जाएगी। पूरे लोन टैन्योर के दौरान ग्राहक को करीब ₹2.45 लाख अतिरिक्त ब्याज चुकाना पड़ेगा।'
आमतौर पर रेपो-लिंक्ड लोन की दरें पॉलिसी चेंज के कुछ महीनों के भीतर रीसेट हो जाती हैं। बैंक अपनी शर्तों के हिसाब से या तो आपकी मासिक किश्त (EMI) बढ़ा सकते हैं या फिर लोन की अवधि को लंबा कर सकते हैं। आदिल शेट्टी ने सलाह दी है कि कर्जदार अपनी EMI में मामूली बढ़ोतरी करके या हर साल पार्ट-प्रीपेमेंट करके इस एक्स्ट्रा वित्तीय बोझ को कम कर सकते हैं।
पुराने FD इन्वेस्टर्स को नहीं मिलेगा तुरंत फायदा, अपनाएं ये स्ट्रेटजी
फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) में निवेश करने वालों के लिए राहत और सतर्कता दोनों की खबर है। रेपो रेट में बढ़ोतरी से उन FDs की ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं होगा जो पहले से बुक की जा चुकी हैं। आपकी पुरानी FD पर मैच्योरिटी तक वही ब्याज मिलता रहेगा जो तय हुआ था।
आदिल शेट्टी ने बताया कि बढ़ी हुई ब्याज दरों का फायदा सबसे पहले नई FDs कराने वालों को मिलता है या फिर जब आपकी पुरानी FD रीन्यू होती है। उदाहरण के लिए, अगर बैंक दरों में 25 bps का पूरा फायदा पास ऑन करते हैं, तो ₹10 लाख की नई FD पर टैक्स से पहले सालाना लगभग ₹2,500 एक्स्ट्रा ब्याज मिल सकता है।
वैसे FDs पर ज्यादा ब्याज के लिए एक्सपर्ट्स ने एक खास तरीका सुझाया हुआ है। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस समय FDs की मैच्योरिटी टाइमिंग काफी अहम हो जाती है। अगर आपको लगता है कि आने वाले समय में ब्याज दरें और बढ़ेंगी, तो सारा पैसा एक ही FD में लॉक करने के बजाय 'FD लेडरिंग' अपनाएं।
अलग-अलग मैच्योरिटी डेट्स वाली FDs में पैसा बांटकर लगाने से आपको समय-समय पर लिक्विडिटी भी मिलती रहती है और आप हर मैच्योरिटी पर नई और ज्यादा ब्याज दरों का फायदा उठा सकते हैं। हालांकि, FD रेट्स में असल बढ़ोतरी इस बात पर निर्भर करेगी कि अलग-अलग बैंक RBI के इस फैसले को कैसे लागू करते हैं।