'पेश हों या कार्रवाई का सामना करें': समय रैना की बढ़ी मुश्किलें! दिव्यांगों का मजाक उड़ाने पर 5 इंफ्लुएंसर को सुप्रीम कोर्ट ने किया तलब

Samay Raina News: याचिकाकर्ता एनजीओ ने आरोप लगाया है कि समय रैना और अन्य ने अपने शो में स्पाइनल मस्कुलर अट्रोफी (SMA) नामक दुर्लभ बीमारी से पीड़ित लोगों का मजाक उड़ाया। पीठ ने मुंबई के पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया कि वे पांचों इंफ्लुएंसर को नोटिस जारी कर अदालत में उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करें। अन्यथा उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी

अपडेटेड May 05, 2025 पर 4:39 PM
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Samay Raina News: शीर्ष अदालत ने कहा कि कुछ गंभीर सुधारात्मक और दंडात्मक कार्रवाई की आवश्यकता है

Samay Raina News: सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (5 मई) को एक गैर सरकारी संगठन (NGO) की याचिका पर विवादित शो 'इंडियाज गॉट लैटेंट' के होस्ट समय रैना समेत पांच सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर को तलब किया है। एनजीओ ने आरोप लगाया है कि उन्होंने अपने शो में स्पाइनल मस्कुलर अट्रोफी (SMA) नामक दुर्लभ बीमारी से पीड़ित लोगों का मजाक उड़ाया। जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस एन. कोटिश्वर सिंह की पीठ ने मुंबई के पुलिस कमिश्नर को निर्देश दिया कि वे पांचों इंफ्लुएंसर को नोटिस जारी कर अदालत में उनकी उपस्थिति सुनिश्चित करें। अन्यथा उनके खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

पीठ ने एनजीओ 'क्योर एसएमए फाउंडेशन ऑफ इंडिया (Cure SMA Foundation of India)' की याचिका पर अटॉर्नी जनरल आर वेंकटरमणि से भी सहायता मांगी। इसमें दिव्यांग लोगों और दुर्लभ विकारों से पीड़ित व्यक्तियों से संबंधित सोशल मीडिया कंटेंट को रेग्युलेट करने संबंधी निर्देश देने का अनुरोध किया गया।

पीठ ने ऐसे लोगों का उपहास करने वाले इंफ्लुएंसर को नुकसानदेह और मनोबल को चोट पहुंचाने वाला करार दिया। शीर्ष अदालत ने कहा कि कुछ गंभीर सुधारात्मक और दंडात्मक कार्रवाई की आवश्यकता है ताकि ऐसी चीजें फिर न हों। अदालत ने कहा, "ऐसे लोगों के बारे में सोचें जिन्होंने गैर-जिम्मेदाराना टिप्पणी की है, उनके खिलाफ कानून के तहत क्या सुधारात्मक और दंडात्मक कार्रवाई की जानी चाहिए।"


NGO की ओर से पेश वरिष्ठ वकील अपराजिता सिंह से पीठ ने कहा, "यह बहुत ही नुकसानदायक और मनोबल गिराने वाला है। ऐसे कानून हैं जो इन लोगों को मुख्यधारा में लाने का प्रयास करते हैं और एक घटना से समूचा प्रयास निष्फल हो जाता है। आपको कानून के तहत कुछ सुधारात्मक और दंडात्मक कार्रवाई के बारे में सोचना चाहिए।"

पीठ ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का मौलिक अधिकार निरपेक्ष नहीं है। किसी को भी इस अधिकार की आड़ में किसी को भी नीचा दिखाने की अनुमति नहीं दी जा सकती। पीठ ने दिव्यांगों और दुर्लभ विकारों से पीड़ित लोगों से संबंधित सोशल मीडिया कंटेंट पर दिशानिर्देश बनाने पर विचार किया।

एनजीओ ने मौजूदा कानूनी ढांचे में कमियों का हवाला देते हुए पीठ से ऑनलाइन कंटेंट पर दिशानिर्देश तैयार करने का आग्रह किया था। पीठ ने अपनी टिप्पणी में आगे कहा, "इनका बहुत हानिकारक प्रभाव पड़ता है। एक आकस्मिक कार्रवाई से आप सब कुछ पूरी तरह से पटरी से उतार देते हैं। इस तरह की स्वतंत्रता पर हम अंकुश लगाएंगे।"

संवेदनशीलता की कमी पर अफसोस जताते हुए फाउंडेशन ने कहा कि समय रैना जैसे कुछ व्यक्ति कॉमेडी शो होस्ट करते हैं। वे इस दौरान ऐसी स्थिति वाले व्यक्तियों, दवाओं और इलाज की उच्च लागत पर असंवेदनशील टिप्पणी करते हैं।

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फाउंडेशन की प्राथमिक मांग है कि अदालत केंद्र सरकार को प्रस्तावित नियामक ढांचे में प्रावधान शामिल करने का निर्देश दे, जिसका उद्देश्य "विकलांग व्यक्तियों, उनकी बीमारियों और उनके उपचार विकल्पों के खिलाफ किसी भी अपमानजनक, अपमानजनक, सक्षमतावादी और/या कमतर आंकने वाले कंटेंट को रेग्यूलेट करना" है।

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