Cinema Ka Flashback: बॉलीवुड की वो 'हीर' जिसकी कहानी का अंत था बेहद खौफनाक, महज 7 फिल्मों से बनाई पहचान

Cinema Ka Flashback: लंदन से तालीम लेकर आईं अभिनेत्री प्रिया राजवंश ने महज 7 फिल्मों से अपनी खास पहचान बनाई, लेकिन चेतन आनंद के साथ उनके गहरे रिश्ते और संपत्ति विवाद ने उनकी जिंदगी का दुखद अंत कर दिया। साल 2000 में वसीयत के विवाद के चलते उन्हीं के बंगले में उनकी बेरहमी से हत्या कर दी गई, जिसके आरोप में चेतन आनंद के दोनों बेटों को सजा हुई थी।

अपडेटेड Mar 28, 2026 पर 4:04 PM
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फिल्मी दुनिया की चकाचौंध के पीछे अक्सर कुछ ऐसे अंधेरे छिपे होते हैं, जिनकी कल्पना कर पाना भी मुश्किल होता है। बॉलीवुड के इतिहास में एक ऐसा ही नाम है प्रिया राजवंश। लंदन से तालीम लेकर आईं इस खूबसूरत अभिनेत्री ने अपने करियर में केवल 7 फिल्में कीं, लेकिन उनकी अदाकारी और सादगी ने उन्हें अमर कर दिया। हालांकि, पर्दे पर 'हीर' का किरदार निभाने वाली इस अदाकारा की असल जिंदगी का अंत किसी डरावनी फिल्म से कम नहीं था।

लंदन से बॉलीवुड तक का सफर

शिमला में जन्मी प्रिया राजवंश का असली नाम वीरा सुंदर सिंह था। वह बेहद पढ़ी-लिखी थीं और उन्होंने लंदन की मशहूर 'रॉयल एकेडमी ऑफ ड्रामेटिक आर्ट' (RADA) से अभिनय सीखा था। किस्मत उन्हें मुंबई ले आई, जहां उनकी मुलाकात दिग्गज फिल्म निर्माता चेतन आनंद (देव आनंद के भाई) से हुई। चेतन साहब उस वक्त अपनी फिल्म 'हीर रांझा' के लिए एक नए चेहरे की तलाश में थे। प्रिया की खूबसूरती और शालीनता ने उन्हें पहली नजर में ही प्रभावित कर लिया।

चेतन आनंद के साथ गहरा रिश्ता


प्रिया ने 1964 में फिल्म 'हकीकत' से अपना डेब्यू किया, लेकिन उन्हें असली पहचान 1970 की फिल्म 'हीर रांझा' से मिली। पेशेवर रिश्तों के साथ-साथ प्रिया और चेतन आनंद के बीच निजी नजदीकियां भी बढ़ने लगीं। चेतन अपनी पत्नी उमा से अलग हो चुके थे, जिसके बाद प्रिया उनके जीवन का अभिन्न हिस्सा बन गईं। दोनों सालों तक लिव-इन रिलेशनशिप में रहे। प्रिया ने अपने पूरे करियर में सिर्फ चेतन आनंद की फिल्मों में ही काम किया, जिनमें 'हंसते जख्म' और 'कुदरत' जैसी यादगार फिल्में शामिल हैं।

वसीयत बनी जान की दुश्मन

प्रिया राजवंश की जिंदगी में असली तूफान तब आया जब 1997 में चेतन आनंद का निधन हो गया। चेतन ने अपनी वसीयत में जुहू स्थित अपने आलीशान बंगले 'रुइया पार्क' का एक हिस्सा प्रिया के नाम कर दिया था। वसीयत के मुताबिक, प्रिया को उस बंगले में जीवनभर रहने का अधिकार था। यही संपत्ति उनके और चेतन आनंद के बेटों (केतन और विवेक आनंद) के बीच विवाद की जड़ बन गई।

वो काली रात और खौफनाक अंत

27 मार्च, 2000 को उसी बंगले में प्रिया राजवंश की बेरहमी से हत्या कर दी गई। शुरुआत में इसे आत्महत्या दिखाने की कोशिश की गई, लेकिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट ने चौंकाने वाले खुलासे किए—प्रिया का गला घोंटा गया था। जांच के बाद पुलिस ने चेतन आनंद के दोनों बेटों और उनके दो कर्मचारियों को हत्या के आरोप में गिरफ्तार किया। साल 2002 में अदालत ने उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई, हालांकि बाद में उन्हें जमानत मिल गई।

प्रिया राजवंश एक ऐसी कलाकार थीं जिन्होंने अपनी शर्तों पर जिंदगी जी। आज भी जब 'हीर रांझा' के गाने गूंजते हैं, तो उनकी मासूमियत आंखों के सामने आ जाती है, लेकिन उनकी रहस्यमयी मौत का दर्द आज भी सिने प्रेमियों के दिल को झकझोर देता है।

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