मोटापा और डायबिटीज ने बढ़ाई चिंता, रिपोर्ट में सामने आई हैरान करने वाली तस्वीर

भारत की सेहत को लेकर आई नई NFHS-6 रिपोर्ट ने चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, देश में मोटापा और हाई ब्लड शुगर के मामले पहले के मुकाबले बढ़े हैं। खास बात यह है कि यह समस्या अब गांवों में भी तेजी से फैल रही है। वहीं, बच्चों के स्वास्थ्य से जुड़े कुछ आंकड़ों में राहत भरी तस्वीर देखने को मिली है

अपडेटेड May 30, 2026 पर 9:37 AM
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NFHS-6 के आंकड़े साफ बताते हैं कि भारत तेजी से बदलती जीवनशैली का असर झेल रहा है।

आजकल मोटापा सिर्फ बड़े शहरों की समस्या नहीं रह गया है। बदलती जीवनशैली, घंटों बैठकर काम करना, जंक फूड का बढ़ता चलन और शारीरिक गतिविधियों की कमी के कारण गांवों और शहरों दोनों में लोगों का वजन तेजी से बढ़ रहा है। हाल ही में जारी NFHS-6 रिपोर्ट में भी यही तस्वीर सामने आई है। रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले कुछ सालों में पुरुषों और महिलाओं दोनों में मोटापे के मामले बढ़े हैं। इसके साथ ही हाई ब्लड शुगर जैसी समस्याएं भी तेजी से बढ़ रही हैं, जो आगे चलकर डायबिटीज और अन्य बीमारियों का खतरा बढ़ा सकती हैं।

हालांकि, रिपोर्ट में बच्चों के स्वास्थ्य को लेकर कुछ अच्छी खबर भी मिली है। ऐसे में ये  सर्वे देश की बदलती स्वास्थ्य स्थिति को समझने का एक महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। आइए जानते हैं रिपोर्ट में कौन-कौन से अहम आंकड़े सामने आए हैं।

NFHS-6 रिपोर्ट में सामने आए अहम आंकड़े


स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय की ओर से कराए गए NFHS-6 सर्वे में देश के 715 जिलों के लगभग 6.79 लाख परिवारों को शामिल किया गया। इस सर्वे का मकसद लोगों के स्वास्थ्य, पोषण और परिवार कल्याण से जुड़ी स्थिति को समझना था। रिपोर्ट में कई ऐसे आंकड़े सामने आए हैं, जो भारत में बदलती जीवनशैली की कहानी बयां करते हैं।

महिलाओं में तेजी से बढ़ रहा मोटापा

रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2019-21 में 24 प्रतिशत महिलाएं अधिक वजन या मोटापे की श्रेणी में थीं। वहीं 2023-24 तक यह आंकड़ा बढ़कर 30.7 प्रतिशत हो गया। यानी पांच साल के भीतर महिलाओं में मोटापे के मामलों में 6.7 प्रतिशत अंकों की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

शहरों में ये समस्या ज्यादा गंभीर नजर आई। शहरी क्षेत्रों में 42.8 प्रतिशत महिलाएं अधिक वजन या मोटापे से प्रभावित पाई गईं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में ये आंकड़ा 25.5 प्रतिशत रहा।

पुरुषों का बढ़ता वजन भी चिंता का विषय

महिलाओं की तरह पुरुषों में भी मोटापे के मामले तेजी से बढ़े हैं। वर्ष 2019-21 में 22.9 प्रतिशत पुरुष अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त थे, लेकिन 2023-24 में ये संख्या बढ़कर 27.3 प्रतिशत हो गई।

ग्रामीण इलाकों में 23 प्रतिशत पुरुषों का वजन सामान्य से अधिक पाया गया, जबकि शहरों में ये आंकड़ा 36.3 प्रतिशत तक पहुंच गया। ये बताता है कि बदलती खानपान की आदतें और कम होती शारीरिक गतिविधियां लोगों की सेहत पर असर डाल रही हैं।

हाई ब्लड शुगर के मामले भी बढ़े

रिपोर्ट में सिर्फ मोटापा ही नहीं, बल्कि हाई ब्लड शुगर के बढ़ते मामलों को लेकर भी चिंता जताई गई है। 15 साल और उससे अधिक उम्र के लोगों में ब्लड शुगर बढ़ने की समस्या पहले की तुलना में ज्यादा देखने को मिली।

पुरुषों में हाई या बहुत अधिक ब्लड शुगर स्तर वाले लोगों का प्रतिशत 15.6 से बढ़कर 20.9 हो गया। शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा 23.9 प्रतिशत और ग्रामीण क्षेत्रों में 19.7 प्रतिशत दर्ज किया गया।

महिलाओं में भी बढ़ रहा डायबिटीज का खतरा

महिलाओं में हाई ब्लड शुगर के मामले पुरुषों से कम जरूर हैं, लेकिन वृद्धि की रफ्तार काफी तेज है। 2019-21 में 13.5 प्रतिशत महिलाओं ने हाई ब्लड शुगर या उससे संबंधित दवा लेने की जानकारी दी थी। अब यह आंकड़ा बढ़कर 17.8 प्रतिशत पहुंच गया है।

शहरों में 21.9 प्रतिशत और गांवों में 16.2 प्रतिशत महिलाएं इस समस्या से प्रभावित पाई गईं।

ऑपरेशन से होने वाले प्रसव में भी बढ़ोतरी

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि सी-सेक्शन यानी ऑपरेशन के जरिए होने वाले प्रसव की संख्या लगातार बढ़ रही है। खासतौर पर निजी अस्पतालों में ये बढ़ोतरी ज्यादा देखने को मिली।

निजी स्वास्थ्य संस्थानों में 2019-21 के दौरान 47.4 प्रतिशत प्रसव सी-सेक्शन से हुए थे, जो 2023-24 में बढ़कर 54.1 प्रतिशत हो गए। वहीं सरकारी अस्पतालों में यह आंकड़ा 14.3 प्रतिशत से बढ़कर 16.9 प्रतिशत तक पहुंच गया।

बच्चों की सेहत को लेकर राहत की खबर

रिपोर्ट में एक सकारात्मक पहलू भी देखने को मिला। पांच साल से कम उम्र के बच्चों में ठिगनेपन (स्टंटिंग) जिसका मतलब है, बच्चों में होने वाली शारीरिक और मानसिक विकास की एक गंभीर समस्या, जिसमें बच्चे की लंबाई उसकी उम्र के अनुपात में कम रह जाती है। ये समस्या पहले की तुलना में कम हुई है।

2019-21 में जहां 35.5 प्रतिशत बच्चे स्टंटिंग से प्रभावित थे, वहीं 2023-24 में ये आंकड़ा घटकर 29.3 प्रतिशत रह गया। यह संकेत देता है कि बच्चों के पोषण और स्वास्थ्य सुधार के लिए किए जा रहे प्रयासों का असर दिखने लगा है।

बदलती जीवनशैली दे रही चेतावनी

NFHS-6 के आंकड़े साफ बताते हैं कि भारत तेजी से बदलती जीवनशैली का असर झेल रहा है। एक ओर बच्चों के पोषण में सुधार हो रहा है, लेकिन दूसरी ओर वयस्कों में मोटापा और हाई ब्लड शुगर जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि संतुलित भोजन, नियमित व्यायाम और सक्रिय दिनचर्या अपनाकर इन समस्याओं के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

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