नींद में चलने की आदत कहीं बीमारी का संकेत तो नहीं? एक्सपर्ट से समझें कारण और इलाज
हम में से कई लोग रात में नींद के दौरान चलने की समस्या का अनुभव करते हैं, लेकिन इसके पीछे की वजह पर कम ही ध्यान देते हैं। क्या आपने कभी सोचा है कि ऐसा क्यों होता है? अगर नहीं, तो आइए जानते हैं इसके कारण और इससे जुड़ी जरूरी बातें, जो आपको हैरान भी कर सकती हैं
हमारी नींद दो हिस्सों—REM और Non-REM—में बंटी होती है।
क्या आपने कभी सोचा है कि कोई व्यक्ति गहरी नींद में होते हुए भी उठकर चलने लगे, दरवाजा खोल दे या घर के बाहर तक निकल जाए और उसे इसका बिल्कुल भी एहसास न हो? यह सुनने में अजीब जरूर लगता है, लेकिन ऐसी स्थिति वास्तव में होती है, जिसे मेडिकल भाषा में स्लीपवॉकिंग (Somnambulism) कहा जाता है। इस दौरान व्यक्ति आधी नींद और आधी जागी अवस्था में होता है, इसलिए वह सामान्य गतिविधियां कर सकता है, लेकिन उसे कुछ याद नहीं रहता।
ये समस्या अक्सर बच्चों में अधिक देखी जाती है, हालांकि बड़े लोग भी इससे प्रभावित हो सकते हैं। कई बार लोग इसे हल्के में ले लेते हैं, लेकिन इसके पीछे कई कारण छिपे हो सकते हैं। सही जानकारी और जागरूकता से इस स्थिति को बेहतर तरीके से समझा और संभाला जा सकता है।
दिमाग सोता है, शरीर जाग जाता है
हमारी नींद दो हिस्सों—REM और Non-REM—में बंटी होती है। स्लीपवॉकिंग आमतौर पर गहरी नींद यानी Non-REM स्टेज में होती है। इस दौरान दिमाग का एक हिस्सा आराम कर रहा होता है, जबकि शरीर सक्रिय हो जाता है। यही वजह है कि व्यक्ति चल-फिर सकता है, लेकिन उसे होश नहीं होता कि वो क्या कर रहा है।
किन कारणों से बढ़ती है यह समस्या?
नींद में चलने के पीछे कई कारण हो सकते हैं। अधूरी नींद, ज्यादा तनाव और चिंता, जेनेटिक कारण, बुखार या बीमारी, और शराब या कुछ दवाइयों का असर—ये सभी ट्रिगर बन सकते हैं।
क्या यह किसी बड़ी बीमारी का संकेत है?
अक्सर ये समस्या सामान्य होती है, लेकिन बार-बार होने पर इसे नजरअंदाज करना सही नहीं। यह insomnia, sleep apnea, anxiety, depression जैसी मानसिक समस्याओं या दुर्लभ मामलों में न्यूरोलॉजिकल कंडीशन का संकेत भी हो सकता है।
छिपे हुए खतरे भी जानिए
स्लीपवॉकिंग खुद में खतरनाक नहीं, लेकिन इससे जुड़े जोखिम जरूर हैं। जैसे गिरकर चोट लगना, घर से बाहर निकल जाना या किचन और सीढ़ियों के पास हादसा होना। इसलिए ऐसे व्यक्ति के आसपास का माहौल सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है।
कब लेना चाहिए डॉक्टर की सलाह?
अगर ये समस्या हफ्ते में कई बार होने लगे, व्यक्ति खुद को या दूसरों को नुकसान पहुंचाने लगे, नींद में अजीब या हिंसक व्यवहार दिखे या दिनभर थकान महसूस हो—तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
कैसे करें इस पर काबू?
अच्छी और पूरी नींद लें, तनाव कम करें और एक नियमित स्लीप रूटीन अपनाएं। सोने से पहले स्क्रीन टाइम कम करें और रिलैक्सिंग एक्टिविटी करें। घर में सुरक्षा का ध्यान रखें—दरवाजे-खिड़कियां लॉक करें और खतरनाक चीजों को दूर रखें।
क्या करने से बचें?
नींद में चल रहे व्यक्ति को अचानक जगाना, डांटना या डराना गलत है। अगर संभव हो तो उसे धीरे-धीरे वापस बिस्तर तक ले जाएं और स्थिति को गंभीरता से लें।
नींद में चलना एक आम लेकिन अनदेखी समस्या है। सही लाइफस्टाइल, संतुलित नींद और मानसिक शांति से इसे काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है। समय रहते ध्यान देना ही सबसे बेहतर उपाय है।
डिस्क्लेमर: यह लेख सिर्फ सामान्य जानकारी के लिए है। किसी भी तरह से किसी दवा या इलाज का विकल्प नहीं हो सकता। ज्यादा जानकारी के लिए हमेशा अपने डॉक्टर से संपर्क करें।