नाखूनों में ये बदलाव दिखें तो हो जाएं सतर्क! हो सकता है बड़ा खतरा

The body check: नाखून सिर्फ सुंदरता का हिस्सा नहीं, बल्कि शरीर की सेहत का छोटा संकेत भी हो सकते हैं। डॉक्टर इन्हें शरीर का “रिपोर्ट कार्ड” मानते हैं क्योंकि इनके रंग और आकार में बदलाव कई बार अंदरूनी समस्याओं की ओर इशारा करते हैं। पुराने समय से ही डॉक्टर नाखूनों को ध्यान से देखकर स्वास्थ्य का अंदाजा लगाते रहे हैं

अपडेटेड May 31, 2026 पर 4:06 PM
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The body check: नाखून शरीर के पोषण का भी आईना होते हैं।

नाखूनों को आमतौर पर लोग सिर्फ सजावट और साफ-सफाई का हिस्सा मानते हैं, लेकिन मेडिकल दुनिया में इन्हें शरीर की सेहत का एक छोटा सा ‘संकेतक’ माना जाता है। डॉक्टरों का कहना है कि नाखून कई बार अंदरूनी स्वास्थ्य की ऐसी झलक दिखा देते हैं, जिसे सामान्य नजरअंदाज कर देता है। पुराने समय में जब खून की जांच, स्कैन और आधुनिक टेस्ट उपलब्ध नहीं थे, तब चिकित्सक शरीर की स्थिति समझने के लिए आंख, त्वचा, जीभ और नाखूनों का बारीकी से निरीक्षण करते थे।

नाखूनों के रंग, बनावट और आकार में आने वाले छोटे बदलाव कभी-कभी शरीर में चल रही पोषण की कमी, थकान या अन्य अंदरूनी समस्याओं की ओर इशारा कर सकते हैं। यही कारण है कि आज भी डॉक्टर जांच के दौरान हाथों और नाखूनों को ध्यान से देखते हैं, क्योंकि ये शरीर के अंदर चल रही परेशानी का पहला संकेत दे सकते हैं।

रंग बदलना क्या बताता है?


स्वस्थ नाखून हल्के गुलाबी होते हैं। अगर इनमें पीलापन, सफेदी या नीला रंग दिखने लगे तो ये शरीर में चल रही कुछ गड़बड़ियों का संकेत हो सकता है। खून की कमी, पोषण की कमी, लिवर की समस्या या ऑक्सीजन की कमी जैसी स्थितियों में नाखूनों का रंग बदल सकता है। हालांकि कई बार ये बदलाव सामान्य कारणों जैसे उम्र, धूम्रपान या केमिकल के असर से भी हो सकता है।

नाखूनों की शेप भी देती है संकेत

नाखूनों का आकार भी सेहत के बारे में काफी कुछ बता सकता है। अगर नाखून नीचे की ओर मुड़ने लगें या उंगलियों के सिरे चौड़े हो जाएं, तो इसे ‘क्लबिंग’ कहा जाता है, जो दिल, फेफड़ों या पाचन से जुड़ी समस्याओं से जुड़ा हो सकता है। वहीं चम्मच जैसे अंदर धंसे नाखून अक्सर आयरन की कमी की ओर इशारा करते हैं।

अचानक बनने वाली लाइनें और निशान

कई लोगों के नाखूनों पर अचानक उभरी हुई रेखाएं या गहरी लाइने दिखती हैं। ये कई बार तेज बुखार, गंभीर बीमारी या शरीर पर पड़े स्ट्रेस का असर हो सकता है। नाखून धीरे-धीरे बढ़ते हैं, इसलिए इन पर बने निशान पुराने समय की सेहत की कहानी भी बताते हैं।

पोषण की कमी का पहला संकेत

नाखून शरीर के पोषण का भी आईना होते हैं। प्रोटीन, आयरन, विटामिन B12 और बायोटिन की कमी होने पर नाखून कमजोर, टूटने वाले या परतदार हो सकते हैं। हालांकि ये जरूरी नहीं कि हर बदलाव बीमारी ही हो, कई बार साबुन, डिटर्जेंट या ज्यादा पानी में हाथ रखने से भी नाखून खराब हो जाते हैं।

डॉक्टर क्यों देखते हैं नाखून?

डॉक्टर नाखूनों को अकेले देखकर बीमारी का फैसला नहीं करते, बल्कि इसे शरीर के बाकी लक्षणों के साथ जोड़कर देखते हैं। इसलिए नाखून सिर्फ संकेत देते हैं, अंतिम निष्कर्ष नहीं। अगर लगातार बदलाव, दर्द या सूजन दिखे तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी होता है।

सबसे जरूरी बात

नाखून शरीर का छोटी लेकिन अहम हिस्सा है। ये पूरी कहानी नहीं बताते, लेकिन कई बार शुरुआती संकेत जरूर दे देते हैं कि शरीर को ध्यान देने की जरूरत है।

डिस्क्लेमर: इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य स्वास्थ्य सुझावों पर आधारित है। इसे किसी योग्य चिकित्सा राय का विकल्प न मानें। किसी भी नए व्यायाम को शुरू करने से पहले विशेषज्ञ या डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

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