पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस समय भूचाल आया हुआ है। टीएमसी नेता और सांसद अभिषेक बनर्जी पर हमले के बाद एक तरफ जहां उनकी पार्टी ने मोर्चा खोला हुआ है तो वहीं दूसरी ओर टीएमसी के अंदर सबकुछ ठीक-ठाक नजर नहीं आ रहा है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में हार के बाद टीएमसी के अंदर फूट पड़ती दिखाई दे रही है। टीएमसी सांसद काकोली घोष ने हाल ही में पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दिया। वहीं अब खबर है कि, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के महासचिव अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले के एक दिन बाद पार्टी के नए चुने गए विधायकों की बैठक तय समय पर शुरू नहीं हो सकी। बैठक से 60 विधायक नदारद रहे।
मीटिंग में नहीं पहुंचे 60 विधायक
जानकारी के मुताबिक, ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित घर पर 80 विधायकों में से केवल 20 विधायक ही पहुंच पाए। बड़ी संख्या में विधायकों के बैठक में नहीं आने से कई तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। हालांकि, टीएमसी ने इन अटकलों को खारिज कर दिया। पार्टी का कहना है कि कई विधायक कथित राजनीतिक हिंसा के खिलाफ अपने-अपने क्षेत्रों में प्रदर्शन और विरोध कार्यक्रमों में व्यस्त थे। इसी कारण वे बैठक में शामिल नहीं हो सके।
टीएमसी के प्रवक्ता कुणाल घोष ने बताया कि शनिवार को अभिषेक बनर्जी पर हुए हमले और उसके अगले दिन पार्टी सांसद कल्याण बनर्जी पर कथित हमले के बाद कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन किए जा रहे थे। जमीनी स्तर पर चल रही इन गतिविधियों में व्यस्त रहने के कारण कई विधायक बैठक में नहीं पहुंच पाए। पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कालीघाट स्थित घर के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए टीएमसी प्रवक्ता कुणाल घोष ने कहा कि पार्टी ने फिलहाल बैठक की बजाय अगले 48 घंटों में शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार के खिलाफ अपना विरोध प्रदर्शन और तेज करने का फैसला किया है। उन्होंने बताया कि सोमवार को ब्लॉक और वार्ड स्तर पर रैलियां निकाली जाएंगी। इसके बाद मंगलवार को ममता बनर्जी के नेतृत्व में मध्य कोलकाता में एक दिन का धरना प्रदर्शन किया जाएगा।
कुणाल घोष ने कहा कि विधायकों की बैठक पहले से तय थी, लेकिन पार्टी नेताओं पर हुए कथित हमलों के बाद कई विधायकों को अपने-अपने क्षेत्रों में विरोध प्रदर्शन आयोजित करने पड़े। उन्होंने आरोप लगाया कि इसके बाद टीएमसी कार्यकर्ताओं के खिलाफ पुलिस कार्रवाई भी की गई। घोष के मुताबिक, कई विधायक बैठक में इसलिए नहीं पहुंच सके क्योंकि वे स्थानीय स्तर पर हालात संभालने, विरोध कार्यक्रमों का नेतृत्व करने और गिरफ्तार किए गए पार्टी कार्यकर्ताओं की मदद करने में जुटे हुए थे।
कुणाल घोष के मुताबिक, कई विधायकों ने पार्टी के विधायी दल को इन घटनाओं की जानकारी दी और अनुरोध किया कि बैठक को कुछ समय के लिए टाल दिया जाए। उन्होंने कहा कि पार्टी ने इस मांग को उचित मानते हुए स्वीकार कर लिया और फिलहाल बैठक रद्द करने का फैसला किया। हालांकि, दोपहर 3 बजे होने वाली इस बैठक के लिए करीब 20 विधायक पहले ही कार्यक्रम स्थल पर पहुंच चुके थे। घोष ने बताया कि बैठक अब बाद में आयोजित की जाएगी और इसकी नई तारीख व समय की जानकारी सभी विधायकों को दे दी जाएगी। उन्होंने कहा कि पार्टी के सभी विधायकों ने साफ संदेश दिया है कि इस चुनौतीपूर्ण समय में वे संगठन के साथ पूरी मजबूती से खड़े हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, बैठक में कम संख्या में विधायक पहुंचने के बावजूद ममता बनर्जी ने मौजूद विधायकों के साथ अनौपचारिक बातचीत की और मौजूदा हालात पर चर्चा की।