Indore News: देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर से एक ऐसी रिपोर्ट सामने आई है जिसने पूरे प्रशासन को कटघरे में खड़ा कर दिया है। जल शक्ति मंत्रालय की 'स्टेट रिपोर्ट 2024' के अनुसार, इंदौर में पीने के पानी के 67% सैंपल फेल हो गए है। यह रिपोर्ट उस समय आई है जब शहर का भागीरथपुरा इलाका दूषित पानी के कारण मातम मना रहा है। एक और दिलचस्प बात ये है कि करीब एक साल के भीतर मध्य प्रदेश में पीने के पानी की गुणवत्ता को लेकर 98,000 से ज्यादा शिकायतें दर्ज की गई थीं। हालांकि, उस सभी शिकायतों को नजरअंदाज कर दिया गया।
केंद्र की रिपोर्ट के चौंकाने वाले खुलासे
सीएनएन-न्यूज18 द्वारा एक्सेस की गई जल शक्ति मंत्रालय की इस रिपोर्ट ने मध्य प्रदेश और खासकर इंदौर की जल आपूर्ति की पोल खोल दी है। इंदौर में केवल 33% पानी ही पीने योग्य पाया गया। यह राष्ट्रीय स्तर पर 76% शुद्ध जल औसत के आधे से भी कम है। जुलाई से अक्टूबर 2024 के बीच हुए इस सर्वे में पानी के नमूनों में ई-कोलाई, टोटल कोलीफॉर्म और पीएच (pH) लेवल की जांच की गई थी। वहीं अगर बात पूरे मध्य प्रदेश की करें तो राज्य के 37% सैंपल फेल हुए, जो राष्ट्रीय स्तर पर चिंताजनक है।
जांच में सामने आई बड़ी लापरवाही
रिपोर्ट में अधिकारियों की संवेदनहीनता के भी प्रमाण मिले है। इंदौर में फील्ड-टेस्टिंग किट की उपलब्धता मात्र 14.7% है। यानी अधिकारियों के पास पानी की शुद्धता जांचने के साधन ही नहीं थे। सर्वे के दौरान राज्य सरकार ने महत्वपूर्ण सवालों के जवाब नहीं दिए, जैसे- क्या पानी की जांच का कोई नियम (SOP) है? या सैंपलिंग कितनी बार होती है?
भागीरथपुरा में दूषित जल की त्रासदी में हुई 15 की मौत, सैकड़ों बीमार
यह आंकड़े कागजी नहीं हैं, बल्कि इंदौर के लोगों की मौत बनकर मंडरा रहे है। भागीरथपुरा में दूषित पानी के कारण अब तक 15 लोगों की जान जा चुकी है। 2800 से ज्यादा लोग बीमार हुए हैं, जिनमें से 201 मरीज अब भी अस्पतालों में जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे हैं। इस लापरवाही के बाद इंदौर नगर निगम के कमिश्नर, एडिशनल कमिश्नर और जल वितरण के दो वरिष्ठ अधिकारियों को बर्खास्त कर दिया गया है।