70,000 करोड़ रुपये आवंटित...'मेक इन इंडिया' के तहह भारत में बनेंगे जहाज, जंग के बीच PM मोदी का बड़ा ऐलान

राज्यसभा में बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि बदलते वैश्विक हालात में भारत के पास आत्मनिर्भर बनने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध और उससे पैदा हुई स्थिति से सभी लोग वाकिफ हैं और सरकार इस पर अपना पक्ष देश और संसद के सामने रखेगी

अपडेटेड Mar 24, 2026 पर 3:36 PM
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'मेक इन इंडिया' के तहत जहाज बनाने के लिए भारत ने 70 हजार करोड़

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पश्चिम एशिया के हालात पर राज्यसभा में मंगलवार को जानकारी दी। उन्होंने कहा कि अमेरिका-इजराइल की ईरान से जंग जारी रही तो इसके दुष्परिणाम होंगे। आने वाला समय देश की सबसे बड़ी परीक्षा लेने वाला है। उन्होंने आगे कहा कि, सरकार ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के तहत जहाज निर्माण को बढ़ावा देने के लिए 70,000 करोड़ रुपये खर्च कर रही है। उन्होंने बताया कि भारत तेजी से आत्मनिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, भले ही पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष की वजह से दुनिया भर में व्यापार और ऊर्जा सप्लाई पर असर पड़ रहा हो।

भारत को बनना होगा आत्मनिर्भर - पीएम मोदी

राज्यसभा में बोलते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि बदलते वैश्विक हालात में भारत के पास आत्मनिर्भर बनने के अलावा कोई दूसरा रास्ता नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध और उससे पैदा हुई स्थिति से सभी लोग वाकिफ हैं और सरकार इस पर अपना पक्ष देश और संसद के सामने रखेगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस युद्ध की वजह से पूरी दुनिया में गंभीर ऊर्जा संकट पैदा हो गया है, जो भारत के लिए भी चिंता की बात है। इससे देश की जरूरी आपूर्ति प्रभावित हो रही है। उन्होंने बताया कि कई जहाज होर्मुज स्ट्रेट में फंसे हुए हैं, जिनमें भारतीय चालक दल के सदस्य भी मौजूद हैं, जिससे चिंता और बढ़ गई है।


जंग से पड़ रहा सप्लाई चेन पर असर 

पीएम मोदी ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट में हमारे जहाज और भारतीय क्रू फंसा हुआ है। ये चिंताजनक है। हमारे व्यापार के रास्ते प्रभावित हो रहे हैं। गैस-तेल, फर्टिलाइजर्स जैसे जरूरी सामान की सप्लाई पर असर पड़ा है। उन्होंने आगे कहा कि होर्मुज में जहाजों पर हमला बिल्कुल भी स्वीकार्य नहीं है। भारत का प्रयास है कि बातचीत और कूटनीति के जरिए हालात को शांत किया जाए। साथ ही, भारत लगातार सभी पक्षों से अपील कर रहा है कि वे जल्द से जल्द शांतिपूर्ण समाधान निकालें। प्रधानमंत्री ने कहा कि मौजूदा संघर्ष के बावजूद भारत जरूरी सामान ले जाने वाले जहाज़ों की सुरक्षित आवाजाही बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने बताया कि कूटनीति के जरिए भारत युद्ध जैसे हालात में भी अपने जहाजों की सुरक्षा सुनिश्चित करने में जुटा है। इस समस्या के समाधान के लिए भारत ने बातचीत का रास्ता अपनाया है।

पश्चिम एशिया के साथ कूटनीतिक संपर्क

प्रधानमंत्री ने बताया कि युद्ध शुरू होने के बाद से भारत लगातार पश्चिम एशिया के अहम देशों के संपर्क में बना हुआ है। उन्होंने कहा कि उन्होंने इस दौरान कई देशों के नेताओं से दो बार बातचीत की है और भारत ईरान, इजराइल और अमेरिका जैसे देशों के साथ भी लगातार जुड़ा हुआ है। उन्होंने आगे कहा कि इस युद्ध में किसी भी इंसान की जान को खतरा होना मानवता के खिलाफ है। इसलिए भारत लगातार सभी पक्षों से अपील कर रहा है कि वे जल्द से जल्द शांति का रास्ता अपनाएं और समस्या का समाधान निकालें।

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