Pune Cyber Fraud: 46 साल के आईटी प्रोफेशनल से धोखाधड़ी, ठगों ने ऑनलाइन ट्रेडिंग के नाम पर लगाया 4.43 करोड़ का चूना

Pune Cyber Fraud: पुणे से बड़ा साइबर फ्रॉड का मामला सामने आया है। यहां पर एक 46 साल के आईटी प्रोफेशनल से जालसाजों ने फर्जी निवेश के नाम पर 4.43 करोड़ रुपये ठग लिए। फिलहाल, पीड़ित की शिकायत के आधार पर FIR दर्ज कर ली गई है।

अपडेटेड Jun 08, 2026 पर 2:24 PM
पुणे में आईटी प्रोफेशनल से 4.43 करोड़ की ठगी

Pune Cyber Fraud: पुणे से बड़ा साइबर फ्रॉड का मामला सामने आया है। यहां पर एक 46 साल के आईटी प्रोफेशनल से जालसाजों ने फर्जी निवेश के नाम पर 4.43 करोड़ रुपये ठग लिए। बता दें कि ठगों ने उन्हें व्हाट्सएप पर चल रहे एक फर्जी स्टॉक ट्रेडिंग नेटवर्क और एक फर्जी निवेश एप्लिकेशन के जरिए निवेश करने का लालच दिया था। फिलहाल, पीड़ित की शिकायत के आधार पर पिंपरी चिंचवड़ साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज कर ली गई है और मामले की जांच शुरू कर दी गई है।

पुलिस के अनुसार, पीड़ित सोशल मीडिया पोस्ट पर प्रतिक्रिया देने के बाद जालसाजों के संपर्क में आया और बाद में उसे एक व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ दिया गया, जो खुद को शेयर बाजार सलाहकार प्लेटफॉर्म बता रहा था। आरोप है कि ग्रुप ने एक मशहूर अंतरराष्ट्रीय बैंक का नाम इस्तेमाल कर लोगों को भरोसे में लिया और निवेश के लिए प्रेरित किया।

अधिकारियों ने दी जानकारी


जांचकर्ताओं ने बताया कि यह गिरोह रोजाना सुबह 6:30 बजे ऑनलाइन सेशन करता था, जिसमें शेयर बाजार की ट्रेनिंग, निवेश की रणनीतियां और अच्छे मुनाफे वाले स्टॉक्स की जानकारी दी जाती थी। इस ग्रुप की एक एडमिन, जो खुद को "मायरा" बताती थी, निवेश विशेषज्ञ होने का दावा करती थी और लगातार सदस्यों से बातचीत करती रहती थी। लोगों का भरोसा जीतने के लिए ग्रुप में अक्सर ऐसे स्क्रीनशॉट भी शेयर किए जाते थे, जिनमें निवेश से भारी मुनाफा दिखाया जाता था।

शिकायतकर्ता अंततः ग्रुप में शेयर किए गए एक लिंक के माध्यम से एक ट्रेडिंग एप्लिकेशन डाउनलोड करने और एक निवेश खाता खोलने के लिए राजी हो गया। पुलिस के अनुसार, इस ऐप में निवेश पर बहुत अच्छे रिटर्न दिखाए जाते थे और पैसे तेजी से बढ़ते हुए दिखाई देते थे। इसी झांसे में आकर पीड़ित ने करीब दो हफ्तों के दौरान कई बार पैसे ट्रांसफर कर दिए।

पीड़ित ने कुल 4.43 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए

इस धोखाधड़ी के दौरान, पीड़ित ने 34 लेन-देनों के माध्यम से कुल 4.43 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए। जांचकर्ताओं को शक है कि यह पैसा देश के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद कई फर्जी बैंक खातों के जरिए आगे भेजा गया।

हालांकि, ऐप में निवेश पर करीब 26.64 करोड़ रुपये का रिटर्न दिखाया गया था। लेकिन पीड़ित उस पैसे को निकाल नहीं सका। जब उसने अपने कथित मुनाफे को निकालने की कोशिश की, तो ठगों ने अलग-अलग बहाने बनाकर उससे और पैसे जमा करने की मांग शुरू कर दी। इसके बाद जब पीड़ित को शक हुआ कि उसके साथ धोखाधड़ी हुई है, तो उसने पुलिस से शिकायत की।

साइबर फ्रॉड के मामलों में हुई बढ़ोतरी

वरिष्ठ निरीक्षक रविकिरण नाले इस मामले की जांच का नेतृत्व कर रहे हैं। साइबर अपराध अधिकारियों ने बताया कि फर्जी ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म से जुड़े निवेश घोटालों में हाल के वर्षों में काफी बढ़ोतरी हुई है। जालसाज अक्सर व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुप्स, नकली मुनाफे के डैशबोर्ड, जाली समर्थन और जाने-माने वित्तीय संस्थानों के नामों का इस्तेमाल करके संभावित पीड़ितों का विश्वास जीतते हैं।

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