देश में 80 करोड़ से ज्यादा लोगों को मिलने वाले फ्री राशन का चावल बदल गया, इसे लेकर हो गया फाइनल फैसला

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के तहत मुफ्त राशन पाने वाले देश के 80 करोड़ से अधिक लाभार्थियों के लिए केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। इसके तहत राशन में दिए जाने वाले चावल की गुणवत्ता बढ़ाने को मंजूरी दी गई है।

अपडेटेड Jul 02, 2026 पर 7:36 PM
PMGKAY के तहत लोगों को मिलेगा हाई क्वालिटी चावल

प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना (PMGKAY) और अन्य कल्याणकारी योजनाओं के तहत मुफ्त राशन पाने वाले देश के 80 करोड़ से अधिक लाभार्थियों के लिए केंद्र सरकार ने एक ऐतिहासिक फैसला लिया है। आर्थिक मामलों की कैबिनेट कमेटी ने राशन में दिए जाने वाले चावल की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए एक बड़े सुधार को मंजूरी दे दी है। लगभग तीन दशकों में पहली बार सरकार ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली के तहत आपूर्ति किए जाने वाले चावल के क्वालिटी स्पेसिफिकेशन्स में संशोधन किया है। इस फैसले के बाद अब लाभार्थियों को उनके मौजूदा कोटे में बिना किसी कटौती के, बहुत कम टूटे हुए दानों वाला बेहतर और उच्च गुणवत्ता का चावल दिया जाएगा।

चावल के नियमों में क्या हुआ बदलाव?

मंजूर की गई नई नीति के तहत राशन के चावल में टूटे हुए दानों के प्रतिशत को भारी मात्रा में घटा दिया गया है। पीएमजीकेएवाई के तहत मिलने वाले कच्चे चावल में अब टूटे हुए दानों की मात्रा अधिकतम 10% तक ही हो सकेगी। अब तक इसके लिए अधिकतम 25% की सीमा तय थी। उबले हुए चावल में अब टूटे हुए दानों की मात्रा अधिकतम 5% तक ही होगी जबकि पहले इसकी मौजूदा सीमा 16% तक निर्धारित थी।


खरीफ सीजन 2027-28 तक चरणबद्ध तरीके से होगा लागू

बेहतर गुणवत्ता वाले इस चावल की खरीद तुरंत शुरू कर दी जाएगी। सभी धान खरीद वाले राज्यों में इसे खरीफ विपणन सीजन (KMS) 2027-28 तक चरणबद्ध तरीके से पूरी तरह लागू कर दिया जाएगा। इसी तरह लाभार्थियों के बीच इस सुधारे गए चावल का वितरण भी चरणबद्ध तरीके से होगा ताकि सभी राज्यों में यह बदलाव सुचारू रूप से लागू हो सके।

80 करोड़ लाभार्थियों को क्या होगा फायदा?

सरकार का दावा है कि इस फैसले से 80 करोड़ से अधिक लाभार्थियों को मिलने वाले अनाज की गुणवत्ता में बड़ा सुधार होगा। लाभार्थियों को ऐसा चावल मिलेगा जिसके दाने साबुत और बेहतर होंगे, दिखने में अच्छे होंगे और जिन्हें उपभोक्ता आसानी से पसंद कर सकेंगे। मिलिंग के दौरान निकलने वाले टूटे हुए चावल को अलग कर दिया जाएगा और उसका इस्तेमाल दूसरे उत्पादक और औद्योगिक काम में किया जाएगा। इससे यह सुनिश्चित होगा कि सिर्फ बेस्ट कैटिगरी का खाने योग्य चावल ही गरीबों तक पहुंचे।

सरकार को सालाना 2161 करोड़ की होगी बचत

सरकार के दावे के मुताबिक इस नीतिगत सुधार से राशन प्रबंधन की परिचालन दक्षता बढ़ेगी और सरकार को भारी वित्तीय बचत होगी। टूटे हुए चावल की नीलामी सीधे मिलर्स के परिसरों से की जाएगी। इससे परिवहन, भंडारण, और हैंडलिंग की लागत कम होगी। टूटे चावल को एचडीपीई बैगों में स्टोर किया जाएगा, जिससे जूट के बोरों की आवश्यकता कम होगी। इन सब बदलावों से लॉजिस्टिक्स, स्टोरेज और पैकेजिंग की लागत घटने से सरकार को सालाना लगभग 2161 करोड़ रुपये की बचत होगी। इसके साथ ही टूटे चावल की बिक्री से अतिरिक्त राजस्व भी जेनरेट होगा। इससे खाद्य सब्सिडी का बोझ कम करने में मदद मिलेगी।

कई राज्यों में पायलट प्रोजेक्ट रहा सफल

कैबिनेट से मंजूरी मिलने से पहले इस योजना को देश के कई राज्यों में पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर परख लिया गया है। हरियाणा, आंध्र प्रदेश, पंजाब, ओडिशा, तेलंगाना और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में इसका सफल क्रियान्वयन किया गया। इससे साबित हुआ कि बड़े पैमाने पर इस बेहतर क्वालिटी के चावल का उत्पादन व्यावहारिक रूप से संभव है। पायलट प्रोजेक्ट के तहत तैयार किए गए इस बेहतर चावल की आपूर्ति भी अब लाभार्थियों को की जाएगी।

राशन प्रणाली में पारदर्शिता बढ़ाएगा QR-Code

राशन वितरण प्रणाली में किसी भी तरह की गड़बड़ी या लीकेज को रोकने के लिए तकनीक का सहारा लिया जाएगा। चावल के बोरों पर क्यूआर-कोड टैगिंग की जाएगी। इस क्यूआर-कोड की मदद से पूरी सप्लाई चेन में चावल के मूवमेंट को शुरू से अंत तक ट्रैक किया जा सकेगा। इससे सार्वजनिक वितरण प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और इन्वेंट्री मैनेजमेंट को मजबूती मिलेगी। सरकार का कहना है कि उसने हर पात्र परिवार के लिए खाद्य सुरक्षा निश्चित करने के बाद अब गुणवत्ता के साथ खाद्य सुरक्षा हासिल करने की दिशा में कदम बढ़ाया है। दावा किया जा रहा है कि इस ऐतिहासिक फैसले से गरीब परिवारों को सम्मान के साथ बेहतर गुणवत्ता का अनाज मिल सकेगा।

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