Dharavi Residents: झुग्गियों से आधुनिक घरों तक का सफर! धारावी के लोगों को मिलेंगे 10,432 नए फ्लैट, मुंबई के माटुंगा में अदाणी ग्रुप ने शुरू किया निर्माण

Dharavi residents in Mumbai: देश की सबसे बड़ी झुग्गी बस्तियों में शामिल मुंबई स्थित धारावी के पुनर्विकास की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है। अदाणी ग्रुप ने मुंबई के माटुंगा इलाके में धारावी के पात्र निवासियों के पुनर्वास के लिए 10,432 घरों के निर्माण का काम शुरू कर दिया है। बता दें कि धारावी में 10 लाख से अधिक लोग रहते हैं

अपडेटेड Oct 13, 2026 पर 8:37 AM
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Dharavi residents in Mumbai: धारावी के पात्र निवासियों के लिए 10,432 मकानों का निर्माण कार्य शुरू हो गया है

Dharavi residents in Mumbai: अदाणी एंटरप्राइजेज के डायरेक्टर प्रणव अदाणी ने सोमवार (12 अक्टूबर) को माटुंगा में 22 एकड़ की पुनर्वास आवासीय परियोजना का भूमि पूजन किया। इसके साथ ही एशिया की सबसे बड़ी झुग्गी बस्तियों में से एक धारावी के पात्र निवासियों के लिए 10,432 मकानों का निर्माण कार्य शुरू हो गया है। कंपनी ने एक बयान में कहा कि धारावी पुनर्विकास परियोजना के लिए गठित स्पेशल पर्पस व्हीकल (SPV) अदाणी नवभारत डेवलपर्स प्राइवेट लिमिटेड (ANDPL) द्वारा विकसित की जा रही इस परियोजना में 10 टावर शामिल होंगे। इनमें 10,432 पुनर्वास फ्लैट और 1,379 कमर्शियल और इंडस्ट्रियल यूनिट्स होंगी।

प्रणव अदाणी ने कहा, "प्रत्येक परिवार एक ऐसे घर का हकदार है जहां वह सुरक्षित महसूस करे और भविष्य की योजना बना सके। हम जानते हैं कि धारावी के परिवारों के लिए इसका क्या महत्व है। माटुंगा में हम 10 टावर का निर्माण कर रहे हैं जिनमें 10,432 घर और 1,379 कमर्शियल और इंडस्ट्रियल यूनिट्स होंगी, जिससे ऐसे परिवेश का निर्माण होगा जहां परिवार बेहतर जीवन जी सकें और अपने बच्चों के लिए उज्ज्वल भविष्य बना सकें।"

पात्र परिवारों को मिलेंगे 350 वर्गफुट के घर


इस योजना के तहत पात्र निवासियों को 350 वर्ग फुट क्षेत्रफल वाले मकान मिलेंगे। सेक्टर-6 और सेक्टर-1 के निवासी माटुंगा में मकान पाने वाले शुरुआती लोगों में शामिल होंगे, जिसके बाद धारावी के अन्य पात्र निवासियों को प्राथमिकता के आधार पर लगभग 4,500 फ्लैट उपलब्ध कराए जाएंगे। महाराष्ट्र सरकार के नगर विकास विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव असीम कुमार गुप्ता इस समारोह में चीफ गेस्ट के रूप में शामिल हुए। DRP/SRA के मुख्य कार्यकारी अधिकारी महेंद्र कल्याणकर भी इस मौके पर मौजूद थे।

कल्याणकर ने कहा, "यह धारावी के परिवारों के लिए एक अहम कदम है। हमारा ध्यान सुरक्षित, आधुनिक घर और बेहतर जीवन के लिए जरूरी बुनियादी सुविधाएं और इंफ्रास्ट्रक्चर देने पर है।" इस परियोजना को धारावी के उन परिवारों के लिए अहम माना जा रहा है, जो लंबे समय से बेहतर आवास, बुनियादी सुविधाओं और व्यवस्थित शहरी ढांचे की जरूरत महसूस कर रहे हैं। हालांकि, घर पाने की पात्रता और आवंटन संबंधित पुनर्वास योजना के नियमों के अनुसार होगा।

तीन चरणों में सरकार को सौंपी जाएंगी 10 इमारतें

परियोजना की 10 टावर वाली इमारतों को महाराष्ट्र सरकार की धारावी पुनर्विकास परियोजना/झुग्गी पुनर्वास प्राधिकरण (DRP/SRA) को तीन चरणों में सौंपने का कार्यक्रम तय किया गया है। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार:-

पहला चरण: शुरुआती पांच टावर मार्च 2029 तक सौंपे जाने का लक्ष्य है।

दूसरा चरण: अगले दो टावर अगस्त 2029 तक सौंपे जाने की योजना है।

तीसरा चरण: शेष तीन टावर अगस्त 2030 तक सौंपे जाने का लक्ष्य रखा गया है।

37 से 39 मंजिला होंगी इमारतें, आग से सुरक्षा के लिए अलग लिफ्ट

माटुंगा में बनने वाली इमारतें ऊंची आवासीय टावर होंगी। प्रत्येक टावर में 37 से 39 मंजिलें होंगी। निवासियों की आवाजाही को सुविधाजनक बनाने के लिए हर इमारत में 10 से 12 यात्री लिफ्ट लगाने की योजना है। इसके अलावा आग लगने जैसी आपात स्थितियों के लिए दो अलग फायर लिफ्ट भी होंगी।

कमर्शियल और इंडस्ट्रियल यूनिट्स के इस्तेमाल के लिए दो अतिरिक्त लिफ्ट की व्यवस्था की जाएगी। इस तरह आवासीय और कारोबारी गतिविधियों की जरूरतों को ध्यान में रखकर इमारतों का ढांचा तैयार किया जाएगा। परियोजना में केवल आवासीय सुविधाओं पर ही ध्यान नहीं दिया गया है, बल्कि सामुदायिक जरूरतों को भी शामिल किया गया है।

प्रस्तावित सुविधाओं में किंडरगार्टन, सामुदायिक हॉल, पोडियम गार्डन, बैठने के लिए स्थान, सोसायटी कार्यालय और पूजा स्थल शामिल हैं। इन सुविधाओं का उद्देश्य निवासियों को एक व्यवस्थित आवासीय वातावरण उपलब्ध कराना है, जहां परिवारों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए बेहतर सुविधाएं मिल सकें। इस तरह पूरी परियोजना का निर्माण और हस्तांतरण चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। यह प्रोजेक्ट अगस्त 2030 तक प्रस्तावित है।

देश-विदेश के विशेषज्ञ तैयार कर रहे हैं परियोजना का खाका

इस पुनर्विकास परियोजना में वास्तुकला, इंजीनियरिंग और शहरी नियोजन के क्षेत्र में काम करने वाली कई संस्थाओं की विशेषज्ञता ली जा रही है। इनमें अमेरिका की सासाकी (Sasaki), ब्रिटेन की ब्यूरो हैपोल्ड (Buro Happold), मुंबई की स्टूडियोपीओडी (StudioPOD), वास्तुकार हफीज कॉन्ट्रैक्टर, पी एंड टी (P&T) और एआरसी स्टूडियो (ARC Studio) शामिल हैं। इसके अलावा सिंगापुर के शहरी नियोजन विशेषज्ञ भी परियोजना से जुड़े हैं। अंतरराष्ट्रीय और भारतीय विशेषज्ञों की भागीदारी के जरिए आवासीय डिजाइन, इंजीनियरिंग, सार्वजनिक स्थानों और शहरी सुविधाओं को बेहतर ढंग से विकसित करने की योजना है।

धारावी एक्सपीरियंस सेंटर में दिखाई गई थी पुनर्विकास की झलक

निर्माण शुरू होने से पहले महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने गांधी जयंती के अवसर पर धारावी एक्सपीरियंस सेंटर का उद्घाटन किया था। करीब 22,500 वर्गफुट में फैले इस केंद्र को स्थानीय निवासियों को प्रस्तावित पुनर्विकास योजना की जानकारी देने के उद्देश्य से तैयार किया गया है। इस केंद्र में वास्तविक आकार के नमूना घर, 3D वॉकथ्रू और इंटरैक्टिव डिस्प्ले के जरिए लोगों को यह समझने का अवसर मिलता है कि पुनर्विकास के बाद आवास, कार्यस्थल, परिवहन, खुली जगहों और सामुदायिक सुविधाओं का स्वरूप कैसा हो सकता है।

धारावी में आवास के साथ कारोबार और आजीविका पर भी जोर

धारावी केवल एक घनी आबादी वाला आवासीय क्षेत्र नहीं है, बल्कि यहां बड़ी संख्या में छोटे विनिर्माण कारोबार, वर्कशॉप और व्यावसायिक प्रतिष्ठान भी संचालित होते हैं। यहां की अनौपचारिक अर्थव्यवस्था लाखों लोगों की आजीविका से जुड़ी है। व्यापक पुनर्विकास योजना में मिश्रित उपयोग वाली टाउनशिप विकसित करने की परिकल्पना है। इसमें दुकानें, स्कूल, स्वास्थ्य सुविधाएं, पार्क, पूजा स्थल, सार्वजनिक परिवहन और अन्य सामाजिक बुनियादी ढांचे को शामिल किया जाएगा।

योजना के अनुसार, रोजमर्रा की जरूरी सेवाओं को इस तरह उपलब्ध कराने पर जोर है कि लोग लगभग 15 मिनट की पैदल दूरी में उन तक पहुंच सकें। इसका उद्देश्य आवासीय सुविधाओं को कारोबार, शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवहन जैसी जरूरतों के साथ जोड़ना है, ताकि पुनर्विकास केवल नई इमारतें बनाने तक सीमित न रहे।

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आपको बता दें कि धारावी में 10 लाख से अधिक लोग रहते हैं। यहां की आबादी और छोटे कारोबारों का व्यापक नेटवर्क इसे मुंबई के सामाजिक और आर्थिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाता है। ऐसे में पुनर्विकास परियोजना का असर केवल आवास पर नहीं, बल्कि स्थानीय कारोबार, रोजगार और सामुदायिक जीवन पर भी पड़ सकता है।

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