Anjel Chakma: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में बीते दिनों इंसानियत को शर्मसार करने वाली एक घटना हुई। कुछ स्थानीय युवकों ने त्रिपुरा के रहने वाले दो भाइयों, एंजेल और माइकल चकमा पर बेरहमी से हमला कर दिया था। सबसे हैरान करने वाली बात ये रही कि हमला करने के बाद आरोपी फरार होने के बजाय शराब की दुकान पर गए और जश्न मनाया था। गंभीर रूप से घायल एंजेल चकमा की 26 दिसंबर को इलाज के दौरान मौत हो गई, जिसके बाद इस मामले को लेकर खूब विरोध प्रदर्शन हो रहे है।
झगड़े के बाद किया हमला और फिर मनाया जश्न
पुलिस जांच में जो बातें सामने आई हैं, वे हैरान करने वाली हैं। आरोपी सूरज खवास ने अपने बेटे के पहले जन्मदिन पर दोस्तों को पार्टी के लिए बुलाया था। इस ग्रुप में सूरज के साथ अविनाश नेगी, यज्ञ राज अवस्थी, सुमित और दो नाबालिग शामिल थे। सेलाकुई बाजार में शराब की दुकान के पास इन आरोपियों का चकमा भाइयों से सामना हुआ। पुलिस के अनुसार, आरोपी आपस में हंस रहे थे, जिस पर चकमा भाइयों ने पूछा कि वे क्यों हंस रहे हैं। यह मामूली बहस देखते ही देखते खूनी संघर्ष में बदल गई।
बहस के दौरान एक नाबालिग ने माइकल को 'कड़े' से मारा, जबकि मुख्य आरोपी यज्ञ राज अवस्थी ने पास के फल के ठेले से चाकू उठाकर अंजलि चकमा पर वार कर दिया। जब माइकल अपने तड़पते भाई को अस्पताल ले जाने की कोशिश कर रहा था, तब आरोपी चाय की दुकान पर गए और वहां जन्मदिन का जश्न मनाया।
नस्लीय हिंसा के नहीं मिले सबूत: एसएसपी
इस मामले ने पूर्वोत्तर राज्यों में भारी आक्रोश पैदा कर दिया है। घायल माइकल चकमा का आरोप है कि हमलावरों ने उन पर नस्लीय टिप्पणी की, उन्हें 'चीनी' और 'मोमो' जैसे अपमानजनक शब्दों से संबोधित किया। इस पर देहरादून के एसएसपी अजय सिंह ने सोमवार को कहा कि शुरुआती जांच में नस्लीय हिंसा के कोई ठोस सबूत नहीं मिले हैं। उनके अनुसार, यह आपसी बहस के बाद उपजा हिंसक झगड़ा था।
आरोपियों की हुई गिरफ्तारी
पुलिस को शक है कि चाकू मारने वाला यज्ञ राज अवस्थी नेपाल भाग गया है। उसके पिता हरिद्वार के एक मंदिर में पुजारी हैं। तीन आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेजा गया है और दो नाबालिगों को बाल सुधार गृह भेजा गया है। पुलिस ने इस मामले में हत्या (धारा 302) और SC/ST एक्ट के तहत केस दर्ज किया है। हालांकि, तीन आरोपी खुद SC/ST समुदाय से हैं, इसलिए उन पर यह एक्ट लागू नहीं होगा।