अग्निपथ योजना वापस नहीं हुई, खुला अग्निवीरों की स्थायी भर्ती का रास्ता! जानिए 4+2 साल का नया फॉर्मूला और शर्तें

अग्निपथ योजना वापस नहीं हुई है। सरकार ने अग्निवीरों के लिए 4+2 साल का नया फॉर्मूला लागू किया है। जानिए छह साल बाद नियमित सैनिक बनने की शर्तें, 25% और 75% का नया नियम और वरिष्ठता से जुड़ी पूरी जानकारी।

अपडेटेड Nov 05, 2026 पर 7:25 PM
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Agnipath Scheme

अग्निपथ योजना के तहत सेना में भर्ती होने वाले अग्निवीरों के लिए नियमित सैनिक बनने का रास्ता खुल गया है। केंद्र सरकार ने चार साल की शुरुआती सेवा के बाद अग्निवीरों को दो साल का अतिरिक्त सेवा विस्तार देने और इसके बाद उन्हें नियमित कैडर में शामिल करने का फैसला किया है। रक्षा अधिकारियों के मुताबिक अब सभी अग्निवीरों को नियमित सैनिक बनने का अवसर मिलेगा। हालांकि इसके लिए कुछ शर्तें पूरी करनी होंगी। अग्निवीर की नियमित सेवा में शामिल होने की इच्छा होनी चाहिए, वह शारीरिक रूप से फिट होना चाहिए और उसका अनुशासन भी संतोषजनक होना जरूरी है।

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक रक्षा अधिकारियों ने गुरुवार को स्पष्ट किया कि सरकार ने अग्निपथ योजना को वापस नहीं लिया है। योजना में सिर्फ दो साल का एक अतिरिक्त सेवा-काल जोड़ा गया है। इसके तहत पहले चार साल की सेवा पूरी करने वाले अग्निवीरों में से 25 फीसदी को पहले की तरह नियमित कैडर में शामिल किया जाएगा जबकि बाकी 75 फीसदी अग्निवीरों को अगले दो साल की सेवा के बाद नियमित सैनिक बनने का अवसर मिलेगा। अधिकारियों के मुताबिक दूसरे सेवा-काल के बाद बाकी अग्निवीरों को शामिल करने के लिए कोई तय संख्या सीमा नहीं होगी।

क्या है अग्निवीरों के लिए 4+2 साल का नया फॉर्मूला?


अग्निपथ योजना के तहत अब तक युवाओं को चार साल के लिए सेना में भर्ती किया जाता था। चार साल की सेवा पूरी होने के बाद कुल अग्निवीरों में से सिर्फ 25 फीसदी को ही नियमित सेवा में बनाए रखने का प्रावधान था। बाकी 75 फीसदी अग्निवीरों को चार साल बाद सेना से बाहर होना पड़ता था। अब सरकार ने इस व्यवस्था में बदलाव करते हुए दो साल का अतिरिक्त सेवा-काल जोड़ दिया है। इसका मतलब है कि अग्निवीरों को पहले चार साल की सेवा के बाद अगले दो साल तक सेना में सेवा जारी रखने का अवसर मिलेगा। इस तरह सेवा की अवधि का नया फॉर्मूला 4+2 साल का हो गया है।

रक्षा अधिकारियों के मुताबिक, पहले चार साल पूरे होने पर 25 फीसदी अग्निवीर नियमित कैडर में शामिल होंगे। इसके बाद बाकी 75 फीसदी अग्निवीर दो साल का अतिरिक्त सेवा-काल पूरा करेंगे। दूसरे सेवा-काल के बाद उन्हें भी नियमित सैनिक के रूप में शामिल किया जाएगा। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि इस दूसरे चरण में नियमित कैडर में शामिल किए जाने वाले अग्निवीरों की संख्या पर कोई सीमा नहीं होगी।

किन शर्तों पर मिलेगी अग्निवीरों को स्थायी भर्ती?

रक्षा अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि छह साल की सेवा पूरी करने के बाद नियमित सैनिक बनने का अवसर सभी अग्निवीरों के लिए होगा लेकिन इसके लिए कुछ जरूरी शर्तें रखी गई हैं। पहली शर्त यह है कि अग्निवीर नियमित सेवा में बने रहने के इच्छुक हों। दूसरी शर्त के मुताबिक उन्हें शारीरिक रूप से फिट होना होगा। इसके अलावा उनका अनुशासित होना भी जरूरी होगा। यानी सिर्फ छह साल की सेवा पूरी कर लेना ही नियमित कैडर में शामिल होने के लिए पर्याप्त नहीं होगा। अधिकारियों के मुताबिक, इच्छा, शारीरिक फिटनेस और अनुशासन इसके प्रमुख आधार होंगे।

अग्निवीरों की वरिष्ठता पर क्या होगा असर?

सरकार के इस फैसले में अग्निवीरों की वरिष्ठता को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की गई है। रक्षा अधिकारियों ने कहा है कि नियमित सैनिक बनने पर अग्निवीरों की वरिष्ठता सुरक्षित रखी जाएगी। एक वरिष्ठ रक्षा अधिकारी के मुताबिक जो अग्निवीर दूसरे सेवा-काल के बाद नियमित सैनिक बनेंगे, उन्हें अपने ही बैच के उन साथियों के तुरंत बाद रखा जाएगा जो चार साल की शुरुआती सेवा के बाद नियमित कैडर में शामिल हो गए थे। इसका मतलब है कि दूसरे सेवा-काल के बाद नियमित सैनिक बनने वाले अग्निवीरों को बाद में भर्ती हुए किसी बैच के सैनिकों से कनिष्ठ नहीं माना जाएगा। अधिकारियों ने कहा कि इस व्यवस्था के जरिए उनकी वरिष्ठता का संरक्षण किया जाएगा।

18300 अग्निवीरों के सेना से बाहर होने से पहले हुआ फैसला

सरकार ने अग्निपथ योजना में बदलाव का ऐलान ऐसे समय किया है जब करीब 18300 अग्निवीरों का चार साल का सेवा-काल पूरा होने वाला था। ये अग्निवीर तीनों सेनाओं से अपना शुरुआती चार साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद बाहर होने वाले थे। चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने बुधवार को योजना में किए गए बदलावों की घोषणा की थी। यह घोषणा उन अग्निवीरों के सेवा-काल की समाप्ति से तीन सप्ताह से कुछ अधिक समय पहले हुई, जो अब तक की व्यवस्था के तहत चार साल पूरे करने के बाद सेना से बाहर होने वाले थे। इस बदलाव का फैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई केंद्रीय कैबिनेट की बैठक में लिया गया।

CDS ने बताया अग्निवीरों के लिए नया रास्ता

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल एनएस राजा सुब्रमणि ने बुधवार को सरकार के फैसले को सभी अग्निवीरों के लिए एक रास्ता खोलने वाला कदम बताया था। उन्होंने कहा था कि इससे लगभग सभी अग्निवीरों के रक्षा बलों में शामिल होने का रास्ता सुनिश्चित होगा। उन्होंने इसे भारतीय रक्षा बलों और अग्निवीरों के लिए महत्वपूर्ण दिन बताया था। रक्षा अधिकारियों ने भी गुरुवार को स्पष्ट किया कि योजना में बदलाव का उद्देश्य अग्निवीरों को शुरुआती चार साल के बाद दो साल का अतिरिक्त सेवा अवसर देना है जिसके बाद नियमित कैडर में शामिल होने का रास्ता उपलब्ध होगा।

जून 2022 में शुरू हुई थी अग्निपथ योजना

केंद्र सरकार ने जून 2022 में अग्निपथ भर्ती योजना की शुरुआत की थी। इसका उद्देश्य तीनों सेनाओं की औसत आयु प्रोफाइल को कम करना था। इस योजना के तहत साढ़े 17 साल से 21 साल की उम्र के युवाओं को चार साल के लिए सेना में भर्ती करने का प्रावधान किया गया था। शुरुआती व्यवस्था के मुताबिक चार साल की सेवा पूरी होने के बाद कुल अग्निवीरों में से अधिकतम 25 फीसदी को नियमित सेवा में बनाए रखने का प्रावधान था। इन चयनित अग्निवीरों को 15 साल तक नियमित सेवा में रहने का अवसर मिलना था जबकि बाकी 75 फीसदी अग्निवीरों को चार साल बाद सेवा से बाहर होना था। इसी प्रावधान को लेकर विपक्षी दलों ने सरकार पर सवाल उठाए थे। कांग्रेस समेत कई विपक्षी पार्टियों ने पूछा था कि चार साल की सेवा पूरी होने के बाद उन 75 फीसदी अग्निवीरों का क्या होगा जिन्हें नियमित सेना में जगह नहीं मिलेगी।

युवाओं के विरोध और चुनावों के बीच बदला गया नियम

अग्निपथ योजना में बदलाव का ऐलान ऐसे समय हुआ है जब इस योजना को लेकर युवाओं के विरोध और बेरोजगारी के मुद्दे पर विपक्ष की ओर से सरकार पर हमले होते रहे हैं। इसके साथ ही पंजाब और उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव भी होने हैं। फिलहाल अग्निपथ योजना के तहत भर्ती किए गए तीन लाख से अधिक सैनिक सेना में सेवा दे रहे हैं। नए बदलाव के बाद इन अग्निवीरों के लिए भी नियमित सैनिक बनने का अवसर उपलब्ध होगा, बशर्ते वे निर्धारित शर्तों को पूरा करें।

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