First CEO of Ram Mandir Trust: अयोध्या स्थित राम मंदिर ट्रस्ट ने अपने पहले CEO के नाम का ऐलान कर दिया है। वायुसेना के पश्चिमी कमान के चीफ रह चुके एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा को ट्रस्ट का पहला CEO बनाया गया है। उनकी नियुक्ति के साथ अब मंदिर से जुड़े प्रशासनिक और प्रबंधन के कामकाज को संभालने की जिम्मेदारी उनके कंधों पर होगी।
यह फैसला अयोध्या में मणिराम दास छावनी में महंत नृत्य गोपाल दास की अध्यक्षता में हुई ट्रस्ट की बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया। बता दें कि बैठक में ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी और आमंत्रित सदस्य शामिल हुए।
इसके अलावा, ट्रस्ट ने तीन नए सदस्यों की नियुक्ति की भी घोषणा की। ये सदस्य हैं - अयोध्या के वरिष्ठ वकील मदन मोहन पांडे, दिल्ली के महेश भागचंदका और अयोध्या की निर्मला यादव।
कौन हैं पूर्व एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा?
एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा भारतीय वायुसेना के अनुभवी और सम्मानित अधिकारियों में शामिल रहे हैं। उन्होंने 6 दिसंबर 1986 को वायुसेना की फ्लाइंग (फाइटर) शाखा से अपने करियर की शुरुआत की थी। करीब चार दशक तक देश की सेवा करने के बाद वह 30 अप्रैल 2026 को एयर मार्शल और कमांडर-इन-चीफ के पद से रिटायर हुए।
करीब चार दशक के अपने करियर में एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा ने वायुसेना में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं। वह मिग-21 स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर से लेकर HAL के चीफ टेस्ट पायलट और Su-30 MKI एयरबेस के चीफ ऑपरेशंस ऑफिसर जैसे अहम पदों पर रहे। HAL में रहते हुए उन्होंने Su-30 MKI फाइटर जेट में ब्रह्मोस मिसाइल को शामिल करने जैसे चुनौतीपूर्ण प्रोजेक्ट को तय समय में पूरा कराने में अहम भूमिका निभाई। उनकी नेतृत्व क्षमता की एक और मिसाल जून 2010 में देखने को मिली, जब उन्होंने फ्रांस में हुए बहुराष्ट्रीय वायुसेना अभ्यास ‘गरुड़ IV’ में भारतीय दल का सफल नेतृत्व किया।
एयर मार्शल जितेंद्र मिश्रा के लंबे सैन्य करियर में उनकी काबिलियत और नेतृत्व क्षमता को कई बार सम्मान मिला। देश के प्रति उनकी समर्पित सेवाओं और बेहतरीन कार्यशैली के लिए उन्हें राष्ट्रपति की ओर से विशिष्ट सेवा पदक (VSM) से सम्मानित किया गया। वायुसेना मुख्यालय में परिचालन योजना एवं मूल्यांकन समूह के निदेशक रहते हुए उन्होंने देश की कई अहम सैन्य रणनीतियों और योजनाओं को तैयार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
वायुसेना में उनका सफर 1986 में फ्लाइट लेफ्टिनेंट के तौर पर शुरू हुआ था। इसके बाद वह लगातार आगे बढ़ते हुए विंग कमांडर, ग्रुप कैप्टन, एयर कमोडोर और एयर वाइस मार्शल जैसे महत्वपूर्ण पदों पर पहुंचे और आखिरकार एयर मार्शल के पद तक पहुंचे। करीब चार दशक का यह सफर उनके अनुभव, नेतृत्व और देश के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है।