Al-Falah University: चैरिटी या 'कैश मशीन'? ED ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी में 415 करोड़ के फर्जीवाड़े का किया खुलासा

ED Probe Al-Falah University: अल-फलाह यूनिवर्सिटी को लेकर मामले ने तब तूल पकड़ा जब 10 नवंबर को दिल्ली के लाल किले के पास हुए कार धमाके की जांच यूनिवर्सिटी तक पहुंची। आरोप है कि धमाके में शामिल संदिग्धों ने फरीदाबाद स्थित अल-फलाह मेडिकल कॉलेज परिसर का इस्तेमाल किया था

अपडेटेड Dec 24, 2025 पर 8:54 PM
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ED की जांच के अनुसार, यूनिवर्सिटी ने हजारों छात्रों और अभिभावकों को गुमराह कर मोटी फीस वसूली

Al-Falah University: दिल्ली के लाल किला ब्लास्ट की जांच जब शुरू हुई, तो किसी ने नहीं सोचा था कि इसके तार एक बड़े शिक्षा घोटाले से जुड़ेंगे। ED ने अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट और उससे जुड़े संस्थानों में चल रहे एक बड़े वित्तीय साम्राज्य का भंडाफोड़ किया है। जांच में सामने आया है कि शिक्षा के नाम पर कम से कम 415 करोड़ रुपये की अवैध कमाई की गई। इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड अल-फलाह यूनिवर्सिटी का चांसलर जवाद अहमद सिद्दीकी है, जिसे ED ने गिरफ्तार कर लिया है।

लाल किला ब्लास्ट के बाद आतंकी कनेक्शन की जांच में हुआ बड़ा खुलासा

इस मामले ने तब तूल पकड़ा जब 10 नवंबर को दिल्ली के लाल किले के पास हुए कार धमाके की जांच अल-फलाह यूनिवर्सिटी तक पहुंची। आरोप है कि धमाके में शामिल संदिग्धों ने फरीदाबाद स्थित अल-फलाह मेडिकल कॉलेज परिसर का इस्तेमाल किया था। इसी इनपुट के बाद ED ने NCR में 20 ठिकानों पर छापेमारी की, जिससे करोड़ों के घोटाले की परतें उखड़ने लगीं।


फर्जी मान्यता पर चल रही थी यूनिवर्सिटी!

ED की जांच के अनुसार, यूनिवर्सिटी ने हजारों छात्रों और अभिभावकों को गुमराह कर मोटी फीस वसूली। यूनिवर्सिटी की 'Grade A' मान्यता खत्म हो चुकी थी, लेकिन वेबसाइट पर इसे जानबूझकर दिखाया जाता रहा ताकि नए एडमिशन मिल सकें। संस्थान ने दावा किया कि उसके पास UGC 12(B) का दर्जा है जो केंद्रीय अनुदान के लिए जरूरी है, जबकि हकीकत में उसके पास ऐसी कोई मान्यता कभी थी ही नहीं।

कागजी डॉक्टर और नकली मरीज

फरीदाबाद स्थित धौज मेडिकल कॉलेज में नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के निरीक्षण के दौरान जो हुआ, वह चौंकाने वाला है। अस्पताल की सुविधाओं को मानकों के अनुरूप दिखाने के लिए 'कागजी डॉक्टरों' और 'नकली मरीजों' का सहारा लिया गया। यूनिवर्सिटी का पैसा चैरिटी में लगने के बजाय सिद्दीकी के परिवार की जेब में गया। अस्पताल निर्माण का ठेका बेटे-बेटी की कंपनी को दिया गया, तो हॉस्टल में खाने का ठेका पत्नी की फर्म को सौंप दिया गया।

मुर्दों के नाम पर जमीन की हेराफेरी, मिला विदेशी कनेक्शन

जांच में 'तरबिया एजुकेशन फाउंडेशन' के जरिए एक बड़े भूमि घोटाले का भी पता चला है। आरोप है कि मदनपुर खादर में एक जमीन हथियाने के लिए मृत भू-स्वामियों के नाम पर फर्जी 'पावर ऑफ अटॉर्नी' (GPA) तैयार की गई। इस जमीन को खरीदने के लिए पैसा सीधे यूनिवर्सिटी के फंड से निकाला गया था।

इसके साथ ही ED अब इस घोटाले के अंतरराष्ट्रीय कड़ियों को जोड़ रही है। सिद्दीकी के बच्चों ने ब्रिटेन में 'एनोबल एजुकेशन' नाम की कंपनी बनाई, जहां उन्होंने खुद को ब्रिटिश नागरिक बताया, जबकि उनके पास भारतीय पासपोर्ट हैं। जांच में दुबई में एक ज्वेलरी बिजनेस और विदेशों में भारी निवेश के डिजिटल सबूत मिले हैं।

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