प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अल-फलाह यूनिवर्सिटी और उसके चेयरमैन जावेद अहमद सिद्दीकी के खिलाफ कई बड़े आरोप लगाए हैं। यह संस्थागत धोखाधड़ी का पूरा मामला है। ईडी की 260 पेज की चार्जशीट में अहम बात यह है कि यूनिवर्सिटी ने मेडिकल कॉलेज के अस्पताल में नकली मरीजों को "भर्ती" किया। यह नाटक मेडिकल इंस्पेक्टर को बेवकूफ बनाने के लिए था। ताकि उन्हें लगे कि अस्पताल में काफी मरीज और जरूरी सुविधाएं हैं। इससे मेडिकल डिग्री की मान्यता बनी रहे।
ED ने 493 करोड़ रुपए के बड़े वित्तीय घोटाले का भी पर्दाफाश किया। सिद्दीकी और अल-फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट ने हजारों छात्रों व उनके माता-पिता को झूठे वादों से फीस वसूली। NAAC मान्यता और UGC की सेक्शन 12(B) का झूठा दावा किया। बाद में उन्होंने कहा कि यह वेबसाइट की गलती थी, लेकिन सबूत मिले कि इस झूठ को सिर्फ मार्केटिंग के लिए इस्तेमाल किया।
फरीदाबाद कैंपस में "व्हाइट-कॉलर" आतंकी सेल चल रहा था। NIA ने पाया कि 10 नवंबर 2025 के लाल किला धमाके का सुसाइड बॉम्बर डॉ. उमर उन नबी इसी यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर था। स्टाफ की पुलिस वेरिफिकेशन भी नहीं हुई थी।
इस वजह से यूनिवर्सिटी कैंपस इन आतंकियों का लॉजिस्टिक हब बना रहा। मेडिकल लैब और कमरों में ही बम की प्लानिंग हुई। NCR में सीरियल ब्लास्ट की साजिश की साजिश भी यहीं रची गई।
आरोप है कि छात्रों की फीस से कमाए पैसे शिक्षा में नहीं लगे। बल्कि सारा पैसा एक परिवार की शेल कंपनियों जैसे अमला एंटरप्राइजेज में डाला गया।
सिद्दीकी पर आरोप है कि उन्होंने इन पैसों को कई स्तरों पर इस्तेमाल करके अपनी पत्नी और बेटे को करोड़ों रुपए की निजी विदेशी रकम भेजी। शुक्रवार को यूनिवर्सिटी के 54 एकड़ परिसर को जब्त करने और अभियोजन शिकायत दर्ज करने के बाद, सरकार अब संस्थान के मैनेजमेंट के लिए एक रिसीवर की नियुक्ति पर विचार कर रही है।
इस कदम का उद्देश्य मौजूदा छात्रों के शैक्षणिक भविष्य को सुरक्षित रखना है, जबकि अल-फलाह नेतृत्व के खिलाफ धन शोधन और आतंकवाद फंडिंग के आपराधिक मामले अदालत में चल रहे हैं।