Khamenei Funeral: ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार में भारत की ओर से उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल शामिल होगा। सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व बिहार के गवर्नर लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) सैयद अता हसनैन करेंगे। जबकि उनके साथ विदेश राज्य मंत्री पवित्र मार्गेरिटा भी मौजूद रहेंगे।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अंतिम संस्कार समारोह में शामिल होने के लिए औपचारिक निमंत्रण भेजा था। यह निमंत्रण नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास के माध्यम से भारत के विदेश मंत्रालय को सौंपा गया था। हालांकि, प्रधानमंत्री मोदी पहले से तय विदेशी दौरे और अन्य आधिकारिक कार्यक्रमों के कारण इन तारीख में ईरान नहीं जा सकेंगे।
ऐसे में भारत सरकार ने उनके स्थान पर वरिष्ठ प्रतिनिधिमंडल भेजने का निर्णय लिया है। ईरान में अंतिम संस्कार और राजकीय श्रद्धांजलि समारोह जुलाई के पहले सप्ताह में तेहरान सहित कई शहरों में आयोजित होंगे। इस दौरान दुनिया के कई देशों के शीर्ष नेताओं और प्रतिनिधियों के शामिल होने की संभावना है।
भारत का यह फैसला दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंधों को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। भारत और ईरान के बीच ऊर्जा, संपर्क परियोजनाओं तथा क्षेत्रीय सहयोग के कई महत्वपूर्ण आयाम हैं। इनमें चाबहार बंदरगाह परियोजना विशेष रूप से अहम मानी जाती है।
ईरान ने पीएम मोदी को दिया था न्योता
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने देश के सर्वोच्च नेता रहे अयातुल्ला अली खामेनेई के अंतिम संस्कार कार्यक्रम में शामिल होने के लिए प्रधानमंत्री मोदी को आमंत्रित किया है। खामनेई के अंतिम संस्कार से जुड़ीं रस्में पांच से नौ जुलाई तक होंगी। खामेनेई ने तीन दशकों तक ईरान पर शासन किया। वह 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका द्वारा संयुक्त रूप से ईरान पर किये गए हमले में मारे गए थे।
राजनयिक सूत्रों ने बताया कि राष्ट्रपति पेजेश्कियान ने पीएम मोदी को अंतिम संस्कार कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया है। खामनेई के अंतिम संस्कार से जुड़े कार्यक्रम पांच, छह और सात जुलाई को तेहरान और कोम में आयोजित किए जाएंगे। जबकि अंतिम कार्यक्रम नौ जुलाई को मशहद शहर में होगा।
ईरान ने अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए पीएम मोदी समेत दुनिया के कई राष्ट्र प्रमुखों को औपचारिक रूप से आमंत्रित किया है। अगर पीएम मोदी इसमें शामिल होते तो इजरायल और अमेरिका की नजर बनी रहती। अब जब पीएम मोदी ईरान नहीं जा रहे हैं तो तेहरान इसे राजनयिक अपमान के तौर पर देख सकता है।
हालांकि भारत-ईरान के संबंध फिलहाल अच्छे बने हुए हैं। इजरायल के साथ भारत की साझेदारी और अमेरिका के साथ बढ़ते रक्षा संबंध एवं रणनीतिक स्वायत्तता के बारे में नई दिल्ली की लंबे समय से चली आ रही नीति शामिल हैं।