Jammu-Kashmir में 2 मार्च को सभी स्कूल-कॉलेज रहेंगे बंद, ईरान के सर्वोच्च नेता खामेनेई की मौत पर विरोध प्रदर्शन तेज

Jammu-Kashmir: जम्मू-कश्मीर में सोमवार को सभी स्कूल और कॉलेज बंद रहेंगे। सरकार ने यह फैसला लिया है क्योंकि घाटी में शिया समुदाय ने ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है।

अपडेटेड Mar 01, 2026 पर 5:42 PM

जम्मू–कश्मीर के जम्मू शहर में 2 मार्च यानी सोमवार को शिक्षा संस्थानों के लिए एक असामान्य दिन रहने वाला है। स्थानीय अधिकारियों ने आदेश जारी कर दिया है कि जम्मू संभाग के सभी सरकारी और निजी स्कूल, कॉलेज तथा विश्वविद्यालय शनिवार को बंद रहेंगे, ताकि शिया मुसलमानों के आयोजित धार्मिक और राजनीतिक इवेंट के समय शहर में शांति और सुरक्षा बनाए रखी जा सके। माना जा रहा है कि यह आदेश ईरान के नेता आयतुल्लाह अली खामेनेई की मौत के खिलाफ शिया समुदाय के विरोध‑संवेदनात्मक मार्च और धरने के मद्देनजर जारी किया गया है।

शिया समुदाय का विरोध

जम्मू शहर में शिया मुसलमानों के वरिष्ठ धार्मिक और सामाजिक नेता ईरान के शीर्ष नेता की मौत पर दुख और नाराजगी जाहिर करने के लिए जुलूस निकालने व प्रार्थना‑सभा आयोजित करने वाले हैं। इस दौरान सुरक्षा चिंताओं को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने पूर्व सूचना के तहत सभी शैक्षणिक संस्थान बंद करने का फैसला लिया है, ताकि भीड़‑भाड़ और अनहोनी की आशंका को कम किया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि इस बंदी का उद्देश्य छात्रों और शहरवासियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, न कि राजनीतिक या सांप्रदायिक दबाव बनाना।

आगे की योजना

जम्मू डिवीजन के तहत आने वाले सभी जिलों के लिए यह आदेश लागू रहेगा, जिसमें कक्षा नर्सरी से लेकर ग्रेजुएशन और पोस्ट‑ग्रेजुएशन तक के सभी स्तरों के शैक्षणिक संस्थान शामिल हैं। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह बंद अस्थायी है और 3 मार्च से सामान्य शैक्षणिक गतिविधियां फिर से शुरू होंगी, बशर्ते स्थिति शांत और सामान्य रहे। प्रशासन ने स्थानीय इंफर्मेशन और आपातकालीन हेल्पलाइन के जरिए नागरिकों को बार‑बार सलाह दी है कि वे अनावश्यक घूम‑फिर रहें और भीड़‑भाड़ वाले इलाकों से दूर रहें।


सामाजिक और राजनीतिक धड़कन

इस तरह की बंद व्यवस्था जम्मू–कश्मीर में नई नहीं है, लेकिन इस बार यह विशेष रूप से ईरान की राजनीतिक विरासत और शिया‑सुन्नी भावनात्मक जुड़ाव से जुड़ी हैं। स्थानीय नेताओं का आह्वान है कि विरोध‑आयोजन शांतिपूर्ण तरीके से हो, ताकि क्षेत्र की सामाजिक एकता और शिक्षा की निरंतरता बनी रहे। इस बीच, जम्मू के अभिभावकों और शिक्षकों को अगले दिन कक्षा‑कार्यक्रम को उचित तरीके से फिर से जोड़ने के लिए तैयार रहने की सलाह दी जा रही है।

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