अमेरिका की हेल्थकेयर व्यवस्था पर सवाल खड़े हो गए हैं और ये सवाल खड़े करने वाला कोई और नहीं बल्कि एक अमेरिकी महिला है। बता दें कि, अमेरिका की एक महिला का वीडियो इन दिनों सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। महिला ने खुद सोशल मीडिया पर सामने आकर दावा किया कि जिस दवा के लिए उसे अमेरिका में 1000 डॉलर (₹95000) अपनी जेब से देने पड़ते, वही दवा भारत से सीधे मंगवाने पर सिर्फ 25 डॉलर (₹2377) में मिल गई. इसके बाद उसने अमेरिकी स्वास्थ्य व्यवस्था को ‘स्कैम’ तक बता दिया।
अमेरिका में मेडिकल की लूट
इस वीडियो ने दवाओं की कीमतों और स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर नई बहस छेड़ दी है। विक्टोरिया ने बताया कि उनकी बीमा कंपनी ने इस दवा का खर्च उठाने से इनकार कर दिया था, जिसके कारण उन्हें पूरी कीमत खुद चुकानी पड़ी। उन्होंने कहा कि अमेरिका में यही दवा उन्हें करीब 1,000 डॉलर (लगभग 95,000 रुपये) में पड़ रही थी, लेकिन उन्होंने इसे सिर्फ 25 डॉलर (करीब 2,300 रुपये) में खरीद लिया। उनके मुताबिक, सिर्फ छह गोलियों के लिए इतनी बड़ी रकम मांगना हैरान करने वाला था, खासकर तब जब उनका बीमा भी इस दवा को कवर नहीं कर रहा था।
₹95000 की दवा भारत से ₹2300 में आ गई
उन्होंने बताया, “मेरी इंश्योरेंस कंपनी ने इस दवा का खर्च उठाने से मना कर दिया था, इसलिए मुझे इसकी पूरी कीमत खुद चुकानी पड़ती। अमेरिका में यह दवा मुझे लगभग 1,000 डॉलर (करीब 95,000 रुपये) की पड़ रही थी, लेकिन मैंने इसे सिर्फ 25 डॉलर (करीब 2,300 रुपये) में खरीद लिया। सोचिए, सिर्फ छह छोटी गोलियों के लिए मुझे 1,000 डॉलर अपनी जेब से देने पड़ते, क्योंकि मेरा इंश्योरेंस इसे कवर नहीं कर रहा था।”
दूसरा रास्ता तलाशते हुए उन्होंने अपने डॉक्टर की सलाह मानी और एक कनाडाई फार्मेसी से संपर्क किया, जो दवाएं दूसरे देशों से मंगाने की सुविधा देती है। विक्टोरिया ने बताया, “मेरे डॉक्टर ने कहा कि प्रिस्क्रिप्शन कनाडाई फार्मेसी को भेज दो। मैंने ऐसा ही किया और कीमत पूछी। मुझे लगा था कि शायद 100 या 200 डॉलर तक खर्च आएगा, जिसे मैं देने के लिए तैयार थी।” लेकिन जब उन्हें अंतिम कीमत बताई गई, तो वह उनकी उम्मीद से कहीं कम निकली।
महिला ने US हेल्थकेयर को बताया स्कैम
हैरानी जताते हुए उन्होंने कहा, “दवा की कीमत करीब 10 डॉलर (लगभग 950 रुपये) थी और शिपिंग का खर्च 15 डॉलर (करीब 1,400 रुपये) आया। यानी कुल मिलाकर मुझे यह दवा सिर्फ 25 डॉलर में मिल गई। यह दवा सीधे भारत में बने निर्माता से अंतरराष्ट्रीय शिपिंग के जरिए मेरे पास पहुंची। अमेरिका की स्वास्थ्य व्यवस्था सच में समझ से परे है। ऐसा लगता है कि लोगों से जरूरत से ज्यादा पैसे वसूले जा रहे हैं।”
इस घटना के बाद विक्टोरिया ने अमेरिका में दवाओं की कीमत तय करने के तरीके पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि जब वही दवा दूसरे देशों से बहुत कम कीमत में मिल सकती है, तो अमेरिका में इसकी लागत इतनी ज्यादा क्यों है। उनका वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद स्वास्थ्य सेवाओं की बढ़ती लागत, बीमा की सीमाएं और सस्ती दवाओं की उपलब्धता को लेकर लोगों के बीच बड़ी बहस शुरू हो गई।
लोगों ने दिए कमाल के रिएक्शन
इस वीडियो पर कई सोशल मीडिया यूजर्स ने भी अमेरिका में इलाज और दवाओं के बढ़ते खर्च को लेकर अपनी नाराज़गी जताई। एक यूज़र ने लिखा, “यह दुनिया का शायद एकमात्र देश है, जहां सिर्फ फ्लू होने पर भी आपकी आर्थिक हालत खराब हो सकती है।” दूसरे ने कहा, “सच में, यह सिस्टम ठीक से काम नहीं कर रहा है।”
एक अन्य यूज़र ने अपनी परेशानी साझा करते हुए लिखा, “मैं गंभीर रूप से बीमार हूं। अगर मेरे पास इंश्योरेंस नहीं होता, तो मुझे हर महीने अपनी दवाओं पर करीब 7,000 डॉलर (लगभग 6.6 लाख रुपये) खर्च करने पड़ते। इसके अलावा मेरी 48,000 डॉलर (करीब 45 लाख रुपये) की कस्टम व्हीलचेयर का खर्च अलग है।” वहीं एक और यूज़र ने प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “यह वाकई हैरान कर देने वाला है। अच्छी बात है कि आपको इतना सस्ता विकल्प मिल गया, क्योंकि यह अंतर विश्वास करने लायक नहीं है।”