Gyanesh Kumar: CEC को फिर हटाने की कोशिश! ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नया नोटिस देने तैयारी में विपक्ष, क्या मिलेगी सफलता?

CEC Gyanesh Kumar: भारत में चुनावी निष्पक्षता को लेकर चल रहा राजनीतिक टकराव अब एक नए चरम पर पहुंच गया है। खबर है कि 'INDIA' गठबंधन की पार्टियां संसद में एक नया नोटिस लाने की तैयारी कर रही हैं, जिसमें मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग की जाएगी

अपडेटेड Apr 19, 2026 पर 8:09 AM
Story continues below Advertisement
CEC Gyanesh Kumar: कई विपक्षी दलों के नेता नोटिस को लेकर बातचीत कर रहे हैं

CEC Gyanesh Kumar: विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने का प्रस्ताव लाने संबंधी नोटिस लोकसभा स्पीकर एवं राज्यसभा के सभापति द्वारा अस्वीकार किए जाने के बाद अब एक नया नोटिस देने की योजना बना रहे हैं। सूत्रों ने बताया कि कई विपक्षी दलों के नेता बातचीत कर रहे हैं। कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस (TMC), समाजवादी पार्टी (SP) एवं द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) सहित विभिन्न दलों के कम से कम पांच वरिष्ठ सांसद नए नोटिस का मसौदा तैयार करने पर काम कर रहे हैं।

सूत्रों का यह भी कहना है कि अभी तक यह तय नहीं हुआ है कि नोटिस किस सदन में पेश किया जाएगा या क्या इसे पिछली बार की तरह दोनों सदनों में पेश किया जाएगा। उन्होंने कहा कि शुक्रवार को लोकसभा में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 के पारित नहीं होने से उत्साहित विपक्षी नेता नोटिस पर अधिक सांसदों के सिग्नेचर सुरक्षित करने का लक्ष्य रख रहे हैं। कम से कम 200 सांसद जुटाने की कोशिश कर रहे हैं।

सूत्रों ने पीटीआई से कहा, "हम एक बयान देना चाहते हैं। हमें पहले यह साबित करना होगा कि पिछली बार संख्या कम आंकी गई थी।" अपने पहले के नोटिस में विपक्ष ने सीईसी कुमार पर स्वतंत्रता और संवैधानिक निष्ठा बनाए रखने में विफलता और कार्यपालिका के दबाव के तहत कार्य करने का आरोप लगाया था। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला और राज्यसभा के सभापति सी पी राधाकृष्णन ने नोटिस को अस्वीकार कर दिया था।


विपक्ष CEC को पद से क्यों हटाना चाहता है?

विपक्ष का आरोप है कि CEC के आचरण ने भारत निर्वाचन आयोग (ECI) की स्वतंत्रता को कमजोर किया है। यह आरोप विशेष रूप से 2024 के आम चुनावों और हाल ही में वोटर लिस्ट में किए गए संशोधनों से जुड़े विवादों के बाद लगाया जा रहा है। ज्ञानेश कुमार पर "पक्षपातपूर्ण और भेदभावपूर्ण आचरण" का आरोप लगाया गया है। विपक्षी नेताओं का आरोप है कि उनके नेतृत्व में ECI ने जानबूझकर चुनावी धोखाधड़ी की जांच में बाधा डाली है।

CEC को पद से हटाने का पहला औपचारिक नोटिस मार्च में जमा किया गया था। हालांकि, 7 अप्रैल को लोकसभा स्पीकर ओम बिरला और राज्यसभा सभापति सी.पी. राधाकृष्णन ने इन प्रस्तावों को खारिज कर दिया। BJP नेताओं ने इस अस्वीकृति को उन लोगों के लिए कड़ा जवाब बताया था, जिन पर राजनीतिक लाभ के लिए संवैधानिक प्रावधानों का कथित तौर पर दुरुपयोग करने का आरोप है।

पद से हटाने की प्रक्रिया कैसे काम करती है?

CEC को पद से हटाना एक अत्यंत कठोर संवैधानिक प्रक्रिया है, जो आर्टिकल 324(5) के तहत सुप्रीम कोर्ट के किसी जज पर महाभियोग चलाने की प्रक्रिया के ही समान है। किसी नए नोटिस को आगे बढ़ाने के लिए उसे पीठासीन अधिकारियों द्वारा स्वीकार किया जाना जरूरी है। एक बार स्वीकार हो जाने पर आरोपों की जांच के लिए न्यायिक और संसदीय विशेषज्ञों वाली एक संयुक्त जांच समिति बनाई जानी चाहिए।

ये भी पढ़ें- Indian Ship Attack Hormuz: ईरानी फायरिंग के बीच भारत को बड़ी सफलता! 10वां भारतीय जहाज होर्मुज स्ट्रेट को किया पार, 4 वापस लौटे

यदि समिति CEC को दोषी पाती है, तो इस प्रस्ताव को संसद के प्रत्येक सदन द्वारा विशेष बहुमत से पारित किया जाना चाहिए। इस नए नोटिस का समय बहुत अहम है। यह महिलाओं के आरक्षण और पश्चिम बंगाल तथा तमिलनाडु में होने वाले आगामी चुनावों को लेकर चल रहे भारी टकराव के दौर में आया है।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।