अगर आप ऐप के जरिए कुछ ऑर्डर कर रहे हैं या फिर ऑनलाइन कैब बुक करके कहीं जाना चाहते हैं तो हो सकता है कि आपको शनिवार शाम 5 बजे तक ये सर्विसेज न मिलें। वह इसलिए क्योंकि गिग एंड प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन (GIPSWU) ने शनिवार, 16 मई को पूरे देश में एक दिन की हड़ताल का आह्वान किया है। यह हड़ताल ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी और कम मजदूरी को लेकर है। यूनियन ने ऐप-बेस्ड प्लेटफॉर्म से जुड़े कैब ड्राइवरों और डिलीवरी पार्टनर्स से दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे के बीच अपनी सेवाएं बंद करने की अपील की है। उनकी मांग है कि उन्हें ज्यादा भुगतान मिले और ईंधन पर होने वाले बढ़ते खर्च से राहत दी जाए।
शुक्रवार को सरकार ने पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3-3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी कर दी। इसके बाद ऐप-बेस्ड ड्राइवर और डिलीवरी वर्कर्स को एक बड़े आर्थिक झटके का सामना करना पड़ रहा है। यूनियन के अनुसार, ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर भारत के 1.2 करोड़ गिग वर्कर्स पर पड़ेगा। इससे गिग वर्कर्स के बीच बड़े पैमाने पर पलायन भी शुरू हो सकता है।
केंद्र सरकार ने शुक्रवार को तत्काल प्रभाव से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में 3-3 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी की घोषणा की। यह देश में लगभग 4 सालों में ईंधन की रिटेल कीमतों में किया गया पहला बदलाव है। कीमतों में यह बढ़ोतरी वैश्विक कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के कारण हुई है। अमेरिका-ईरान के बीच चल रहे युद्ध से रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग 'होर्मुज स्ट्रेट' (Strait of Hormuz) से सप्लाई काफी ज्यादा प्रभावित हुई है। इससे वैश्विक स्तर पर एनर्जी संकट खड़ा हो गया है।
प्रति किलोमीटर सर्विस रेट बढ़ाने की मांग
यूनियन की ओर से जारी एक बयान में कहा गया है, "गिग एंड प्लेटफॉर्म सर्विस यूनियन (GIPSWU) पेट्रोल, डीजल और LPG गैस की कीमतों में बढ़ोतरी के बाद सरकार और डिजिटल गिग प्लेटफॉर्म्स से प्रति किलोमीटर सर्विस रेट बढ़ाने की मांग करती है। पेट्रोल और डीजल की कीमतों में बढ़ोतरी गिग वर्कर्स के लिए चिंता और पलायन का कारण बनेगी। फ्यूल की कीमतों में बढ़ोतरी का सीधा असर 1.2 करोड़ गिग वर्कर्स पर पड़ेगा।"
यूनियन की प्रेसिडेंट सीमा सिंह का कहना है, "स्विगी, जोमैटो और ब्लिंकइट जैसी कंपनियों से जुड़े डिलीवरी वर्कर्स, मौजूदा भीषण गर्मी के हालात में पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों का बोझ नहीं उठा पाएंगे।" उन्होंने सरकार और कंपनियों से अपील की कि वे प्रति किलोमीटर न्यूनतम सर्विस रेट 20 रुपये तय करें। सिंह ने यह चेतावनी भी दी कि यदि तत्काल राहत नहीं दी गई, तो कई गिग वर्कर्स इस क्षेत्र को छोड़ने पर मजबूर हो सकते हैं।
यूनियन के नेशनल कोऑर्डिनेटर निर्मल गोराना के अनुसार, ईंधन की बढ़ती कीमतें गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स को बुरी तरह प्रभावित कर रही हैं। इनमें से कई वर्कर्स अपनी रोजी-रोटी के लिए दोपहिया वाहनों पर निर्भर हैं। ईंधन, गाड़ी की देखभाल और रखरखाव से जुड़े खर्चों में तेजी से बढ़ोतरी हुई है, लेकिन एग्रीगेटर कंपनियों द्वारा दी जाने वाली पेमेंट दरों में उस हिसाब से बढ़ोतरी नहीं हुई है।