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पासपोर्ट, वोटर ID या आधार क्या इनमें से कोई भारतीय नागरिकता का अंतिम सबूत नहीं? जानें सिटिजनशिप से जुड़े असली नियम

क्या आपके पास भारतीय पासपोर्ट, वोटर आईडी या आधार कार्ड है? अगर हां तो आप निश्चित रूप से इसे अपनी भारतीय नागरिकता का सबसे बड़ा प्रमाण मानते होंगे। लेकिन फिलहाल इन डॉक्युमेंट्स को लेकर एक ऐसी बहस छिड़ी हुई है, जो आपकी मान्यताओं पर भारी पड़ सकती है।

Moneycontrol Hindi Newsअपडेटेड Jun 25, 2026 पर 12:48 PM
पासपोर्ट, वोटर ID या आधार क्या इनमें से कोई भारतीय नागरिकता का अंतिम सबूत नहीं? जानें सिटिजनशिप से जुड़े असली नियम
पासपोर्ट, वोटर ID या आधार क्या इनमें से कोई भारतीय नागरिकता का अंतिम सबूत नहीं?

Proof of Indian Citizenship: क्या आपके पास भारतीय पासपोर्ट, वोटर आईडी या आधार कार्ड (Aadhaar Card) है? अगर हां तो आप निश्चित रूप से इसे अपनी भारतीय नागरिकता का सबसे बड़ा प्रमाण मानते होंगे। लेकिन फिलहाल इन डॉक्युमेंट्स को लेकर एक ऐसी बहस छिड़ी हुई है, जो आपकी मान्यताओं पर भारी पड़ सकती है क्योंकि लीगल फ्रेमवर्क आपके इन कागजात को अलग नजरिए से देखता है। इस बहस की शुरुआत हाल ही में विदेश मंत्रालय द्वारा दी गई एक आधिकारिक जानकारी के बाद शुरू हुई। इसके बाद देश में नागरिकता के दस्तावेजों को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। आइए भारतीय कानून और मौसम विभाग की तरह सरकार द्वारा स्पष्ट किए गए नियमों के आधार पर विस्तार से समझते हैं कि आखिर कौन सा दस्तावेज नागरिकता का असली सबूत है और पासपोर्ट-आधार को लेकर क्या नियम हैं।

पहले जानिए विदेश मंत्रालय के उस स्पष्टीकरण को जो पासपोर्ट से जुड़े मामले पर आया

24 जून को एक विस्तृत ब्रीफिंग के दौरान विदेश मंत्रालय के अधिकारियों ने साफ किया कि भारतीय पासपोर्ट तकनीकी रूप से नागरिकता का अंतिम या निर्णायक सबूत नहीं है। मंत्रालय ने इस बात पर जोर दिया कि पासपोर्ट मुख्य रूप से अंतरराष्ट्रीय यात्रा को सुगम बनाने के लिए जारी किया जाने वाला एक ट्रैवल डॉक्युमेंट है। हालांकि यह राष्ट्रीयता का एक मजबूत अनुमान जरूर पेश करता है, लेकिन कानूनी रूप से यह पूर्ण नहीं है। इसके बाद सरकार ने गुरुवार को फिर स्पष्ट किया कि पासपोर्ट को कभी भी नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना गया है और ऐसा कोई भी फैसला हाल-फिलहाल में या पिछले 12 वर्षों में नहीं लिया गया है। इस स्पष्टीकरण के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है। राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने विदेश मंत्रालय के इस बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर पूछा कि यदि पासपोर्ट नागरिकता का दस्तावेज नहीं है तो फिर कौन सा दस्तावेज नागरिकता का सबूत है? उन्होंने चिंता जताई कि इस तरह बीएलओ भी किसी की नागरिकता पर संदेह कर उसे वोट के अधिकार से वंचित कर सकता है और अंततः यह मामला सुप्रीम कोर्ट जाएगा।

कानूनी पहलू: क्यों पासपोर्ट नागरिकता का अंतिम सबूत नहीं?

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