Mountaineer Arun Kumar Tiwari: दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट से उतरते समय जान गंवाने वाले पर्वतारोही अरुण कुमार तिवारी का शव पहाड़ पर ही रहेगा। उनके परिवार ने धार्मिक आस्था और शव लाने की अत्यधिक कठिनाई के कारण यह फैसला लिया है। पर्वतारोही अरुण कुमार तिवारी पिछले हफ्ते 21 मई को माउंट एवरेस्ट से उतरते समय मौत हो गई थी। अब तिवारी के परिवार वालों ने फैसला किया है कि वे उनका शव पहाड़ पर ही छोड़ देंगे। तिवारी के जीजा सुधीर उपाध्याय के अनुसार, यह फैसला आस्था और शव को वापस लाने में आने वाली तकनीकी मुश्किलों को देखते हुए लिया गया है।
उन्होंने बुधवार (27 मई) को न्यूज एजेंसी PTI से कहा, "वह (तिवारी) भगवान शिव के धाम में हैं। शव को वापस लाने की प्रक्रिया... जब तक शव हमारे पास पहुंचता, तब तक वह बहुत बुरी तरह से खराब हो चुका होता। वहां (एवरेस्ट पर) ऐसे ऑपरेशन सफल भी नहीं माने जाते।" नेपाल की कंपनी 'पायनियर एडवेंचर्स' के डायरेक्टर निवेश कार्की के अनुसार, 53 साल के तिवारी की मौत पिछले हफ्ते नीचे उतरते समय तबीयत खराब होने के बाद 'हिलेरी स्टेप' के पास हुई, जो चोटी से ठीक नीचे है। उस समय चार शेरपा पर्वतारोही उनकी मदद कर रहे थे।
तिवारी हैदराबाद की एक बड़ी IT कंपनी में सीनियर प्रोफेशनल थे। वह एक मंझे हुए पर्वतारोही थे। उन्होंने पहले भी कई चोटियों के अलावा माउंट एल्ब्रस (रूस), माउंट डेनाली (अमेरिका) और माउंट एकॉनकागुआ (अर्जेंटीना) पर चढ़ाई की थी।
काफी ज्यादे है शव लाने का खर्च
सूत्रों के अनुसार, एवरेस्ट पर 'हिलेरी स्टेप' से शव को नीचे लाना एक बहुत ही खतरनाक और महंगा काम है। इसके लिए आठ से 12 बहुत ही कुशल शेरपाओं की टीम और बड़ी मात्रा में बोतलबंद ऑक्सीजन की जरूरत होती है। चोटी के पास लगभग 8,790 मीटर की ऊंचाई पर स्थित 'हिलेरी स्टेप (Hillary Step)' ठीक 'डेथ जोन' में आता है। यहां ऑक्सीजन की कमी एक बड़ी समस्या है।
इसकी वजह से इंसानी शव और बचावकर्मी लगातार थकान, फ्रॉस्टबाइट (ठंड से शरीर का सुन्न पड़ जाना) और ऊंचाई पर होने वाली बीमारियों के खतरे में रहते हैं। तिवारी को 'बूट्स एंड क्रैम्पॉन' नाम की एक भारतीय कंपनी ने ट्रेनिंग दी थी, जो दुनिया भर में पर्वतारोहण और ट्रेकिंग के अभियान आयोजित करती है।
कौन थे अरुण कुमार तिवारी?
अरुण कुमार तिवारी के मित्रों और परिजनों ने बताया कि वह पर्वतारोहण के प्रति बेहद जुनूनी थे। उत्तर प्रदेश के रहने वाले तिवारी हैदराबाद में रहते थे। तिवारी को 'बूट्स एंड क्रैम्पॉन (Boots and Crampon)' नाम की एक भारतीय कंपनी ने ट्रेनिंग दिया था। यह कंपनी दुनिया भर में अभियान और ट्रेक आयोजित करती है। एक आईटी कंपनी में वरिष्ठ अधिकारी के रूप में कार्यरत रहे तिवारी एक कुशल पर्वतारोही थे।
'बूट्स एंड क्रैम्पॉन' के सूत्रों ने बताया कि उन्होंने कई चोटियों के अलावा माउंट एल्ब्रस (रूस), माउंट डेनाली (अमेरिका) और माउंट एकांकागुआ (अर्जेंटीना) पर चढ़ाई की थी। सूत्रों ने बताया कि शवों को नीचे लाना एक चुनौती भरा काम है। नेपाल अभियान संचालक संघ के महासचिव ऋषि भंडारी ने बताया कि तिवारी शिखर से उतरते समय थक गए होंगे। उनके गाइडों के तमाम प्रयासों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका।
सूत्रों ने बताया कि तिवारी के साथ दो अनुभवी शेरपा गाइड (रिंजी एवं असीम) थे। वे अन्य लोगों के साथ में नीचे उतरने की कोशिश कर रहे थे। लेकिन हिलेरी स्टेप पर उन्हें ज्यादा थकान हो गई और गाइड उन्हें वापस नहीं ला सके। उन्होंने बताया कि तिवारी ने 2025 में एवरेस्ट पर चढ़ाई का प्रयास किया था। लेकिन स्वास्थ्य समस्याओं के कारण लगभग 7,200 मीटर चढ़ने के बाद रुक गए थे। तिवारी के परिवार में पत्नी और दो बेटियां हैं।