Arvind Kejriwal: आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने 'जेन जेड' से अपील की है कि वे नीट पेपर लीक के कथित दोषियों को न्याय के कटघरे में लाना सुनियचित करें। केजरीवाल ने साथ ही कहा कि अगर बांग्लादेश और नेपाल के युवा राजनीतिक बदलाव ला सकते हैं, तो भारतीय छात्र भी जवाबदेही तय करने के लिए दबाव डाल सकते हैं। दिल्ली के पूर्व सीएम ने कहा कि मैं Gen-Z से यह पूछना चाहता हूं क्या यह सब ऐसे ही चलता रहना चाहिए? अगर नेपाल और बांग्लादेश के Gen-Z सड़कों पर उतरकर अपनी सरकारें बदल सकते हैं, तो क्या हमारे Gen-Z पेपर लीक की घटनाओं में शामिल मंत्रियों को जेल नहीं भेज सकते?
केजरीवाल ने बुधवार (13 मई) को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि पेपर बार-बार लीक होने की घटनाओं ने उम्मीदवारों का आत्मविश्वास हिला कर रख दिया है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) द्वारा अतीत में की गई जांचों के परिणामस्वरूप दोषियों को कड़ी सजा मिली है? उन्होंने दावा किया कि जब से 2014 में मोदी सरकार सत्ता में आई है, तब से परीक्षा के पेपर लीक होने की 93 घटनाएं हो चुकी हैं। इनमें से ज्यादातर पेपर लीक BJP सरकारों के शासन में हुए हैं। इसका असर 6 करोड़ युवाओं पर पड़ा है।
दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री केजरीवाल ने कहा, "अगर बांग्लादेश और नेपाल जैसे देशों में जेन जेड सरकारें बदल सकती है, तो भारतीय युवा भी पेपर लीक के मामलों में जवाबदेही सुनिश्चित कर सकते हैं।" AAP प्रमुख ने कहा, "2017, 2021, 2024 में पेपर लीक हुए थे। उस समय CBI को जांच सौंप दी गई। क्या CBI ने कुछ किया? इस बार भी CBI को जांच सौंपी गई है। क्या CBI कुछ करेगी?"
उन्होंने आगे कहा, "CBI उन्हीं लोगों को रिपोर्ट करती है जो देश में पेपर लीक करा रहे हैं। जब से मोदी सरकार आई है तब से कुल 93 पेपर लीक हुए हैं। करीब 6 करोड़ युवाओं का भविष्य इन पेपरों में बंद था। इससे शक तो पैदा होता है। क्या इनके नेता पेपर लीक करा रहे हैं? अगर नेपाल और बांग्लादेश के जेन-ज़ी सरकार बदल सकते है तो क्या हमारे देश के जेन-जी पेपर लीक करने वाले मंत्रियों को जेल नहीं भेज सकता है।"
'जेन जेड' उस पीढ़ी को कहा जाता है जो 1997 से 2012 के बीच पैदा हुई है। यह वह युवा वर्ग है जो तकनीक, इंटरनेट और सोशल मीडिया के साथ बड़ा हुआ है। इन्हें डिजिटल नेटिव्स भी कहा जाता है क्योंकि इनका जीवन स्मार्टफोन, इंटरनेट और सोशल मीडिया से जुड़ा माना गया है।
पूर्व मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि नीट परीक्षापत्र लीक मामले में सीबीआई की जांच का कोई निष्कर्ष नहीं निकलेगा, पिछले पेपर लीक मामले में भी वह कुछ नहीं कर सकी थी। केजरीवाल ने 2014 से अब तक एग्जाम पेपर लीक होने की घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि इसने करोड़ों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि BJP शासित राज्यों में ऐसी कई घटनाएं हुई हैं। केजरीवाल ने कहा, "पेपर लीक की ज्यादातर घटनाएं BJP शासित राज्यों राजस्थान, UP, उत्तराखंड और गुजरात में हुई हैं। यह कोई इत्तेफ़ाक नहीं है कि इन राज्यों और केंद्र दोनों जगह BJP की ही सरकारें हैं। हमें ऐसी रिपोर्टें मिल रही हैं कि हाल ही में हुए NEET पेपर लीक का मुख्य केंद्र राजस्थान है। इससे एक शक पैदा होता है। क्या इसमें उनके नेता भी शामिल हैं? अगर ऐसा है, तो CBI भला क्या कर सकती है?"