राम मंदिर के चढ़ावे में कथित गड़बड़ी का विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। इस महीने की शुरुआत में अयोध्या राम मंदिर के दानपात्र से नकदी और अन्य वस्तुओं के गायब होने के आरोप लगे हैं। इस मामले पर योगी सरकार ने जांच के लिए एसआईटी का गठन किया गया है। हीं इस मामले में जांच कर रही एसआईटी की टीम लगातार छापेमारी कर रही है। राम मंदिर के ट्रस्ट पदाधिकारी अनिल मिश्रा, महासचिव चंपत राय और उनके ड्राइवर रामशंकर यादव उर्फ टिन्नू यादव तथा गोपाल राव से पूछताछ की गई।
वहीं अब तक सामने आई जानकारी के मुताबिक, एसआईटी की पूछताछ में टिन्नू यादव ने गिनती प्रक्रिया में अनिल मिश्रा और गोपाल राव का नाम लिया है। जांच एजेंसियों को आशंका है कि दान में मिले बहुमूल्य आभूषणों के प्रबंधन और रिकॉर्ड में भी अनियमितताएं हो सकती हैं। सूत्रों के अनुसार, जांच टीम यह पता लगाने में जुटी है कि दान और चढ़ावे से जुड़े काम में तय नियमों का सही तरीके से पालन हुआ था या नहीं। साथ ही यह भी देखा जा रहा है कि कहीं निगरानी व्यवस्था में कोई कमी तो नहीं रही। जांचकर्ता इस काम में लगे कर्मचारियों की पृष्ठभूमि, उनकी जिम्मेदारियों और नियुक्ति से जुड़ी जानकारी भी जुटा रहे हैं।
SIT की टीम कर रही हैं जांच
मंदिर के चढ़ावे में कथित वित्तीय गड़बड़ियों के आरोप सामने आने के बाद यह जांच शुरू की गई थी। मंदिर के पूर्व लेखाकार महिपाल सिंह ने चढ़ावे के पैसे के प्रबंधन में अनियमितताओं की जांच की मांग की थी। इसके बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने मामले की जांच के लिए एसआईटी का गठन किया। जांच के शुरुआती दौर में एसआईटी ने राम मंदिर परिसर का निरीक्षण किया। इस दौरान दान पेटियों, चढ़ावे की गिनती की प्रक्रिया और नकदी रखने की व्यवस्था की जांच की गई। सूत्रों का कहना है कि टीम को शुरुआती जांच में कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां और साक्ष्य मिले हैं, जिनकी अब विस्तार से पड़ताल की जा रही है। हालांकि, अधिकारियों ने अभी तक किसी गड़बड़ी की पुष्टि नहीं की है और न ही मिले साक्ष्यों के बारे में सार्वजनिक रूप से कोई जानकारी दी है।
बता दें कि, राम मंदिर चढ़ावे में गड़बड़ियों की जांच करने के लिए SIT गठित की गई है। इसमें लखनऊ के कमिश्नर विजय विश्वास पंत (IAS), किरन एस. (IPS, आईजी रेंज) और नीलरतन (विशेष सचिव, वित्त) को शामिल किया गया है।