राम मंदिर दान पत्र गबन: SIT ने अयोध्या में 8 घंटे क्या-क्या किया? लेट नाइट एक्शन में इस केस जुड़े 5 बिग अपडेट्स जानिए

Ayodhya Ram Mandir Donation Row: यह विवाद सात जून को तब सामने आया जब समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि राम मंदिर में चढ़ावे के रूप में प्राप्त करोड़ों रुपये गायब होने की रिपोर्टें सामने आई हैं। उन्होंने अदालत से मामले का संज्ञान लेने का आग्रह किया था

अपडेटेड Jun 16, 2026 पर 8:19 AM
Ayodhya Ram Mandir Donation Row: अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे की कथित अनियमितताओं की जांच के लिए मंदिर परिसर पहुंची एसआईटी

Ayodhya Ram Mandir Donation Row: उत्तर प्रदेश के अयोध्या में स्थित भगवान श्री रामलला मंदिर में चढ़ावे की कथित अनियमितताओं की जांच के लिए गठित स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) की तीन सदस्यीय टीम सोमवार (15 जून) को जांच के सिलसिले में मंदिर परिसर पहुंची। SIT आज (16 जून) भी राम मंदिर के दान-पात्रों से जुड़े कथित गबन के मामले की जांच जारी रखेगी। SIT की टीम कल रात 11:00 बजे तक राम जन्मभूमि परिसर में मौजूद रही। इसके बाद जांच समिति रात भर अयोध्या में ही रुकी। SIT के सदस्य सरयू अतिथि गृह में रात में रुके हुए थे।

सूत्रों के अनुसार, एसआईटी के सदस्य गेट नंबर 11 के माध्यम से मंदिर परिसर में दाखिल हुए। अधिकारियों ने बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार ने शनिवार को राम मंदिर में दान राशि के कथित गबन की जांच के लिए तीन सदस्यीय एसआईटी का गठन किया था। यह मंदिर श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा प्रबंधित है।

सीएम योगी के आदेश में एसआईटी गठित


मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर तथा ट्रस्ट के अनुरोध पर यह एसआईटी गठित की गई है। ट्रस्ट ने इसे भ्रामक सूचनाओं को रोकने और सच्चाई सामने लाने के लिए आवश्यक बताया था। ट्रस्ट ने कहा था कि राम मंदिर की छवि को धूमिल करने के प्रयास किए जा रहे हैं। एसआईटी में लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) किरण एस और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं।

ट्रस्ट ने सरकार से मामले की विस्तृत जांच कराने का आग्रह किया था ताकि तथ्यों की पुष्टि हो सके और सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों पर विराम लगाया जा सके। राज्य सरकार के अनुसार, एसआईटी मामले की व्यापक जांच कर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपेगी।

अब तक की बड़ी बातें

  • SIT की टीम कल रात 11:00 बजे तक राम जन्मभूमि परिसर में मौजूद रही।
  • जांच समिति रात भर अयोध्या में ही रुकी।
  • SIT के सदस्य सरयू अतिथि गृह में ठहरे।
  • राम जन्मभूमि परिसर में जांच का काम लगभग आठ घंटे तक चला।
  • SIT ने अलग-अलग दौर की पूछताछ में कुल 43 लोगों से सवाल-जवाब किए।
  • ट्रस्ट के पदाधिकारियों और स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के उन कर्मचारियों से भी पूछताछ की गई जो दान
  • पात्रों की गिनती में शामिल थे।
  • अलग-अलग लोगों से कई चरणों में पूछताछ की गई।
  • जांच के दौरान ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय, विशेष रूप से आमंत्रित सदस्य गोपाल राव और पदेन
  • सदस्य/अयोध्या के जिलाधिकारी मौजूद थे।
  • राम जन्मभूमि परिसर में रखे सभी प्रमुख दान-पात्रों की भौतिक रूप से जांच की गई।
  • CCTV फुटेज और कई महत्वपूर्ण दस्तावेजों की जांच की गई।
  • SIT ने बैंकों में जमा किए गए दान का भी सत्यापन किया।
  • आरोपों के सिलसिले में ट्रस्ट द्वारा पहले हिरासत में लिए गए लोगों से अलग-अलग पूछताछ की गई।
  • पुलिस अधिकारियों के अनुसार, अभी तक किसी को हिरासत में नहीं लिया गया है और न ही जेल भेजा गया है।
  • राम मंदिर ट्रस्ट ने अभी तक कोई औपचारिक शिकायत पत्र नहीं सौंपा है।
  • देर रात राम जन्मभूमि पुलिस स्टेशन के स्टेशन हाउस ऑफिसर और अयोध्या के सर्कल ऑफिसर को भी परिसर में बुलाया गया।
  • अपना काम पूरा करने के बाद, SIT की टीम कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच राम जन्मभूमि परिसर से रवाना हो गई।
  • जांच की विस्तृत रिपोर्ट जल्द ही मुख्यमंत्री कार्यालय को सौंपे जाने की उम्मीद है।

जांच में लापरवाही नहीं बरती जाएगी

इस बीच, राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने सोमवार को कहा कि एसआईटी जांच में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरती जाएगी। मिश्र ने कहा, "जांच के दो पहलू हैं-आपराधिक और भविष्य में सुधार से संबंधित। जब दोनों पहलुओं पर काम होगा तभी हम श्रद्धालुओं का विश्वास और मजबूत कर पाएंगे।" उन्होंने कहा कि मंदिर ट्रस्ट जांच में पूरा सहयोग करेगा और एसआईटी को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

मिश्र ने बताया कि इस संबंध में उन्होंने रविवार को जिला प्रशासन से भी बातचीत की थी और प्रशासन ने पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया है। भक्तों की संख्या पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में मिश्र ने कहा, "भक्तों की संख्या को लेकर कोई सवाल नहीं है। श्रद्धालु भगवान के प्रति समर्पण भाव से आते हैं। वे दान करते हैं...। हमारे सनातन धर्म में भी कहा गया है कि दान करो और उसे भूल जाओ। न तो इसका पता लगाया जाता है, न ही भगवान के साथ कोई वस्तु विनिमय (प्रणाली) है, (जब से) मैंने दान किया है।"

उन्होंने कहा कि यह सनातन धर्म की एक महत्वपूर्ण विशेषता है। इस सवाल पर कि क्या एसआईटी जांच के लिए दिल्ली से किसी वरिष्ठ अधिकारी को बुलाया जा रहा है, मिश्र ने कहा, "मुझे लगता है कि यह पूरी तरह एक गलत जानकारी है। यह राज्य सरकार और जिला प्रशासन का विषय है। जैसा कि आम बोलचाल में कहा जाता है कि ‘नैया पार लगानी है’, तो दोनों (राज्य सरकार और जिला प्रशासन) ही ऐसा करेंगे।"

सपा-कांग्रेस हुई हमलावर

उधर, युवा कांग्रेस की उत्तर प्रदेश इकाई के एक पदाधिकारी शरद शुक्ला ने अयोध्या में एक बैनर लगाया है, जिसमें लिखा गया है कि जो भी राम मंदिर की संपत्ति या धन की चोरी करने का प्रयास करेगा, उसे 60,000 वर्षों तक कीड़े के रूप में नरक में सड़ना पड़ेगा। इस बैनर में स्कंद पुराण का एक श्लोक भी उल्लेखित है, जिसका अर्थ है कि “भगवान रामलला स्वयं न्याय करेंगे।”

यह विवाद सात जून को तब सामने आया जब समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि राम मंदिर में चढ़ावे के रूप में प्राप्त करोड़ों रुपये गायब होने की रिपोर्टें सामने आई हैं और उन्होंने अदालत से मामले का संज्ञान लेने का आग्रह किया था। इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने कहा था कि आंतरिक ऑडिट जारी है और अब तक ऐसे कोई तथ्य सामने नहीं आए हैं जिससे आरोपों की पुष्टि हो सके।

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