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'1971 के बाद सबसे बड़ी चुनौती...'; संसदीय कमेटी ने बांग्लादेश संकट में चीन-पाकिस्तान की भूमिका पर जताई चिंता

Anti-India protests in Bangladesh: कांग्रेस के शशि थरूर की अध्यक्षता वाली एक संसदीय समिति ने कहा है कि बांग्लादेश में मौजूदा हालात भारत के लिए 1971 के 'मुक्ति युद्ध' के बाद सबसे बड़ी रणनीतिक चुनौती हैं। 'भारत-बांग्लादेश संबंधों का भविष्य" शीर्षक वाली रिपोर्ट गुरुवार को संसद में पेश की गई

Akhilesh Nath Tripathiअपडेटेड Dec 18, 2025 पर 11:22 PM
'1971 के बाद सबसे बड़ी चुनौती...'; संसदीय कमेटी ने बांग्लादेश संकट में चीन-पाकिस्तान की भूमिका पर जताई चिंता
Anti-India protests in Bangladesh: बांग्लादेश की राजधानी ढाका में गुरुवार को प्रदर्शनकारियों ने भारतीय उच्चायोग की ओर मार्च किया, लेकिन पुलिस ने बीच में रोक दिया

Anti-India protests in Bangladesh: विदेश मामलों की एक संसदीय स्थायी समिति ने चेतावनी दी है कि बांग्लादेश में बदलती राजनीतिक स्थिति 1971 के बाद से भारत के लिए सबसे बड़ी रणनीतिक चुनौती हैकांग्रेस सांसद शशि थरूर की अध्यक्षता वाली विदेश मामलों की संसदीय समिति ने बांग्लादेश में इस्लामी ताकतों के फिर से उभरने, घरेलू राजनीतिक माहौल में बदलाव और चीन एवं पाकिस्तान के बढ़ते प्रभाव का हवाला दिया है। हालांकि समिति ने कहा है कि वर्तमान हालात अराजकता और अव्यवस्था में नहीं बदलेंगे। फिर भी भारत को इसे संभालने में सावधानी बरतनी होगी।

समिति ने सरकार को कई अहम सिफारिशें भी सौंपी हैं। समिति की रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश में अशांति के पीछे इस्लामिक कट्टरपंथ का बढ़ना, चीन एवं पाकिस्तान का पड़ोसी देश में बढ़ता प्रभाव और शेख हसीना की पार्टी अवामी लीग की राजनीतिक पकड़ का कमजोर होना मुख्य कारण हैं।

समिति ने सिफारिश की है कि सरकार को भारत के मूल्यों और अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियों के अनुरूप "अपने सैद्धांतिक और मानवीय दृष्टिकोण को जारी रखना चाहिए।" साथ ही यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि ऐसी स्थितियों से उचित संवेदनशीलता के साथ निपटा जाए।

कांग्रेस नेता शशि थरूर की अध्यक्षता वाली संसदीय स्थायी समिति द्वारा तैयार की गई 'भारत-बांग्लादेश संबंधों का भविष्य' शीर्षक वाली रिपोर्ट गुरुवार को संसद में पेश की गई। रिपोर्ट में कहा गया है, "समिति ने गौर किया है कि बांग्लादेश की पूर्व PM शेख हसीना का भारत में रहना... इस संबंध में भारत का दृष्टिकोण, गंभीर संकट या अस्तित्व के खतरे का सामना कर रहे व्यक्तियों को शरण देने की उसकी सभ्यतागत नैतिकता और मानवीय परंपरा से निर्देशित है।"

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