बेंगलुरु (Bengaluru) : बेंगलुरु में मेट्रो और बढ़ाई जाएगी। चौथे फेज के तहत करीब 215 किलोमीटर लंबी नई मेट्रो लाइनें बनाने का प्रस्ताव तैयार किया गया है। इस प्लान में सबसे ज्यादा जोर शहर से बाहर के इलाकों को मेट्रो से जोड़ने पर है, ताकि दूर से आने वाले लोगों का सफर आसान हो सके। वहीं शहर के अंदर के कई जरूरी रूट अब भी सिर्फ कागजों पर ही हैं और उन पर काम शुरू नहीं हो पाया है।
Moneycontrol की रिपोर्ट के अनुसार, फेज-4 में बाहरी इलाकों को आगे रखा गया है, वहीं सिटी सेंटर के लिए सोचे गए कॉरिडोर पीछे छूट गए हैं। इससे सवाल उठ रहा है कि शहर के अंदर बढ़ते ट्रैफिक का क्या होगा।
दूर-दराज के इलाकों को मिलेगी मेट्रो कनेक्टिविटी
फेज-4 का मुख्य मकसद बाहरी इलाकों में रहने वाले लोगों को अच्छी पब्लिक ट्रांसपोर्ट सुविधा देना है। नए रूट बनने से दूर से आने-जाने वाले लोगों का रोज का सफर आसान हो सकता है। बेंगलुरु तेजी से फैल रहा है और आबादी भी बढ़ रही है, इसलिए बाहरी इलाकों में मेट्रो की मांग लगातार बढ़ रही है।
शहर के अंदर के रूट क्यों लटके हैं?
बेंगलुरु के कॉम्प्रिहेंसिव मोबिलिटी प्लान में शहर के अंदर कई मेट्रो रूट तय किए गए थे। इनमें इनर रिंग रोड पर बनने वाला पूरा अंडरग्राउंड कॉरिडोर भी शामिल था। लेकिन इन रूटों पर अब तक कोई खास काम नहीं हुआ है। दूसरी तरफ सरकार शहर के अंदर जाम से निपटने के लिए टनल रोड और फ्लाईओवर जैसे प्रोजेक्ट्स पर ज्यादा ध्यान दे रही है।
क्या मेट्रो से कम होगा ट्रैफिक का दबाव?
बेंगलुरु में ट्रैफिक जाम सबसे बड़ी समस्या है। मेट्रो, टनल रोड और फ्लाईओवर जैसे प्रोजेक्ट्स से कितनी राहत मिलेगी, यह उनके रूट और सही तरीके से बनने पर निर्भर करेगा।
फेज-4 में बाहरी इलाकों को तो फायदा मिलेगा, लेकिन शहर के अंदर के इनर रिंग कॉरिडोर जैसे रूटों का क्या होगा, इस पर ही बेंगलुरु की आगे की कनेक्टिविटी टिकी है।