'मैं जवाब से संतुष्ट नहीं हूं' विधानसभा में अपनी ही सरकार के स्वस्थ्य मंत्री पर BJP विधायक मैथिली ठाकुर ने उठाए सवाल

बिहार विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान मैथिली ठाकुर ने कहा कि उनके क्षेत्र का अस्पताल भवन इतना जर्जर है कि कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। उन्होंने बताया कि छत से प्लास्टर गिरता रहता है, दीवारों में गहरी दरारें हैं और बरसात में वार्ड में पानी टपकता है

अपडेटेड Feb 10, 2026 पर 2:48 PM
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विधानसभा में अपनी ही सरकार के स्वस्थ्य मंत्री पर BJP विधायक मैथिली ठाकुर ने उठाए सवाल

बिहार विधानसभा के बजट सत्र में सोमवार को एक बार फिर सरकारी अस्पतालों की खराब हालत का मुद्दा उठा। इस बार यह सवाल नई विधायक मैथिली ठाकुर ने उठाया। उन्होंने अपने क्षेत्र के सरकारी अस्पताल की जर्जर हालत को लेकर स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडे से सवाल किया। मंत्री के जवाब से संतुष्ट न होने पर उन्होंने दोबारा कड़ा सवाल पूछा।

इस पूरी बहस का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया। इसमें देखा गया कि एक नई विधायक अपनी ही पार्टी के मंत्री से सीधे सवाल कर रही हैं। मैथिली ठाकुर मिथिलांचल की मशहूर लोक गायिका हैं। उन्होंने नवंबर में अलीनगर से बीजेपी के टिकट पर पहला चुनाव जीता था। उन्होंने कहा कि वे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से प्रेरित होकर राजनीति में आई हैं।

प्रश्नकाल के दौरान मैथिली ठाकुर ने कहा कि उनके क्षेत्र का अस्पताल भवन इतना जर्जर है कि कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। उन्होंने बताया कि छत से प्लास्टर गिरता रहता है, दीवारों में गहरी दरारें हैं और बरसात में वार्ड में पानी टपकता है।


उन्होंने कहा कि इतनी खराब हालत के बावजूद उसी इमारत में मरीजों का इलाज हो रहा है। गर्भवती महिलाओं को भर्ती किया जाता है और बच्चों को भी वहीं रखा जाता है, जो लोगों की जान के लिए खतरा है।

मैथिली ठाकुर ने कहा, “मैं इस जवाब से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हूं। लिखा हुआ है कि बिल्डिंग खराब नहीं है, सिर्फ मरम्मत की जरूरत है। लेकिन मैं खुद वहां जाकर देख चुकी हूं, हालत बहुत खराब है।”

उन्होंने आगे कहा कि अस्पताल एक छोटे से कमरे में चल रहा है। वहां कोई MBBS डॉक्टर नहीं है। पहले दो डॉक्टर थे, लेकिन अब कोई नहीं है।

विधायक ने सवाल उठाया कि जब सरकार हर साल स्वास्थ्य बजट बढ़ा रही है, तो फिर अस्पतालों की इमारतें इतनी खराब क्यों हैं। उन्होंने कहा कि डॉक्टरों और दवाइयों की कमी तो समस्या है ही, लेकिन उससे भी बड़ा खतरा जर्जर इमारतें हैं, जो कभी भी गिर सकती हैं।

उन्होंने सदन से पूछा कि क्या सरकार किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रही है, तभी नए भवन बनाए जाएंगे?

मैथिली ठाकुर ने कहा, “मैं मंत्री पर सवाल नहीं उठा रही हूं, बस उनसे निवेदन कर रही हूं। मैं उन्हें बहुत पहले से मंत्री के रूप में देखती आ रही हूं और उनके काम को भी देखा है। इसलिए चाहती हूं कि वे जनता के हित में इस समस्या का समाधान करें।”

जवाब में स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि सरकार अस्पताल भवनों की स्थिति को लेकर गंभीर है। कई अस्पतालों के लिए नए भवन मंजूर किए गए हैं और कुछ जगहों पर निर्माण चल रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि जो इमारतें बहुत ज्यादा जर्जर हैं, उन्हें चिन्हित किया गया है और चरणबद्ध तरीके से उनकी मरम्मत या पुनर्निर्माण किया जाएगा।

लेकिन मंत्री का जवाब भी मैथिली ठाकुर को संतुष्ट नहीं कर सका। उन्होंने तुरंत कहा कि उनके क्षेत्र का अस्पताल कई सालों से सूची में है, लेकिन अब तक न तो मरम्मत शुरू हुई है और न ही नए भवन का निर्माण।

उन्होंने कहा कि हर साल सिर्फ योजना और मंजूरी की बात होती है, लेकिन जमीनी हकीकत वही की वही रहती है। मरीज और उनके परिवार डर के माहौल में इलाज कराने को मजबूर हैं।

मैथिली ठाकुर के बार-बार सवाल उठाने से सदन का माहौल कुछ देर के लिए गरम हो गया। विपक्षी विधायकों ने मेज थपथपाकर समर्थन किया, जबकि सत्तापक्ष के कुछ सदस्य असहज नजर आए।

आखिरकार स्पीकर को हस्तक्षेप कर चर्चा को आगे बढ़ाना पड़ा। जैसे ही इस बहस का वीडियो सोशल मीडिया पर आया, वह तेजी से फैल गया।

लोगों ने विधायक की तारीफ की और कहा कि उन्होंने एक बेहद गंभीर और जमीनी मुद्दा मजबूती से उठाया है। बिहार के कई जिलों में सरकारी अस्पतालों की हालत बहुत खराब है। लोगों को उम्मीद है कि बजट सत्र में यह मुद्दा उठने से अब इस पर कार्रवाई होगी।

कई लोगों ने यह भी लिखा कि जर्जर अस्पताल भवन सिर्फ बिहार ही नहीं, बल्कि देश के कई राज्यों की बड़ी समस्या हैं, लेकिन अक्सर इस पर ध्यान नहीं दिया जाता।

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