ममता बनर्जी नहीं दे रही थीं इस्तीफा, राज्यपाल ने भंग कर दी पश्चिम बंगाल की विधानसभा

ममता बनर्जी ने हार मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव में बड़े स्तर पर धांधली हुई और जनता का जनादेश “छीन लिया गया। पश्चिम बंगाल विधानसभा का पांच साल का कार्यकाल गुरुवार रात खत्म हो रहा था। ऐसे में संवैधानिक नियमों के तहत विधानसभा को भंग करना जरूरी था, ताकि कोई कानूनी संकट न पैदा हो।

अपडेटेड May 07, 2026 पर 9:04 PM
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ममता बनर्जी नहीं दे रही थीं इस्तीफा, राज्यपाल ने भंग कर दी पश्चिम बंगाल की विधानसभा

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल आरएन रवि ने गुरुवार रात विधानसभा भंग करने का आदेश जारी कर दिया। यह फैसला ऐसे समय आया, जब मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने चुनाव हारने के बावजूद इस्तीफा देने से इनकार कर दिया था। 2026 पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने बड़ी जीत हासिल की। बीजेपी को 207 सीट मिलीं, जबकि TMC 80 सीटों पर सिमट गई। बहुमत के लिए 148 सीट चाहिए थीं, यानी भाजपा को साफ जनादेश मिला।

सबसे बड़ा झटका ममता बनर्जी को लगा, जो अपनी पारंपरिक भवानीपुर सीट से बीजेपी के सुवेंदु अधिकारी से 15,000 से ज्यादा वोटों से हार गईं। लेकिन इसके बावजूद ममता बनर्जी ने हार मानने से इनकार कर दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव में बड़े स्तर पर धांधली हुई और जनता का जनादेश “छीन लिया गया। उन्होंने कहा कि मेरे इस्तीफे का सवाल ही नहीं बनता, क्योंकि हम हारे नहीं, हमें हराया गया है।

राज्यपाल ने विधानसभा क्यों भंग की?


पश्चिम बंगाल विधानसभा का पांच साल का कार्यकाल गुरुवार रात खत्म हो रहा था। ऐसे में संवैधानिक नियमों के तहत विधानसभा को भंग करना जरूरी था, ताकि कोई कानूनी संकट न पैदा हो।

एक आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी कर पश्चिम बंगाल विधानसभा को भंग कर दिया गया है। आदेश के मुताबिक, भारतीय संविधान के अनुच्छेद 174 के तहत 7 मई 2026 से विधानसभा को भंग माना जाएगा।

यह फैसला राज्यपाल आरएन रवि के निर्देश पर लागू किया गया है।

जारी नोटिफिकेशन में कहा गया है कि मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला ने राज्यपाल के आदेश पर यह नोटिफिकेशन जारी किया।

इस फैसले के बाद मौजूदा विधानसभा का कार्यकाल औपचारिक रूप से खत्म हो गया है और अब राज्य में नई सरकार गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।

विधानसभा भंग होने के बाद पश्चिम बंगाल की पूरी राजनीतिक स्थिति बदल गई है।

राज्यपाल के इस फैसले के बाद:

  • सभी 294 विधायकों की सदस्यता खत्म मानी जाएगी।
  • मौजूदा मंत्रिमंडल की संवैधानिक स्थिति भी समाप्त हो गई है।
  • अब राज्य में या तो राष्ट्रपति शासन लग सकता है या फिर सबसे बड़ी पार्टी BJP को अंतरिम सरकार बनाने के लिए बुलाया जा सकता है।

इधर बीजेपी ने ममता बनर्जी के इस्तीफा न देने के फैसले को लोकतंत्र का मजाक बताया है। सुवेंदु अधिकारी, जिन्हें मुख्यमंत्री पद का सबसे बड़ा दावेदार माना जा रहा है, ने कहा कि बंगाल की जनता ने बदलाव के लिए साफ जनादेश दिया है।

BJP नेताओं का कहना है कि विधानसभा का कार्यकाल खत्म होने के बाद ममता बनर्जी कानूनी तौर पर अब न विधायक हैं और न ही मुख्यमंत्री पद पर बने रहने का अधिकार रखती हैं।

एक वरिष्ठ भाजपा नेता ने कहा, “वह इस्तीफा दें या न दें, कानून के हिसाब से अब उनकी सरकार का कार्यकाल खत्म हो चुका है।”

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