बिहार में सरकारी बंगले को लेकर सियासी विवाद और गहरा गया है। मंगलवार को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि सरकारी आवास किसी की निजी संपत्ति नहीं होते और पद छोड़ने के बाद उन्हें खाली कर देना चाहिए। उनके इस बयान के बाद पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी के सरकारी आवास को लेकर चल रही राजनीतिक बहस और तेज हो गई है।
सम्राट चौधरी का बड़ा बयान
सम्राट चौधरी ने इस मुद्दे पर पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री पद छोड़ने के बाद सरकारी आवास खाली कर लोकतांत्रिक परंपराओं का पालन किया था। उन्होंने आगे कहा, "यह लोकतंत्र है, राजतंत्र नहीं। सरकारी बंगले किसी की बपौती नहीं हैं। पद छोड़ने के बाद सरकारी आवास खाली कर देना चाहिए।" उनके इस बयान को विपक्ष पर सीधा निशाना माना जा रहा है, क्योंकि राबड़ी देवी के सरकारी आवास को लेकर पहले से ही राजनीतिक विवाद चल रहा है।
सम्राट चौधरी ने अपने राजनीतिक विरोधियों पर परोक्ष रूप से निशाना साधते हुए कहा कि कुछ नेताओं को सरकारी आवासों से इतना लगाव हो जाता है कि वे अपने परिवार के अलग-अलग सदस्यों के लिए भी अलग-अलग सरकारी घरों की मांग करने लगते हैं। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक पद पर रहने वाले लोगों को सरकारी सुविधाओं को अपना अधिकार नहीं समझना चाहिए। मुख्यमंत्री ने कहा, "जिस दिन मेरी पार्टी और मेरे नेता कह देंगे कि अब मेरी जरूरत नहीं है, मैं 24 घंटे के भीतर सरकारी बंगला खाली कर दूंगा और अपने निजी घर में रहने चला जाऊंगा।" उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में पद और उससे जुड़ी सुविधाएं स्थायी नहीं होतीं। इसलिए पद छोड़ने के बाद सरकारी आवास खाली करना हर जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी है।
राबड़ी देवी ने इस मुद्दे पर अपना रुख साफ कर दिया है। उन्होंने कहा कि वह अपनी इच्छा से सरकारी आवास खाली नहीं करेंगी। सरकारी बंगले को लेकर विवाद उस समय और बढ़ गया, जब राबड़ी देवी ने कहा कि अगर बिहार सरकार को यह आवास वापस चाहिए, तो उसे उन्हें वहां से "जबरन हटाना" होगा। उनका कहना था कि वह स्वेच्छा से बंगला खाली करने वाली नहीं हैं।
आरजेडी ने खोला सरकार ने खिलाफ मोर्चा
राबड़ी देवी के इस बयान के बाद राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने भी सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। पार्टी ने आरोप लगाया कि राज्य की एनडीए सरकार राजनीतिक विरोधियों को निशाना बना रही है और चुनिंदा लोगों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। आरजेडी नेताओं का कहना है कि सरकार इस मामले का राजनीतिक फायदा उठाने की कोशिश कर रही है, जबकि सत्ता पक्ष इन आरोपों को खारिज कर रहा है। इससे सरकारी आवास को लेकर शुरू हुआ विवाद अब एक बड़े राजनीतिक मुद्दे का रूप लेता दिख रहा है।
राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने सोशल मीडिया पर एक विस्तृत पोस्ट जारी कर सरकारी आवासों को लेकर सरकार की नीति और रवैये पर सवाल उठाए। आरजेडी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री बनने के बाद सम्राट चौधरी ने अपने आधिकारिक आवास परिसर का विस्तार कराया है। पार्टी का दावा है कि मुख्यमंत्री आवास '1 एणे मार्ग' के आसपास स्थित कई सरकारी बंगलों को इस परिसर में शामिल कर लिया गया है।
आरजेडी के अनुसार, इस विस्तार के बाद मुख्यमंत्री आवास परिसर का कुल क्षेत्रफल करीब 15 एकड़ तक पहुंच गया है। पार्टी ने सवाल उठाया कि जब सरकार दूसरों के सरकारी आवासों को लेकर सख्त रुख अपना रही है, तो मुख्यमंत्री आवास के विस्तार पर भी जवाब देना चाहिए। इन आरोपों के बाद सरकारी बंगलों को लेकर बिहार की राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप का दौर और तेज हो गया है।