'बर्फ को चीरकर दौड़ेगी बुलेट जैसी ट्रेन!' 5,256 मीटर ऊंचे स्टेशन से लेह पहुंचेगी भारतीय रेल, जानें इस मेगा प्रोजेक्ट का पूरा प्लान

Bilaspur-Manali-Leh Railway Line: भारत ₹1.31 लाख करोड़ की लागत से 489 किमी लंबी बिलासपुर-मनाली-लेह रेल लाइन बना रहा है। इसमें तंगलांग ला के पास 5,256 मीटर की ऊंचाई पर दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे स्टेशन बनेगा, जो चीन के तंगगुला स्टेशन को पछाड़ देगा। 270 किमी लंबी सुरंगों से गुजरते हुए यह ट्रेन सुंदरनगर, मनाली और केलांग होते हुए लेह पहुंचेगी। गेम-चेंजर साबित होने वाले इस रोमांचक ट्रेन रूट की की पूरी डिटेल्स जानिए

अपडेटेड Nov 04, 2026 पर 3:50 PM
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यह रेलवे लाइन हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर को सीधे लद्दाख के लेह शहर से जोड़ेगी

Bilaspur-Manali-Leh Railway Line: भारतीय रेल जल्द ही एक ऐसा ऐतिहासिक रिकॉर्ड अपने नाम करने जा रही है, जो दुनिया में बुनियादी ढांचे की मिसाल बनेगा। हिमालय के सीने को चीरते हुए प्रस्तावित 489 किलोमीटर लंबी बिलासपुर-मनाली-लेह रेलवे लाइन पर काम तेजी से आकार ले रहा है।

इस महत्वाकांक्षी मेगा प्रोजेक्ट के तहत समुद्र तल से 5,256 मीटर से अधिक की ऊंचाई पर एक ऐसा रेलवे स्टेशन बनाया जाएगा, जो दुनिया का सबसे ऊंचा रेलवे स्टेशन होगा। यह रेल लाइन न केवल भारतीय नागरिकों और पर्यटकों के लिए लद्दाख पहुंचने का नजरिया बदल देगी, बल्कि सामरिक और सैन्य दृष्टि से भी भारत के लिए एक बड़ा गेम-चेंजर साबित होगी।

चीन के तंगगुला स्टेशन का टूटेगा रिकॉर्ड


इस मेगा प्रोजेक्ट का सबसे बड़ा आकर्षण तंगलांग ला के पास प्रस्तावित रेलवे स्टेशन है। 5,256 मीटर की ऊंचाई पर बनने वाला यह स्टेशन चीन के नाम दर्ज मौजूदा रिकॉर्ड को तोड़ देगा। चीन का 'तंगगुला रेलवे स्टेशन' 5,068 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है।

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ट्रेन यात्रियों को विशाल हिमालयी चोटियों, बर्फ से ढकी घाटियों और दुनिया की कुछ सबसे लंबी सुरंगों के बीच से गुजरने का अनोखा अहसास कराएगी।

489 किमी का रूट: सुंदरनगर से लेह तक का सफर

यह रेलवे लाइन हिमाचल प्रदेश के बिलासपुर को सीधे लद्दाख के लेह शहर से जोड़ेगी। इस 489 किलोमीटर लंबे ट्रैक पर पश्चिमी हिमालय के कई बेहद खूबसूरत और चुनौतीपूर्ण इलाके आएंगे।

ट्रेन सुंदरनगर, मंडी, मनाली, सिस्सू, दारचा, केलांग, सरचू, पांग, रुमत्से, उपशी और खारू जैसे प्रमुख रेलवे स्टेशन्स से होते हुए यह लेह पहुंचेगी।

सड़क मार्ग से जाने वाले बाइकर्स और यात्रियों के लिए ये सभी नाम बेहद लोकप्रिय हैं, लेकिन अब इन कठिन रास्तों पर ट्रेन से जाना संभव होगा।

55% से ज्यादा हिस्सा सुरंगों से गुजरेगा: ₹1.31 लाख करोड़ की लागत

हिमालय के बेहद कठिन और ढलानदार इलाकों को देखते हुए इस रेल नेटवर्क का एक बड़ा हिस्सा सुरंगों के भीतर से गुजरेगा। लगभग 489 किमी लंबे इस पूरे रेल कॉरिडोर में से करीब 270 किलोमीटर का हिस्सा यानी 55% से अधिक मार्ग सुरंगों के अंदर होगा।

अत्यधिक ठंड, कम ऑक्सीजन और कठिन भू-भाग में ट्रेन संचालन के लिए विशेष वातानुकूलित कोच और प्रेसराइज्ड की व्यवस्था की जाएगी। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर लगभग ₹1.31 लाख करोड़ खर्च होने का अनुमान जताया गया है।

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