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'अगर चाहें तो जोर-जबरदस्ती कर लें', राबड़ी देवी ने 10 सर्कुलर रोड वाला घर खाली करने से किया इनकार

Rabri Devi : 10 सर्कुलर रोड स्थित यह सरकारी बंगला करीब 20 वर्षों से राबड़ी देवी और लालू प्रसाद यादव का निवास रहा है। यह सिर्फ एक आवास ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की राजनीति का एक महत्वपूर्ण केंद्र भी माना जाता है। मुख्यमंत्री आवास के बिल्कुल पास होने की वजह से बिहार की राजनीति में इस पते की खास पहचान रही है

MoneyControl Newsअपडेटेड May 31, 2026 पर 7:32 PM
'अगर चाहें तो जोर-जबरदस्ती कर लें', राबड़ी देवी ने 10 सर्कुलर रोड वाला घर खाली करने से किया इनकार
बिहार में एक नया राजनीतिक विवाद सामने आया है।

बिहार में एक नया राजनीतिक विवाद सामने आया है। राज्य की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने सरकार की ओर से कई बार नोटिस मिलने के बावजूद पटना के 10 सर्कुलर रोड स्थित सरकारी आवास खाली करने से इनकार कर दिया है। बिहार भवन निर्माण विभाग ने यह सरकारी बंगला डेयरी एवं मत्स्य पालन मंत्री नंद किशोर राम को आवंटित कर दिया है। वहीं राबड़ी देवी, जो वर्तमान में विधान परिषद में विपक्ष की नेता हैं, को पिछले साल नवंबर में 39 हार्डिंग रोड स्थित एक अन्य सरकारी आवास दिया गया था। विभाग ने उन्हें वहां स्थानांतरित होने के निर्देश दिए हैं और हाल ही में जारी नोटिस में 15 दिनों के भीतर वर्तमान बंगला खाली करने को कहा है।

हालांकि, राबड़ी देवी ने स्पष्ट कर दिया है कि वह स्वेच्छा से यह आवास नहीं छोड़ेंगी। उनका कहना है कि यदि सरकार उन्हें हटाना चाहती है तो पुलिस बल का इस्तेमाल कर सकती है, लेकिन वह खुद से बंगला खाली नहीं करेंगी।

सरकारी बंगले पर छिड़ी सियासत

10 सर्कुलर रोड स्थित यह सरकारी बंगला करीब 20 वर्षों से राबड़ी देवी और लालू प्रसाद यादव का निवास रहा है। यह सिर्फ एक आवास ही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय जनता दल (राजद) की राजनीति का एक महत्वपूर्ण केंद्र भी माना जाता है। मुख्यमंत्री आवास के बिल्कुल पास होने की वजह से बिहार की राजनीति में इस पते की खास पहचान रही है। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार का कहना है कि राबड़ी देवी को कई महीने पहले ही दूसरा सरकारी आवास आवंटित कर दिया गया था। इसके बावजूद वह निर्धारित समय के बाद भी पुराने बंगले में रह रही हैं। दूसरी तरफ, राजद नेताओं ने इस कार्रवाई का विरोध किया है। उनका आरोप है कि यह फैसला राजनीतिक कारणों से लिया गया है। राजद का कहना है कि विधानसभा चुनाव से पहले यादव परिवार को निशाना बनाने और राजनीतिक दबाव बनाने के उद्देश्य से यह कदम उठाया गया है।

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