भारत में नीली क्रांति-अमरीकी टैरिफ के बावजूद भारतीय सी फूड का निर्यात तेजी से बढ़ा

भारत के समुद्री खाद्य क्षेत्र ने रणनीति बदली, नियमों को सुदृढ़ किया होकर दुनिया के दूसरे मुल्कों के बाजारों के साथ जुडे। इससे अमरीकी टैरिफ के झटके जैसे बाहरी व्यवधानों को प्रभावी ढंग से कम करने में मोदी सरकार सफल रही। नतीजा ये रहा कि लगातार निर्यात वृद्धि हुई और भारत बढ़ी हुई वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भी खुद को ढालने में सफल रहा। फ्रोजन झींगा यानि श्रीम्प मुख्य विकास का मुख्य आधार बना रहा, जिसने कुल निर्यात आय के दो-तिहाई से अधिक का योगदान करते हुए ₹47,973.13 करोड़ (5.51 बिलियन अमेरिकी डॉलर) का योगदान दिया

अपडेटेड Apr 27, 2026 पर 4:01 PM
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अमरीकी टैरिफ की जोरदार मार झेलने के बावजुद भी भारत के सी फूड उद्योग कमाल कर रह है। ( प्रतिकात्मक तस्वीर)

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 2047 में विकसित भारत बनाने के लक्ष्य को पूरे करने में भारत का मत्स्य उद्योग एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा था कि देश का मछली पालन और निर्यात का उद्योग न सिर्फ रोजगार के अवसर बढा रहा है बल्कि देश के विकास में भी इसका एक बड़ा रोल है। पीएम मोदी के इसी सपने को पूरा करने के लिए इस उध्योग के आधुनीकिकरण पर सरकार ने पूरा जोर लगा दिया है। मछली पालन से लेकर सीफूड के निर्यात तक के काम के नयी तकनीक से जोड़कर ऐसा माहौल बनाया गया है कि अमरीकी टैरिफ की जोरदार मार झेलने के बावजुद भी भारत के सी फूड यानि समुद्री खाद्य निर्यात ने उल्लेखनीय सुदृढ़ता का परिचय दिया है। अमेरिकी टैरिफ के 58.26% तक बढ़ने के बावजूद, निर्यात मूल्य वित्त वर्ष 2024-25 के ₹62,408 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2025-26 में ₹72,325.82 करोड़ तक पहुंच गया है।

भारत के समुद्री खाद्य क्षेत्र ने रणनीति बदली, नियमों को सुदृढ़ किया होकर दुनिया के दूसरे मुल्कों के बाजारों के साथ जुडे। इससे अमरीकी टैरिफ के झटके जैसे बाहरी व्यवधानों को प्रभावी ढंग से कम करने में मोदी सरकार सफल रही। नतीजा ये रहा कि लगातार निर्यात वृद्धि हुई और भारत बढ़ी हुई वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भी खुद को ढालने में सफल रहा। फ्रोजन झींगा यानि श्रीम्प मुख्य विकास का मुख्य आधार बना रहा, जिसने कुल निर्यात आय के दो-तिहाई से अधिक का योगदान करते हुए ₹47,973.13 करोड़ (5.51 बिलियन अमेरिकी डॉलर) का योगदान दिया।

अमरीकी बाजार में गिरावट के बाद चीन, ईयू, दक्षिण पूर्व एशिया में बाजार तलाशे गए


एक सरकारी आंकड़े के मुताबिक अमेरिका को सी फूड के निर्यात में मात्रा में 19.8% की गिरावट आई, जबकि मूल्य में 14.5% की गिरावट आई। इस गिरावट की भरपाई चीन, यूरोपीय संघ और दक्षिण पूर्व एशियाई देशों जैसे अन्य गैर-अमेरिकी बाजारों मे की गयी। यूरोपीय संघ ने भी महत्वपूर्ण विस्तार दर्ज किया, जिसमें मूल्य में 37.9% से अधिक और मात्रा में 35.2% की वृद्धि हुई। दक्षिण पूर्व एशिया को निर्यात मूल्य में 36.1% और मात्रा में 28.2% बढ़ा। जापान को निर्यात, मूल्य के आधार, पर 6.55% बढ़ा। वित्तीय वर्ष के अंत में क्षेत्र में उथल-पुथल के कारण पश्चिम एशिया में 0.55% की मामूली गिरावट देखी गई। उत्पाद पक्ष पर, फ्रोजन मछली, स्क्विड, कटलफिश, सूखे आइटम और जीवित उत्पादों के निर्यात में खासी तेजी देखी गई, जबकि ठंडी वस्तुओं (चिल्लड़ प्रोडक्ट्स) में गिरावट आई। सुरमयी, फिश मील और मछली के तेल के निर्यात में बेहतर प्रदर्शन दर्ज किया गया।

अप्रैल 2025 से, अमेरिका ने भारतीय सी फूड, विशेष रूप से झींगा पर भारी टैरिफ वृद्धि लागू किया । ये अमेरिका को निर्यात का 90% हिस्सा था। इसके बावजूद, भारत के समुद्री खाद्य क्षेत्र ने अपनी मजबूती दिखाई। एमपीईडीए और सीफूड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के मुताबिक भारतीय झींगा निर्यात पर वर्तमान टैरिफ 10% है, साथ ही 5.77% का काउंटरवेलिंग ड्यूटी और 3.88% का एंटी-डंपिंग ड्यूटी है, जिससे कुल प्रभावी ड्यूटी 19.65% हो जाता है। वित्त वर्ष 2025 -26 में समुद्री उत्पादों का निर्यात मुल्य लगभग 62,408 करोड़ रुपये से बढ़कर लगभग 72,326 करोड़ रुपये हो गया। निर्यात की मात्रा 16.98 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 19.32 लाख मीट्रिक टन हो गई। झींगे के शिपमेंट की मात्रा में 4.6% और मूल्य में 6.35% की वृद्धि हुई। दक्षिण पूर्व एशिया के देशों जैसे वियतनाम, थाईलैंड, मलेशिया के साथ चीन और यूरोपीय संघ सहित प्रमुख बाजारों में मजबूत वृद्धि देखी गई।

बाजार का विविधीकरण और विस्तार:

भारत सरकार ने निर्यात रुझानों, बाजार व्यवहार और विविधीकरण रणनीतियों की निरंतर निगरानी के साथ-साथ निर्यातकों, राज्य सरकारों और अन्य स्टेकहोल्डरों के साथ जुड़ाव सहित सक्रिय उपाय किए। वैश्विक स्तर पर 211 नए निर्यात प्रतिष्ठानों यूरोपीय संघ, यूके, चीन, रूस, ब्राजील को मंजूरी दी गई है, जिससे भारत के निर्यात में वृद्धि हुई है। केंद्रित राजनयिक और व्यापारिक पहुंच ने वैकल्पिक बाजारों में विविधीकरण को सक्षम किया है। केन्द्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह ललन के नेतृत्व मे मत्स्य पालन मंत्रालय ने 39 देशों के राजदूतों/उच्चायुक्तों के साथ एक गोलमेज सम्मेलन 21 जनवरी 2026 दिल्ली में आयोजित किया गया, जिससे समुद्री खाद्य व्यापार, स्थिरता और उभरते क्षेत्रों में वैश्विक भागीदारी को और मजबूत किया गया।

भारत ने अनुपालन और सस्टेनेबिलिटी को काफी मजबूत किया है, जिसमें शामिल हैं: मत्स्य पालन मंत्रालय द्वारा निर्यात के लिए होने वाले मत्स्य पालन के लिए ईईजेड नियम, 2025 की अधिसूचना जारी की गयी। साथ ही राष्ट्रीय ट्रेसबिलिटी फ्रेमवर्क शुरु किया गया। एंटीबायोटिक और अवशेष नियंत्रण को मजबूत किया गया और सी फूड के निर्यात के लिए जरुरी झींगा ट्रॉल में अनिवार्य टर्टल एक्सक्लूडर डिवाइस (टीईडी) का प्रावधान भी किया गया।

आगे की राह-कीमतों पर नजर रखना और ब्रांडिग पर जोर

उच्च विकास वाले बाजारों जैसे आसियान के देशों जैसे वियतनाम, थाईलैंड और मलेशिया , यूरोपीय संघ और चीन में पैठ को गहरा करने के लिए, प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने के लिए मूल्य संवर्धन और ब्रांडिंग को बढ़ाने जैसे लक्ष्य मोदी सरकार ने निर्धारित किए हैं। साथ ही मत्स्य विभाग के कैबिनेट मंत्री राजीव रंजन सिंंह ललन ने इस विभाग से जुडे तमाम स्टेक होल्डरों को साफ कर दिया है कि वैश्विक मानकों को पूरा करने और दीर्घकालिक स्थिति को मजबूत करने के लिए एक सस्टेनिबिलिटी आधारित बाजार पहुंच की रणनीति जारी रखी जानी चाहिए।

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