DPS द्वारका को मिली बम से उड़ाने की धमकी, खाली कराया गया स्कूल, तलाशी जारी

Bomb Threat: DPS द्वारका को सोमवार, 18 अगस्त को बम से उड़ाने की धमकी मिली। इसके बाद एहतियात के तौर पर स्कूल परिसर को खाली करा लिया गया। दिल्ली फायर सर्विस के अनुसार, पुलिस टीम और बम निरोधक दस्ते मौके पर पहुंच गए हैं और तलाशी अभियान चलाया जा रहा है

अपडेटेड Aug 18, 2025 पर 8:56 AM
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इससे पहले जुलाई में भी दिल्ली के द्वारका में कई स्कूलों को बम की धमकी मिली थी

DPS Dwarka: द्वारका के दिल्ली पब्लिक स्कूल (DPS) को सोमवार, 18 अगस्त को बम से उड़ाने की धमकी मिली। इसके बाद एहतियात के तौर पर स्कूल परिसर को खाली करा लिया गया। दिल्ली फायर सर्विस के अनुसार, पुलिस टीम और बम निरोधक दस्ते मौके पर पहुंच गए हैं और तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। दिल्ली पुलिस की टीम भी जांच में जुट गई है।

इससे पहले जुलाई में भी दिल्ली के द्वारका में कई स्कूलों को बम की धमकी मिली थी। पुलिस के मुताबिक, यह धमकी एक ही ईमेल एड्रेस से आई थी और शहर के पांच स्कूलों को इसकी कॉपी भेजी गई थी। जिन स्कूलों को धमकी मिली थी उनमें द्वारका के सेक्टर 19 के पास सेंट थॉमस स्कूल, दिल्ली इंटरनेशनल स्कूल एज (सेक्टर 18ए), सेंट्रल एकेडमी स्कूल (सेक्टर 10), जीडी गोयनका स्कूल (सेक्टर 17) और मॉडर्न इंटरनेशनल स्कूल (सेक्टर 19) शामिल थे।

बेंगलुरु के 40 स्कूलों को भी मिला था धमकी भरा ईमेल


जुलाई महीने में बेंगलुरु के लगभग 40 प्राइवेट स्कूलों को भी बम की धमकी वाला ईमेल भेजा गया था। धमकी भरा ईमेल 'roadkill333@atomicmail.io' आईडी से आया था। उस ईमेल में लिखा था, 'हेलो, मैं आपको यह बताने के लिए लिख रहा हूं कि मैंने स्कूल की कक्षाओं में कई विस्फोटक उपकरण (ट्रिनिट्रोटोलुइन) रखे हैं।' मैं आप सभी को इस दुनिया से मिटा दूंगा। एक भी आत्मा जीवित नहीं बचेगी। जब मैं खबर देखूंगा तो खुशी से हंसूंगा। केवल यह देखने के लिए कि माता-पिता स्कूल में आते हैं और उनका स्वागत उनके बच्चों के ठंडे, कटे-फटे शरीर से होता है।'

मैसेज में आगे कहा गया, 'आप सभी को कष्ट सहना चाहिए। मैं वास्तव में अपने जीवन से नफरत करता हूं, खबर आने के बाद मैं आत्महत्या कर लूंगा। मैं अपना गला और अपनी कलाई काट लूंगा। मेरी कभी सही मायने में मदद नहीं की गई।' लेटर में भेजने वाले ने अपनी मानसिक पीड़ा का जिक्र करते हुए लिखा, 'मनोचिकित्सक, मनोवैज्ञानिक को किसी की भी कभी परवाह नहीं थी, और किसी को भी कभी परवाह नहीं होगी। आप केवल असहाय और अनजान इंसानों को दवा देने की परवाह करते हैं। मनोचिकित्सक आपको कभी नहीं बताते कि वे दवाएं आपके अंगों को बर्बाद कर देती हैं या उनसे बदसूरत वजन बढ़ता है।'

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