लखनऊ में बुलडोजर एक्शन : जिस बिल्डिंग में 15 मौतें हुईं, उसे ढहाया जा रहा, अग्निकांड वाली बिल्डिंग पर LDA का एक्शन

22 जून को हुए भीषण अग्निकांड के 32 दिन बाद प्रशासन ने आखिरकार उस इमारत को गिराने का काम शुरू कर दिया। इस हादसे में 15 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद इमारत की मंजूरी, रिहायशी भवनों के व्यावसायिक इस्तेमाल और अग्नि सुरक्षा नियमों के पालन को लेकर कई गंभीर सवाल उठे थे। इमारत गिराने की कार्रवाई कड़ी सुरक्षा के बीच की गई। पूरे इलाके को सील कर दिया गया

अपडेटेड Jul 25, 2026 पर 7:00 PM
लखनऊ में बुलडोडर एक्शन : जिस बिल्डिंग में 15 मौतें हुईं, उसे ढहाया जा रहा

लखनऊ की उस तीन मंजिला इमारत में लगी भीषण आग को 32 दिन बीत चुके हैं, लेकिन हादसे की दर्दनाक यादें आज भी ताजा हैं। शनिवार को बुलडोजरों की गड़गड़ाहट के साथ उस इमारत को गिराने का काम शुरू हुआ, जहां आग लगने से 15 लोगों की जान चली गई थी। इमारत गिराने के दौरान पूरे इलाके को सील कर दिया गया और सुरक्षा के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया। जिस इमारत को नियमों के उल्लंघन और प्रशासनिक लापरवाही का प्रतीक माना जा रहा था, उसे एक-एक मंजिल और एक-एक दीवार तोड़कर ढहा दिया गया। हालांकि, इमारत गिरने के साथ एक बड़ा सवाल अब भी कायम है। जिस भवन के खिलाफ कथित अवैध निर्माण को लेकर पहले ही कार्रवाई हो चुकी थी, वह आखिर कैसे चलता रहा और प्रशासन ने समय रहते सख्त कदम क्यों नहीं उठाए, जिससे 15 लोगों की जान बचाई जा सकती थी?

अग्निकांड वाली बिल्डिंग पर LDA का एक्शन

22 जून को हुए भीषण अग्निकांड के 32 दिन बाद प्रशासन ने आखिरकार उस इमारत को गिराने का काम शुरू कर दिया। इस हादसे में 15 लोगों की मौत हुई थी। इसके बाद इमारत की मंजूरी, रिहायशी भवनों के व्यावसायिक इस्तेमाल और अग्नि सुरक्षा नियमों के पालन को लेकर कई गंभीर सवाल उठे थे। इमारत गिराने की कार्रवाई कड़ी सुरक्षा के बीच की गई। पूरे इलाके को सील कर दिया गया और किसी भी तरह की भीड़ या अव्यवस्था से बचने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया। प्रशासन ने भारी मशीनों की मदद से उस इमारत को ढहा दिया, जिसमें कोचिंग सेंटर और कई अन्य व्यावसायिक संस्थान चल रहे थे।


बिल्डिंग में 15 मौतें हुईं

22 जून को लगी भीषण आग ने देखते ही देखते पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया। आग इतनी तेजी से फैली कि कई लोग अंदर ही फंस गए। इस दर्दनाक हादसे में 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हुए। घटना के बाद लोगों में भारी नाराजगी देखने को मिली और इमारत में कथित नियमों के उल्लंघन की जांच शुरू कर दी गई। जांच में यह सवाल उठे कि क्या इमारत का निर्माण, नक्शा और इस्तेमाल अधिकारियों से मिली मंजूरी के अनुसार था। अधिकारियों का कहना है कि इमारत को रिहायशी उपयोग की मंजूरी मिली थी, लेकिन उसमें कोचिंग सेंटर और अन्य व्यावसायिक गतिविधियां चलाई जा रही थीं। इसी वजह से यह भी सवाल उठ रहे हैं कि क्या वहां आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम और आपातकालीन निकासी की सुविधाएं मौजूद थीं।

पहले नहीं हुई कार्रवाई

इस इमारत का पुराना रिकॉर्ड भी जांच का अहम हिस्सा बन गया है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, साल 2016 में कथित अवैध निर्माण को लेकर प्रशासन ने इस इमारत के खिलाफ कार्रवाई की थी। हालांकि, बाद में इसे गिराने का आदेश वापस ले लिया गया, जिसके बाद इमारत का इस्तेमाल जारी रहा। कई साल बाद यही इमारत लखनऊ के सबसे बड़े अग्निकांडों में से एक का केंद्र बन गई। आग लगने की घटना के बाद लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) ने इमारत के मालिकों को नोटिस जारी किया और भवन को गिराने का आदेश दिया। तय समय सीमा पूरी होने के बाद प्रशासन ने बुलडोजर चलाकर इमारत को ढहा दिया। इस पूरी कार्रवाई के बाद एक बार फिर अवैध निर्माण, रिहायशी इमारतों के व्यावसायिक इस्तेमाल और भवन सुरक्षा नियमों के पालन को लेकर प्रशासन की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।

इस दर्दनाक हादसे के बाद अब अधिकारियों की भूमिका और नियमों का पालन कराने में हुई कथित लापरवाही की भी जांच की जा रही है। जांच सिर्फ आग लगने के कारणों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भी देखा जा रहा है कि पहले कार्रवाई होने और कथित नियमों के उल्लंघन के बावजूद इमारत का इस्तेमाल आखिर कैसे जारी रहा। आग की घटना के मामले में इमारत के मालिकों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। जांच एजेंसियां यह पता लगा रही हैं कि कहीं लापरवाही या नियमों के उल्लंघन की वजह से 15 लोगों की मौत तो नहीं हुई। इमारत को ऐसे समय गिराया गया है, जब प्रशासन मंजूर नक्शे के विपरीत इस्तेमाल की जा रही इमारतों के खिलाफ बड़े स्तर पर अभियान चला रहा है। इस हादसे के बाद कई संस्थानों की जांच भी तेज कर दी गई है और नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई की जा रही है। हालांकि, जिन 15 लोगों ने इस हादसे में अपने परिजनों को खोया है, उनके लिए सिर्फ इमारत गिरा देना काफी नहीं है। उन्हें अब भी इस सवाल का जवाब चाहिए कि आखिर यह हादसा होने से पहले इसे क्यों नहीं रोका गया।

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