कैबिनेट की बैठक में 6,400 करोड़ रुपए के दो बड़े रेलवे प्रोजेक्ट्स को मंजूरी मिली है। इससे बिहार, झारखंड, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश को फायदा होगा। कैबिनेट की बैठक में पटना और रांची के बीच डबल रेलवे लाइन को भी मंजूरी मिली है। इनमें से पहला प्रोजेक्ट कोडरमा से बरकाकाना तक है। कोडरमा से बरकाकाना तक का ये प्रोजेक्ट 133 किमी लंबा प्रोजेक्ट है। कोडरमा प्रोजेक्ट से 938 गांव को फायदा होगा। इस प्रोजेक्ट के तहत पटना और रांची के बीच रेलवे लाइन डबल होगी।
इसके साथ ही बल्लारी से चिकजाजूर तक के 185 किलोमीटर लंबे प्रोजेक्ट को भी मंजूरी मिली है। बल्लारी से चिकजाजूर प्रोजेक्ट की लागत 3,342 करोड़ रुपए है। इन परियोजनाओं से बिहार, झारखंड, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश को फायदा होगा।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव का कहना है कि यह प्रोजेक्ट अगले तीन साल में पूरे हो जाएंगे। इस योजना से भारतीय रेलवे नेटवर्क में 318 किलोमीटर का विस्तार होगा। ये दोनों लाइनें यात्री और माल ढुलाई में अहम भूमिका निभाएंगी। इससे रेलवे क परिचालन दक्षता में बढ़त के साथ ही कार्बन उत्सर्जन को काफी कमी आएगी।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा, "ये दोनों प्रोजेक्ट्स कनेक्टिविटी में सुधार और अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए अहम होंगे। जिससे आदिवासी समुदाय और आम जनता दोनों को फायदा होगा।"
133 किलोमीटर लंबे कोडरमा-बरकाकाना (अरिगडा) दोहरीकरण परियोजना को 3,063 करोड़ रुपये की लागत से मंजूरी दी गई है। यह लाइन पटना और रांची के बीच सबसे छोटी रेल कनेक्टिविटी बनाएगी। यह इंटरसिटी यात्रा और माल ढुलाई दोनों में अहम भूमिका निभाएगी। यह रूट झारखंड के चार जिलों - कोडरमा, चतरा, हजारीबाग और रामगढ़ से होकर गुजरेगा और इससे 938 गांवों और लगभग 15 लाख की आबादी को सीधे फायदा पहु्ंचेगा। इस प्रोजेक्ट के तहत 17 बड़े पुल, 180 छोटे पुल, 42 रोड ओवर ब्रिज और 13 रोड अंडर ब्रिज बनाए जाएंगे। इस प्रोजेक्ट के पूरे हो जाने पर इससे हर साल 30.4 मिलियन टन अतिरिक्त माल की ढ़ुलाई हो पाएगी। अश्विनी वैष्णव ने कहा कि इस प्रोजेक्ट से प्रति वर्ष 163 करोड़ किलोग्राम CO2 उत्सर्जन और 32 करोड़ लीटर डीजल की बचत होने की भी उम्मीद है। यह प्रोजेक्ट पर्यावरण के लिए सात करोड़ पेड़ लगाने के बराबर फायदे मंद होगा।
बल्लारी-चिकजाजुर दोहरीकरण प्रोजेक्ट
दूसरी परियोजना, बेल्लारी-चिकजाजुर दोहरीकरण परियोजना है जो 185 किलोमीटर की दूरी को कवर करती है और इसे 3,342 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से बनाया जाएगा। यह लाइन मैंगलोर बंदरगाह को सिकंदराबाद से जोड़ती है और ऑयरन ओर, कोकिंग कोयला, स्टील, उर्वरक, पेट्रोलियम प्रोडक्ट और खाद्यान्न जैसी प्रमुख वस्तुओं के परिवहन में अहम भूमिका निभाती है। इस परियोजना से कर्नाटक के बल्लारी और चित्रदुर्ग जिलों तथा आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले के लिए कनेक्टिविटी बढ़ेगी। बल्लारी-चिकजाजुर रेलमार्ग के दोहरीकरण से 470 गांवों के लगभग 13 लाख लोगों को फायदा मिलेगा तथा सालाना आधार पर 18.9 मिलियन टन अतिरिक्त माल की ढुलाई संभव होगी।