Haryana Chandigarh Fund Scam: हरियाणा सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन के विभिन्न विभागों से जुड़े 661 करोड़ रुपये के भारी-भरकम सरकारी फंड घोटाले में CBI ने बड़ा एक्शन लिया है। शुक्रवार सुबह करीब 5:30 बजे से ही सीबीआई की टीमों ने चंडीगढ़, पंचकूला और दिल्ली-एनसीआर में एक साथ छह अलग-अलग ठिकानों पर ताबड़तोड़ छापेमारी शुरू की।
CNBC-आवाज के शंकर आनंद की रिपोर्ट के मुताबिक, इस छापेमारी के दौरान जांचकर्ताओं ने वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े कई बेहद महत्वपूर्ण दस्तावेजी और इलेक्ट्रॉनिक सबूत जब्त किए हैं।
IDFC First और AU Small Finance Bank के जरिए हुआ था खेल
सीबीआई अधिकारियों के मुताबिक, यह पूरा मामला आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक के जरिए सरकारी पैसे को दूसरी जगह ट्रांसफर करने और उसके गलत इस्तेमाल से जुड़ा है।
शुरुआती जांच में सामने आया है कि, 'हरियाणा सरकार के 8 महत्वपूर्ण विभागों और केंद्र शासित प्रदेश चंडीगढ़ के 2 विभागों के सरकारी फंड को अवैध रूप से डायवर्ट किया गया था।
आरोप है कि कुछ वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने बैंक कर्मियों के साथ मिलकर मिलीभगत की, जिसके जरिए फर्जी खाते ऑपरेट किए गए और जनता की गाढ़ी कमाई के पैसे को निजी खातों में ट्रांसफर किया गया।
नोएडा की कंपनी और अफसरों के ठिकानों पर छापेमारी
सीबीआई ने यह छापेमारी हरियाणा कैडर के कई वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों के सरकारी आवासों के साथ-साथ नोएडा स्थित 'विपम कंसलटेंसी प्राइवेट लिमिटेड' और उसके डायरेक्टर से जुड़े परिसरों पर की है।
जांच में पता चला है कि इस घोटाले को अंजाम देने के बदले में संबंधित अधिकारियों को मोटी रिश्वत और नाजायज फायदे मिले थे। इसके बाद, अपराध की इस कमाई को विपम कंसलटेंसी के खातों में भेजा गया और वहां से इसे सीधे कंपनी के डायरेक्टर के पर्सनल बैंक अकाउंट में रूट कर दिया गया। तलाशी के दौरान डिजिटल डिवाइस, प्रॉपर्टी के कागजात और कई आपत्तिजनक सामग्रियां जब्त की गई हैं।
विजिलेंस और EOW से CBI ने अपने हाथ में लिया केस
इस मामले की गंभीरता को देखते हुए सीबीआई ने हरियाणा विजिलेंस और भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो द्वारा दर्ज एक मामले और चंडीगढ़ पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) द्वारा दर्ज दो मामलों की जांच को अपने हाथ में ले लिया था। केंद्रीय एजेंसी अब इस पूरे मामले में आपराधिक साजिश, सरकारी धन के गबन और अन्य गंभीर वित्तीय धोखाधड़ी की जांच कर रही है।
चंडीगढ़ नगर निगम और बिजली विभाग में भी हुआ फ्रॉड
सीबीआई के अनुसार, इस 661 करोड़ रुपये के महाघोटाले की आंच चंडीगढ़ नगर निगम और क्रेस्ट चंडीगढ़ तक भी पहुंची है। शुरुआती जांच पूरी होने के बाद, सीबीआई ने पंचकुला की विशेष अदालत में अपनी पहली चार्जशीट भी दाखिल कर दी है। इस चार्जशीट में हरियाणा पावर जेनरेशन कॉरपोरेशन लिमिटेड (HPGCL) और हरियाणा स्कूल शिक्षा परियोजना परिषद के अधिकारियों की संलिप्तता और उनकी भूमिका का पूरा कच्चा चिट्ठा खोला गया है।