बंगाल चुनाव से पहले राज्य का सियासी तापमान बढ़ा हुआ है। इस बीच मेदिनीपुर जिले मैना इलाके में एक दिलचस्प राजनीतिक घटनाक्रम ने चर्चा बढ़ा दी है। BJP के प्रभावशाली नेता चंदन मंडल ने तृणमूल कांग्रेस (TMC) का दामन थामा है। लेकिन पार्टी में शामिल होते ही, उन्होंने मंच से ऐसी बात कह दी, जिससे TMC नेतृत्व कुछ असहज नजर आया।
TMC में शामिल होने के कार्यक्रम के दौरान चंदन मंडल पार्टी के प्रदेश महासचिव कुणाल घोष के बगल में बैठे थे। वहीं, उन्होंने मंच से राज्य में चल रही 'लक्ष्मी भंडार' योजना को लेकर बड़ा मुद्दा उठा दिया। उन्होंने कहा, "यह योजना राज्य की महिलाओं के लिए बेहद लोकप्रिय है और इससे माताओं को हर महीने आर्थिक सहायता मिलती है। लेकिन मैना क्षेत्र में कई महिलाओं को पिछले 5 से 6 महीने से योजना की राशि नहीं मिली है।"
चंदन मंडल ने बताया कि उन्होंने इस मामले को लेकर खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को पत्र लिखा था। मुख्यमंत्री ने आश्वासन दिया था कि जल्द ही बकाया राशि जारी कर दी जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ महिलाओं को पैसा मिल चुका है, लेकिन अभी भी कई परिवार इंतजार कर रहे हैं। मंच से ही उन्होंने आग्रह किया कि बकाया राशि जल्द से जल्द जारी की जाए, क्योंकि इससे गरीब परिवारों को परेशानी हो रही है।
उनके इस बयान से राजनीतिक हलकों में हलचल मच गई। हालांकि, तृणमूल की ओर से तुरंत सफाई भी आई। इस मुद्दे पर कुणाल घोष ने कहा, "कुछ इलाकों में तकनीकी कारणों या विभागीय प्रक्रियाओं की वजह से भुगतान में देरी हुई है।" उन्होंने दावा किया कि इसमें कोई राजनीतिक भेदभाव नहीं है और जल्द ही सभी लंबित भुगतान पूरे कर दिए जाएंगे।
वहीं, चंद्रिमा भट्टाचार्य ने भी कहा, "यह कोई बड़ा मुद्दा नहीं है। कई बार फॉर्म में गलती या दस्तावेजों की कमी की वजह से भुगतान रुक जाता है।" उन्होंने भरोसा दिलाया कि राज्य में किसी भी महिला को जानबूझकर वंचित नहीं रखा जा रहा है।
लक्ष्मी भंडार योजना तृणमूल सरकार की सबसे चर्चित योजनाओं में से एक रही है और चुनाव से पहले इसे बड़ा राजनीतिक हथियार माना जा रहा है। ऐसे में बकाया भुगतान का मुद्दा सत्तारूढ़ दल के लिए संवेदनशील बन गया है।
आगामी विधानसभा चुनाव के मद्देनजर हर योजना और हर बयान राजनीतिक मायने रखता है। विपक्ष इसे सरकार की विफलता के तौर पर पेश करने की कोशिश कर रहा है, जबकि तृणमूल इसे तकनीकी देरी बताकर नुकसान कम करने में जुटी है।