अनारक्षित पद का मतलब जनरल कैटेगरी का कोटा नहीं... हाईकोर्ट का प्रमोशन पर बड़ा फैसला, जानिए पूरा मामला

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अनारक्षित पदों पर आरक्षित वर्ग के योग्य कर्मचारियों की दावेदारी को लेकर अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि अनारक्षित पद सिर्फ सामान्य वर्ग के लिए नहीं होते। वरिष्ठता और योग्यता पूरी करने वाले आरक्षित वर्ग के कर्मचारियों के नाम पर भी पदोन्नति के लिए विचार किया जाना चाहिए

अपडेटेड Sep 22, 2026 पर 9:21 AM
  • Follow Us On Google
  • Add as a Preferred Source on Google
मामला स्कूल शिक्षा विभाग के लोक शिक्षण संचालनालय से जुड़ा है

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अनारक्षित पदों को लेकर एक अहम फैसला दिया है। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में कहा कि रोस्टर में दर्ज अनारक्षित पद को केवल सामान्य वर्ग के लिए नहीं माना जा सकता। अगर आरक्षित वर्ग का कोई कर्मचारी वरिष्ठता और योग्यता के आधार पर उस पद के लिए योग्य है, तो पदोन्नति (प्रमोशन) के दौरान उसके नाम पर भी विचार किया जाना जरूरी है। जस्टिस राकेश मोहन पांडेय की पीठ ने अनुसूचित जनजाति वर्ग से आने वाले अलख राम ध्रुव की पदोन्नति के मामले में विभाग को दोबारा विचार करने का निर्देश दिया है।

प्रमोशन नहीं मिलने के बाद ध्रुव ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। अब कोर्ट ने स्कूल शिक्षा विभाग को समीक्षा डीपीसी बुलाकर 90 दिनों के भीतर नए सिरे से पदोन्नति प्रक्रिया पूरी करने का आदेश दिया है। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला

क्या है पूरा मामला


मामला स्कूल शिक्षा विभाग के लोक शिक्षण संचालनालय से जुड़ा है। 53 वर्षीय रायपुर निवासी अलख राम ध्रुव सहायक ग्रेड-एक के पद पर कार्यरत थे। अलख राम ध्रुव साल 2016 में सहायक अधीक्षक पद की पदोन्नति की दौड़ में थे। डीपीसी के दौरान सहायक अधीक्षक के दो पद खाली थे। इनमें से एक पद अनारक्षित और दूसरा अनुसूचित जाति वर्ग के लिए निर्धारित था। उस समय विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) ने उन्हें पदोन्नति का मौका नहीं दिया। इसके बाद ध्रुव ने हाई कोर्ट में याचिका दाखिल कर इस फैसले को चुनौती दी।

क्या है पूरा मामला

हाई कोर्ट में दायर याचिका में अलख राम के मुताबिक वरिष्ठता के बावजूद उन्हें सिर्फ इसलिए पदोन्नति प्रक्रिया से अलग कर दिया गया, क्योंकि उनके वर्ग यानी अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए अलग से कोई पद उपलब्ध नहीं था। डीपीसी के दौरान अलख राम ध्रुव से कम वरिष्ठ कर्मचारियों के नामों पर भी विचार किया गया। सहायक ग्रेड-एक की वरिष्ठता सूची में अलख राम सबसे ऊपर थे, फिर भी सहायक अधीक्षक पद के लिए सुनील कुमार भूमरकर और शैलेश शर्मा का नाम आगे बढ़ाए गए।

दूसरी ओर, राज्य सरकार की तरफ से अधिवक्ता अखिलेश कुमार ने कोर्ट में पक्ष रखते हुए कहा कि वर्ष 2016 में खाली दोनों पदों को आरक्षण रोस्टर के नियमों के तहत भरा गया था और पूरी पदोन्नति प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार ही पूरी की गई थी।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।