72 घंटे में बैरियर लेक टूटने का खतरा! नेपाल में बाढ़ की तबाही के बीच चीन से आया ये खतरनाक अलर्ट

चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने जानकारी दी है कि नेपाल की तरफ भी लगभग 100 चीनी नागरिक लापता हैं। तिब्बत से शुरू हुआ यह उफान भोटे कोशी और त्रिशूली नदियों के जरिए आगे बढ़ा।

अपडेटेड Aug 27, 2026 पर 6:15 PM
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चीनी अधिकारियों के मुताबिक आपदा स्थल के उत्तर-पूर्व में छोचेन खोला और पुरेपू त्सांगपो नदियों के संगम पर बनी बैरियर लेक अब सबसे बड़ा खतरा बन गई है।

Nepal Flash Flood: नेपाल में भीषण बाढ़ और तबाही के बीच अब एक नया और बड़ा खतरा मंडराने लगा है। हिमालयी सीमा पार ऊपरी हिस्से में बनी एक बैरियर लेक (प्राकृतिक रुकावट से बनी झील) के टूटने की आशंका ने दोनों देशों की चिंताएं बढ़ा दी हैं। चीनी अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि यह झील अगले 72 घंटों के भीतर फूट सकती है। इससे क्षेत्र में राहत और बचाव कार्यों में गंभीर बाधा आ सकती है और बाढ़ का संकट और अधिक गहरा सकता है।

558 लोग तिब्बत की तरफ लापता, ग्यिरोंग में तबाही के बाद गांव खाली कराए गए

नेपाल सीमा से सटे तिब्बती क्षेत्र में बड़े पैमाने पर हुए भूस्खलन और मिट्टी-चट्टानों के ढहने से भयंकर तबाही हुई है। चीनी सरकारी ब्रॉडकास्टर सीसीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक नेपाल सीमा के तिब्बती हिस्से में कम से कम 558 लोग लापता हैं। यह तबाही ग्यिरोंग के पास ल्हेन्दे नदी में अचानक आए पानी के भयानक सैलाब के बाद हुई है। इसमें कम से कम तीन लोगों की मौत हो चुकी है जबकि दो ग्रामीणों को सुरक्षित रेस्क्यू किया गया है। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने खतरे वाले इलाकों में बसे गांवों को खाली करा दिया है।


चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने जानकारी दी है कि नेपाल की तरफ भी लगभग 100 चीनी नागरिक लापता हैं। तिब्बत से शुरू हुआ यह उफान भोटे कोशी और त्रिशूली नदियों के जरिए आगे बढ़ा। इसने नेपाल में बड़ी तबाही मचाई है। नेपाल में इस आपदा की वजह से कम से कम 359 लोगों की जान जा चुकी है और सैकड़ों लोग लापता हैं। कई मकान, सड़कें और जलविद्युत परियोजनाएं पानी के बहाव में बह गई हैं।

72 घंटे में बैरियर लेक टूटने की चेतावनी, झील में भरा 20 लाख घन मीटर पानी

चीनी अधिकारियों के मुताबिक आपदा स्थल के उत्तर-पूर्व में छोचेन खोला और पुरेपू त्सांगपो नदियों के संगम पर बनी बैरियर लेक अब सबसे बड़ा खतरा बन गई है। चीन के जल संसाधन मंत्रालय ने इस झील की निगरानी बढ़ा दी है। सीसीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक गुरुवार तक इस झील में अनुमानित 20 लाख घन मीटर पानी जमा हो चुका था और यह पहले से ही ओवरफ्लो हो रही है।

अधिकारियों ने आगाह किया है कि अगले तीन दिनों में इस झील में और 30 लाख घन मीटर पानी बहकर आने की संभावना है। इससे 72 घंटों के भीतर इसके टूटने की पूरी आशंका है।

राहत कार्य के लिए बीजिंग और चेंगदू से टीमें रवाना, ग्यिरोंग कस्बे में बिजली बहाल

आपदा की भयावहता को देखते हुए चीन सरकार ने बड़े पैमाने पर राहत और बचाव कार्य शुरू किए हैं। स्थानीय पुलिस और सशस्त्र बलों की मदद के लिए बीजिंग और चेंगदू से फायर एंड रेस्क्यू टीमों को तुरंत मौके पर भेजा गया है। सरकारी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक ग्यिरोंग कस्बे के मध्य शहरी इलाकों में बिजली और संचार सुविधाएं बहाल कर दी गई हैं। हालांकि पोर्टसे संपर्क अभी भी पूरी तरह कटा हुआ है, जिसे बहाल करने की कोशिश की जा रही है।

2025 में भी घटी थी ऐसी ही घटना

हिमालयी क्षेत्र में इस तरह की अचानक आई भीषण बाढ़ कोई पहली घटना नहीं है। ठीक एक साल पहले अगस्त 2025 में भी तिब्बत में एक ग्लेशियर झील ओवरफ्लो हो गई थी। उस घटना में नौ लोगों की मौत हो गई थी और नेपाल, चीन को जोड़ने वाले एक प्रमुख पुल सहित कई जरूरी इंफ्रा को भारी नुकसान पहुंचा था।

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