क्या 400 लोगों की टीम के साथ भारत आएंगे चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग? गलवान विवाद के बाद पहली भारत यात्रा को लेकर ये पता चला

Xi Jinping India visit BRICS Summit: गलवान घाटी झड़प के बाद पहली बार चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग भारत आ सकते हैं। खबर है कि सितंबर में दिल्ली में होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन के लिए चीन के 400 अधिकारियों की टीम होटल और सुरक्षा व्यवस्था में जुट गई है। क्या सालों से जारी भारत-चीन सीमा तनाव के बीच यह रिश्तों में जमी बर्फ पिघलने का बड़ा संकेत है?

अपडेटेड Aug 25, 2026 पर 1:31 PM
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सात वर्षों में राष्ट्रपति शी जिनपिंग की पहली भारत यात्रा होगी

XI Jinping India Visit: चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग सिचंबर में दिल्ली में आयोजित होने वाले ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए भारत की यात्रा कर सकते हैं। उनके साथ लगभग 400 अधिकारियों का एक बड़ा प्रतिनिधिमंडल भी आ सकता है।

रॉयटर्स के हवाले से हमारी सहयोगी वेबसाइट फर्स्टपोस्ट ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि अगर इस दौरे की आधिकारिक पुष्टि होती है तो यह सात वर्षों में राष्ट्रपति शी जिनपिंग की पहली भारत यात्रा होगी। अगर ऐसा होता है तो सीमा विवाद को लेकर सालों से चल रहे तनाव के बीच इसे दोनों देशों द्वारा संबंधों को सुधारने की दिशा में बड़ा कदम समझा जाएगा।

12-13 सितंबर को ब्रिक्स सम्मेलन, तैयारियों में जुटे चीनी अधिकारी


भारत 12 और 13 सितंबर को नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी करने जा रहा है। इस संभावित दौरे की तैयारियों से वाकिफ एक भारतीय सूत्र ने रॉयटर्स को बताया कि चीनी अधिकारी यात्रा से पहले होटल बुकिंग और सुरक्षा व्यवस्था पर काम कर रहे हैं। 2 और भारतीय सूत्रों ने बताया कि शी जिनपिंग लगभग 400 अधिकारियों के बड़े लश्कर के साथ भारत आ सकते हैं। यह प्रतिनिधिमंडल 2019 में उनकी पिछली भारत यात्रा के दौरान आए करीब 200 अधिकारियों के दल से काफी बड़ा होगा।

चीन ने आधिकारिक पुष्टि पर क्या कहा?

वैसे चीन ने अभी तक राष्ट्रपति शी जिनपिंग के यात्रा प्लान की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। जब चीनी विदेश मंत्रालय से चीनी राष्ट्रपति के सम्मेलन में शामिल होने की संभावना के बारे में पूछा गया तो मंत्रालय ने कहा कि बीजिंग ब्रिक्स सहयोग को बहुत महत्व देता है और इसमें सक्रिय रूप से हिस्सा लेता है और मेजबान के रूप में भारत का समर्थन करता है। हालांकि विदेश मंत्रालय ने यह भी कहा कि फिलहाल उसके पास शी जिनपिंग के यात्रा कार्यक्रमों से जुड़ी कोई जानकारी उपलब्ध नहीं है।

गलवान घाटी में हिंसक झड़प के बाद सीमा पर लंबे समय तक रहा तनाव

आपको बता दें कि जून 2020 में चीन के साथ हिमालयी सीमा पर गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद भारत और चीन के बीच संबंधों में बहुत खटास आ गई थी। इस घटना के बाद करीब 3800 किलोमीटर लंबी विवादित सीमा पर दोनों देशों ने हजारों सैनिकों की तैनाती कर दी थी। दोनों देशों के बीच इसे लेकर काफी समय तक सैन्य गतिरोध बना रहा।

सालों तक चले इस टकराव के बाद अक्टूबर 2024 में दोनों पक्ष सैन्य वापसी पर सहमत हुए थे। इसके बाद बॉर्डर पर तनाव थोड़ा कम हुआ। हालांकि बॉर्डर इश्यू और द्विपक्षीय संबंधों से जुड़े कई मामलों को लेकर दोनों देशों के बीच अभी भी बड़े मतभेद बने हुए हैं।

क्या भारत-चीन के रिश्तों में जमी बर्फ धीरे-धीरे बर्फ पिघल रही है?

तनाव के बावजूद हाल के वर्षों में दोनों देशों ने राजनयिक जुड़ाव को फिर से बनाने की दिशा में कदम उठाए हैं। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सात वर्षों में पहली बार पिछले साल चीन का दौरा किया था वहीं दोनों पक्षों के अधिकारियों ने सीमा संबंधी तनाव को मैनेज करने और कम्युनिकेशन बढ़ाने के लिए कई दौर की बातचीत की।

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन से ठीक पहले भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल ने बीजिंग की यात्रा की है और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के साथ चर्चा भी की है। माना जा रहा है कि इन चर्चाओं में सीमा विवाद प्रमुख मुद्दों में शामिल रहा। ऐसे में अगर शी जिनपिंग की भारत यात्रा होती है तो ये दोनों सरकारों को बातचीत की कड़ी को और मजबूत करने के साथ मतभेदों को सुलझाने का एक बड़ा मौका बन सकती है।

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